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Unnao News: 54 हजार मतदाताओं का सत्यापन अधूरा, तहसील प्रशासन ने दिया नोटिस
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फोटो-24- हसेवा निवासी पूनम सिंह की आपत्ति की सुनवाई करते तहसीलदार अविनाश चौधरी। संवाद
- फोटो : 1
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उन्नाव/हसनगंज। तहसील क्षेत्र के 54 हजार मतदाताओं का रिकॉर्ड मिलान और सत्यापन न होने पर नोटिस जारी किया है। तहसीलदार के न्यायालय में प्रतिदिन ऐसे 150 मतदाताओं की सुनवाई हो रही है। इनमें मायके पक्ष के 2003 की मतदाता सूची का ब्योरा न दे पाने वाली महिलाएं और शिफ्टेड मतदाता शामिल हैं। महिलाओं को प्रशासन ने हाईस्कूल का शैक्षिक दस्तावेज प्रस्तुत करने का विकल्प दिया है। अन्यथा उनके नाम मतदाता सूची से हटा दिए जाएंगे।
54 हजार मतदाताओं का रिकॉर्ड मिलान और सत्यापन पूरा न होने का प्रमुख कारण विवाहित महिलाओं के वर्ष 2003 की मतदाता सूची में मायके पक्ष का ब्योरा न दे पाना है। इस फेहरिस्त में ऐसे भी नाम हैं जो रोजगार के सिलसिले में मुंबई, दिल्ली, लुधियाना और चंडीगढ़ जैसे शहरों में हैं। इसके चलते एसआईआर की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। तहसील प्रशासन ने ऐसे मतदाताओं के परिजनों को नोटिस जारी कर न्यायालय में बुलाया गया। शुक्रवार को तहसीलदार अविनाश चौधरी ने 43 मतदाताओं के परिजनों की सुनवाई की। महिलाओं को मायके की वर्ष 2003 की मतदाता सूची, माता-पिता का क्रमांक और बूथ संख्या उपलब्ध कराने के लिए एक सप्ताह का समय दिया है।
तहसीलदार अविनाश चौधरी ने बताया कि एसआईआर के लिए प्रतिदिन 150 मतदाताओं की न्यायालय में सुनवाई की जा रही है। सुनवाई की रिपोर्ट और फोटो आयोग की वेबसाइट पर ऑनलाइन अपलोड की जा रही है। जिन मतदाताओं का रिकॉर्ड एक सप्ताह के अंदर उपलब्ध नहीं कराया जाएगा, उनका नाम मतदाता सूची से हटाने की कार्रवाई की जाएगी।
हाईस्कूल का शैक्षिक दस्तावेज बन सकता है विकल्प
विवाहित महिलाओं के मामले में बड़ी संख्या ऐसे मतदाताओं की है जो अपने मायके पक्ष का वर्ष 2003 की मतदाता सूची का ब्योरा नहीं दे पा रहीं है। तहसीलदार अवनीश चौधरी ने बताया कि ऐसी स्थित में महिलाएं सत्यापन के लिए हाईस्कूल का शैक्षिक दस्तावेज प्रस्तुत कर सकतीं हैं। इसके न होने की दशा में संबंधित का नाम मतदाता सूची से हटाने की कार्रवाई की जाएगी।
बहू के ब्योरे के लिए सास ने मांगा एक सप्ताह का समय
जिंदासपुर गांव निवासी नन्ही (बूथ संख्या 190) का कोई रिकॉर्ड न मिलने पर मायके पक्ष से वर्ष 2003 की मतदाता सूची से जानकारी मांगी गई। इस पर सास रामजानकी ने एक सप्ताह में अभिलेख उपलब्ध कराने की बात कही।
कोई लुधियाना तो कोई मुंबई में
बूथ संख्या 187 हसनगंज निवासी रजाना की मां ने बताया कि बेटी लुधियाना में रहती है। हसनगंज निवासी सुभाषिनी के मामले में ससुर गंगा प्रसाद ने बताया कि बहू मुंबई में निवास कर रही है।
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54 हजार मतदाताओं का रिकॉर्ड मिलान और सत्यापन पूरा न होने का प्रमुख कारण विवाहित महिलाओं के वर्ष 2003 की मतदाता सूची में मायके पक्ष का ब्योरा न दे पाना है। इस फेहरिस्त में ऐसे भी नाम हैं जो रोजगार के सिलसिले में मुंबई, दिल्ली, लुधियाना और चंडीगढ़ जैसे शहरों में हैं। इसके चलते एसआईआर की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। तहसील प्रशासन ने ऐसे मतदाताओं के परिजनों को नोटिस जारी कर न्यायालय में बुलाया गया। शुक्रवार को तहसीलदार अविनाश चौधरी ने 43 मतदाताओं के परिजनों की सुनवाई की। महिलाओं को मायके की वर्ष 2003 की मतदाता सूची, माता-पिता का क्रमांक और बूथ संख्या उपलब्ध कराने के लिए एक सप्ताह का समय दिया है।
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तहसीलदार अविनाश चौधरी ने बताया कि एसआईआर के लिए प्रतिदिन 150 मतदाताओं की न्यायालय में सुनवाई की जा रही है। सुनवाई की रिपोर्ट और फोटो आयोग की वेबसाइट पर ऑनलाइन अपलोड की जा रही है। जिन मतदाताओं का रिकॉर्ड एक सप्ताह के अंदर उपलब्ध नहीं कराया जाएगा, उनका नाम मतदाता सूची से हटाने की कार्रवाई की जाएगी।
हाईस्कूल का शैक्षिक दस्तावेज बन सकता है विकल्प
विवाहित महिलाओं के मामले में बड़ी संख्या ऐसे मतदाताओं की है जो अपने मायके पक्ष का वर्ष 2003 की मतदाता सूची का ब्योरा नहीं दे पा रहीं है। तहसीलदार अवनीश चौधरी ने बताया कि ऐसी स्थित में महिलाएं सत्यापन के लिए हाईस्कूल का शैक्षिक दस्तावेज प्रस्तुत कर सकतीं हैं। इसके न होने की दशा में संबंधित का नाम मतदाता सूची से हटाने की कार्रवाई की जाएगी।
बहू के ब्योरे के लिए सास ने मांगा एक सप्ताह का समय
जिंदासपुर गांव निवासी नन्ही (बूथ संख्या 190) का कोई रिकॉर्ड न मिलने पर मायके पक्ष से वर्ष 2003 की मतदाता सूची से जानकारी मांगी गई। इस पर सास रामजानकी ने एक सप्ताह में अभिलेख उपलब्ध कराने की बात कही।
कोई लुधियाना तो कोई मुंबई में
बूथ संख्या 187 हसनगंज निवासी रजाना की मां ने बताया कि बेटी लुधियाना में रहती है। हसनगंज निवासी सुभाषिनी के मामले में ससुर गंगा प्रसाद ने बताया कि बहू मुंबई में निवास कर रही है।
