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Unnao News: स्टाफ-डॉक्टर की कमी से औरास सीएचसी खुद बीमार
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फोटो-11- औरास सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का भवन। संवाद
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औरास (उन्नाव)। आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे से महज 500 मीटर की दूरी पर स्थित औरास सीएचसी में न तो पर्याप्त स्टाफ है और न ही जांच की सुविधाएं। इस कारण एक्सप्रेसवे पर होने वाले हादसों के घायलों के पहुंचने पर उन्हें प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल या लखनऊ ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया जाता है। कई बार समुचित उपचार में देरी से घायलों की जान चली जाती है। यदि यहां सुविधाएं बढ़ा दी जाएं तो कई घायलों की जान बच सकती है।
इस इलाके से होकर निकले आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे से प्रतिदिन 66 हजार से अधिक छोटे-बड़े वाहन गुजरते हैं। तेज रफ्तार के चलते आए दिन एक्सप्रेसवे पर हादसे होते रहते हैं। हादसों में घायलों को सबसे पहले इसी सीएचसी में लाया जाता है लेकिन यहां जांच सुविधाओं, डॉक्टरों व स्टाफ के अभाव के चलते समुचित इलाज नहीं मिल पाता है। प्राथमिक उपचार के बाद घायलों को जिला अस्पताल, लखनऊ के ट्राॅमा सेंटर या फिर लोक बंधु अस्पताल रेफर कर दिया जाता है। कई बार इलाज में देरी से घायलों की जान पर बन आती
ट्राॅमा सेंटर की मांग पर नहीं दिया ध्यान
यहां के लोगों का कहना है कि एक्सप्रेसवे पर आए दिन होने वाले हादसों को देखते हुए सीएचसी को ट्राॅमा सेंटर के रूप में विकसित करने की मांग कई बार की जा चुकी है लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। एक्सप्रेसवे से नजदीक इस अस्पताल में बेहतरीन आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था होना जरूरी है। सीएचसी में बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अनूप तिवारी और फिजीशियन डॉ. सुमित की ही तैनाती है। जो बारी-बारी से 24 घंटे ड्यूटी करते हैं। अस्पताल में हड्डी रोग विशेषज्ञ, जनरल सर्जन, ईएनटी, एनेस्थीसिया जैसे डॉक्टरों की तैनाती नहीं है। फ्रैक्चर होने या फिर कान, नाक या मुंह से खून आने वाले मरीजों के लिए विशेषज्ञ डॉक्टर न होने से रेफर करना मजबूरी है।
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हेल्थ एटीएम और सेलेक्ट्रा मशीन बंद
अस्पताल की पैथोलॉजी व्यवस्था भी बदहाल है। यहां लगे हेल्थ एटीएम में जांच किट नहीं है। इसके अलावा रीजेंट की कमी के कारण सेलेक्ट्रा मशीन बंद पड़ी है। इमरजेंसी में एक्सरे और जरूरी पैथोलॉजी जांच की सुविधा समय पर नहीं मिल पाती। इससे मरीजों को निजी पैथोलॉजी का सहारा लेना पड़ता है।
ये दूरी तय करने में घायलों की बिगड़ जाती है स्थिति
- सीएचसी से जिला अस्पताल की दूरी करीब 55 किलोमीटर है। यातायात साफ होने पर मरीज को यहां से जिला अस्पताल पहुंचाने में करीब एक घंटे का समय लगता है।
- सीएचसी से लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) की दूरी करीब 60 किलोमीटर और एसजीपीआई की दूरी लगभग 65 किलोमीटर है। घायलों को वहां पहुंचाने में करीब सवा घंटे का समय लगता है।
-कई बार सीएचसी से जिला अस्पताल भेजे गए घायलों को कानपुर हैलट रेफर कर दिया जाता है। ऐसे में रेफर करने की कार्रवाई और कानपुर तक पहुंचने में एक घंटे का अतिरिक्त समय लग जाता है।
इन सुविधाओं का किया जाता है दावा
सीएचसी में 24 घंटे इमरजेंसी सेवा उपलब्ध। वार्ड में ऑक्सीजन, नेबुलाइजर, सक्शन मशीन, मॉनिटर और ईसीजी मशीन जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। मरीजों के लिए स्ट्रेचर, व्हीलचेयर और इमरजेंसी बेड भी मौजूद हैं। जीवन रक्षक दवाएं व जरूरी इंजेक्शन भी अस्पताल में उपलब्ध होने का दावा है।
वर्जन....
अस्पताल में डॉक्टरों और अन्य स्टाफ की भारी कमी है। स्टाफ व डॉक्टर की तैनाती के लिए मार्च 2026, अप्रैल 2026 और हाल ही में 27 मई को मुख्य चिकित्सा अधिकारी व विभाग के अन्य उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा है। अभी तक स्वीकृति नहीं मिली है। स्टाफ और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध न होने के कारण गंभीर मरीजों को जिला अस्पताल और ट्रॉमा सेंटर रेफर करना पड़ता है।-डॉ. अनूप तिवारी, सीएचसी अधीक्षक, औरास।
आला लगाते ही डॉक्टर कर देते हैं रेफर
फोटो-24-नीरज कुमार
हाजीपुर गोसा गांव निवासी नीरज कुमार ने बताया करीब तीन लाख आबादी के इलाज के लिए बनी सीएचसी में व्यवस्थाएं चौपट हैं। न तो दवाएं मिलती हैं और न ही जांच की सुविधा। डॉक्टर गंभीर मरीज को आला लगाते ही रेफर कर देते हैं। लोगों को स्वास्थ्य सुविधा नहीं मिल पा रही है।
फोटो-25-गौरव पांडेय।
ट्रॉमा सेंटर बनने पर बच सकती घायलों की जान
कस्बा औरास निवासी सभासद गौरव पांडेय ने बताया एक्सप्रेसवे पर लगभग हर रोज होने वाले हादसों को देखते हुए सीएचसी में ट्राॅमा सेंटर बनाने की आवश्यकता है। हादसों में घायल हुए लोगों की लखनऊ पहुंचने और इलाज शुरू होने तक हालत बिगड़ जाती है और कई की मौत भी होती है।
सीएचसी में मिलता इलाज तो न जाती इनकी जान
26 मई -एक्सप्रेसवे पर नीभाखेड़ा गांव के पास हुए बस हादसे में घायल गोरखपुर की अर्चना उर्फ गुड़िया इलाज के लिए छटपटाती रही। हालत गंभीर देख उसे आनन-फानन रेफर कर दिया गया। लखनऊ ट्रामा सेंटर में मौत हो गई।
01 फरवरी-गोरखपुर के शेखर ऑपरेशन कराने दिल्ली जा रहे थे तभी हसनगंज के तालासरांय के पास एंबुलेंस दुर्घटनाग्रस्त हो गई। पीआरवी ने शेखर को औरास सीएचसी पहुंचाया। इमरजेंसी वार्ड में डाॅक्टर न मिलने पर समुचित इलाज नहीं मिल सका और बाद में मौत हो गई।
03 जनवरी-एक्सप्रेसवे के रास्ते कासिमपुर के ज्वाला खेड़ा निवासी मंजेश बाइक से लखनऊ जा रहे थे। औरास के बरादेव गांव के पास बाइक डिवाइडर से टकरा गई और घायल को सीएचसी लाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद रेफर कर दिया गया। लखनऊ ले जाते समय रास्ते में मौत हो गई।
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इस इलाके से होकर निकले आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे से प्रतिदिन 66 हजार से अधिक छोटे-बड़े वाहन गुजरते हैं। तेज रफ्तार के चलते आए दिन एक्सप्रेसवे पर हादसे होते रहते हैं। हादसों में घायलों को सबसे पहले इसी सीएचसी में लाया जाता है लेकिन यहां जांच सुविधाओं, डॉक्टरों व स्टाफ के अभाव के चलते समुचित इलाज नहीं मिल पाता है। प्राथमिक उपचार के बाद घायलों को जिला अस्पताल, लखनऊ के ट्राॅमा सेंटर या फिर लोक बंधु अस्पताल रेफर कर दिया जाता है। कई बार इलाज में देरी से घायलों की जान पर बन आती
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ट्राॅमा सेंटर की मांग पर नहीं दिया ध्यान
यहां के लोगों का कहना है कि एक्सप्रेसवे पर आए दिन होने वाले हादसों को देखते हुए सीएचसी को ट्राॅमा सेंटर के रूप में विकसित करने की मांग कई बार की जा चुकी है लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। एक्सप्रेसवे से नजदीक इस अस्पताल में बेहतरीन आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था होना जरूरी है। सीएचसी में बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अनूप तिवारी और फिजीशियन डॉ. सुमित की ही तैनाती है। जो बारी-बारी से 24 घंटे ड्यूटी करते हैं। अस्पताल में हड्डी रोग विशेषज्ञ, जनरल सर्जन, ईएनटी, एनेस्थीसिया जैसे डॉक्टरों की तैनाती नहीं है। फ्रैक्चर होने या फिर कान, नाक या मुंह से खून आने वाले मरीजों के लिए विशेषज्ञ डॉक्टर न होने से रेफर करना मजबूरी है।
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हेल्थ एटीएम और सेलेक्ट्रा मशीन बंद
अस्पताल की पैथोलॉजी व्यवस्था भी बदहाल है। यहां लगे हेल्थ एटीएम में जांच किट नहीं है। इसके अलावा रीजेंट की कमी के कारण सेलेक्ट्रा मशीन बंद पड़ी है। इमरजेंसी में एक्सरे और जरूरी पैथोलॉजी जांच की सुविधा समय पर नहीं मिल पाती। इससे मरीजों को निजी पैथोलॉजी का सहारा लेना पड़ता है।
ये दूरी तय करने में घायलों की बिगड़ जाती है स्थिति
- सीएचसी से जिला अस्पताल की दूरी करीब 55 किलोमीटर है। यातायात साफ होने पर मरीज को यहां से जिला अस्पताल पहुंचाने में करीब एक घंटे का समय लगता है।
- सीएचसी से लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) की दूरी करीब 60 किलोमीटर और एसजीपीआई की दूरी लगभग 65 किलोमीटर है। घायलों को वहां पहुंचाने में करीब सवा घंटे का समय लगता है।
-कई बार सीएचसी से जिला अस्पताल भेजे गए घायलों को कानपुर हैलट रेफर कर दिया जाता है। ऐसे में रेफर करने की कार्रवाई और कानपुर तक पहुंचने में एक घंटे का अतिरिक्त समय लग जाता है।
इन सुविधाओं का किया जाता है दावा
सीएचसी में 24 घंटे इमरजेंसी सेवा उपलब्ध। वार्ड में ऑक्सीजन, नेबुलाइजर, सक्शन मशीन, मॉनिटर और ईसीजी मशीन जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। मरीजों के लिए स्ट्रेचर, व्हीलचेयर और इमरजेंसी बेड भी मौजूद हैं। जीवन रक्षक दवाएं व जरूरी इंजेक्शन भी अस्पताल में उपलब्ध होने का दावा है।
वर्जन....
अस्पताल में डॉक्टरों और अन्य स्टाफ की भारी कमी है। स्टाफ व डॉक्टर की तैनाती के लिए मार्च 2026, अप्रैल 2026 और हाल ही में 27 मई को मुख्य चिकित्सा अधिकारी व विभाग के अन्य उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा है। अभी तक स्वीकृति नहीं मिली है। स्टाफ और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध न होने के कारण गंभीर मरीजों को जिला अस्पताल और ट्रॉमा सेंटर रेफर करना पड़ता है।-डॉ. अनूप तिवारी, सीएचसी अधीक्षक, औरास।
आला लगाते ही डॉक्टर कर देते हैं रेफर
फोटो-24-नीरज कुमार
हाजीपुर गोसा गांव निवासी नीरज कुमार ने बताया करीब तीन लाख आबादी के इलाज के लिए बनी सीएचसी में व्यवस्थाएं चौपट हैं। न तो दवाएं मिलती हैं और न ही जांच की सुविधा। डॉक्टर गंभीर मरीज को आला लगाते ही रेफर कर देते हैं। लोगों को स्वास्थ्य सुविधा नहीं मिल पा रही है।
फोटो-25-गौरव पांडेय।
ट्रॉमा सेंटर बनने पर बच सकती घायलों की जान
कस्बा औरास निवासी सभासद गौरव पांडेय ने बताया एक्सप्रेसवे पर लगभग हर रोज होने वाले हादसों को देखते हुए सीएचसी में ट्राॅमा सेंटर बनाने की आवश्यकता है। हादसों में घायल हुए लोगों की लखनऊ पहुंचने और इलाज शुरू होने तक हालत बिगड़ जाती है और कई की मौत भी होती है।
सीएचसी में मिलता इलाज तो न जाती इनकी जान
26 मई -एक्सप्रेसवे पर नीभाखेड़ा गांव के पास हुए बस हादसे में घायल गोरखपुर की अर्चना उर्फ गुड़िया इलाज के लिए छटपटाती रही। हालत गंभीर देख उसे आनन-फानन रेफर कर दिया गया। लखनऊ ट्रामा सेंटर में मौत हो गई।
01 फरवरी-गोरखपुर के शेखर ऑपरेशन कराने दिल्ली जा रहे थे तभी हसनगंज के तालासरांय के पास एंबुलेंस दुर्घटनाग्रस्त हो गई। पीआरवी ने शेखर को औरास सीएचसी पहुंचाया। इमरजेंसी वार्ड में डाॅक्टर न मिलने पर समुचित इलाज नहीं मिल सका और बाद में मौत हो गई।
03 जनवरी-एक्सप्रेसवे के रास्ते कासिमपुर के ज्वाला खेड़ा निवासी मंजेश बाइक से लखनऊ जा रहे थे। औरास के बरादेव गांव के पास बाइक डिवाइडर से टकरा गई और घायल को सीएचसी लाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद रेफर कर दिया गया। लखनऊ ले जाते समय रास्ते में मौत हो गई।

फोटो-11- औरास सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का भवन। संवाद

फोटो-11- औरास सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का भवन। संवाद

फोटो-11- औरास सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का भवन। संवाद