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Unnao News: 100 बेड का अस्पताल...इलाज के नाम पर सिर्फ मरहम-पट्टी
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फोटो-2- नगर पंचायत में हाईवे किनारे स्थित 100 बेड अस्पताल। संवाद
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बीघापुर। उन्नाव-लालगंज हाईवे किनारे स्थित 100 बेड का संयुक्त अस्पताल लोगों की जरूरत पर खरा नहीं उतर रहा है। डॉक्टरों, स्टाफ और उपकरणों की कमी के कारण गंभीर रूप से घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है। अस्पताल में अल्ट्रासाउंड कक्ष है लेकिन न तो अल्ट्रासाउंड मशीन है और न ही रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती। अस्पताल में सीटी स्कैन की कोई व्यवस्था नहीं है। एक्सरे कक्ष में तैनात टेक्नीशियन व डार्क रूम सहायक का तबादला हो जाने से मरीजों के एक्सरे भी नहीं हो रहे।
उन्नाव-लालगंज हाईवे रायबरेली, सुल्तानपुर, प्रतापगढ़ और प्रयागराज को जोड़ता है। इस हाईवे पर प्रतिदिन सैकड़ों छोटे-बड़े वाहनों का आवागमन होता है। ऐसे में यहां अक्सर सड़क हादसे होते रहते हैं। दुर्घटना के बाद एंबुलेंस घायलों को सबसे नजदीक इसी अस्पताल लाती हैं। हालांकि यहां संसाधनों और विशेषज्ञ चिकित्सकों की भारी कमी है। उचित इलाज में हुई देरी कई बार घायलों की जान पर भारी पड़ जाती है। अस्पताल में आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं।
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इन व्यवस्थाओं का किया जाता है दावा
अस्पताल में इमरजेंसी वार्ड में 24 घंटे ईएमओ, फार्मासिस्ट, वार्डबॉय की मौजूदगी रहती है। ऑक्सीजन, नेबुलाइजर, सक्शन मशीन, मॉनिटर, ईसीजी, खून की जांच की सुविधा उपलब्ध है। इमरजेंसी वार्ड में पर्याप्त बेड के अलावा जीवन रक्षक सभी जरूरी इंजेक्शन व दवाओं की अस्पताल में उपलब्धता के दावे हैं।
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जरूरत के हिसाब से नहीं है डॉक्टरों व पैरामेडिकल स्टाफ की तैनाती
अस्पताल में पुरुष विभाग में डॉक्टरों के 22 पद सृजित हैं। इसके सापेक्ष सात की ही तैनाती है। महिला विभाग में सृजित 12 पदों के सापेक्ष तीन ही डॉक्टरों से काम चलाया जा रहा है। इसके अलावा पैरामेडिकल व अन्य स्टाफ के कुल 66 पद सृजित है जिनमें केवल 15 की तैनाती है। दुर्घटना के घायलों के उपचार के लिए हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. पुष्कर की तैनाती है लेकिन ऑपरेशन में लगने वाले उपकरण, प्लेट आदि की व्यवस्था न होने से ऑपरेशन के लिए मरीजों को जिला अस्पताल और कानपुर भेज दिया जाता है। वहीं, जनरल सर्जन व एनेस्थीसिया का डॉक्टर न होने से सामान्य सर्जरी भी नहीं हो पा रही है।
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कई बार देरी पड़ जाती है गंभीर घायलों की जान पर भारी
हाईवे पर सड़क दुर्घटना में गंभीर घायल मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद अस्पताल से 30 किलोमीटर दूर जिला अस्पताल रेफर किया जाता है। वहां भी समुचित इलाज न मिल पाने की आशंका में परिजन घायलों को 50 किलोमीटर दूर कानपुर या 90 किलोमीटर दूर लखनऊ के अस्पतालों में ले जाते हैं। ऐसे में कई बार उपचार में हुई देरी घायलों की जान पर भारी पड़ जाती है।
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फोटो-6- डॉ. पीके दोहरे।
खामियां दूर करने के लिए लिखा है पत्र
सीएमएस डॉ. पीके दोहरे ने बताया कि अस्पताल में सृजित पदों के सापेक्ष डॉक्टर व स्टाफ की तैनाती न होने से अस्पताल के संचालन में दिक्कत आ रही है। एनेस्थीसिया के डॉक्टर व जरूरी उपकरणों के अभाव में ऑपरेशन नहीं हो पा रहे हैं। मरीजों को बेहतर उपचार के लिए रेफर करना मजबूरी है। व्यवस्थागत कमियों के लिए लगातार उच्चाधिकारियों से पत्राचार किया जा रहा है।
फोटो-7- विधायक आशुतोष शुक्ला।
सुविधाएं बढ़ाने के लिए कर रहे पैरवी
विधायक भगवंतनगर विधायक आशुतोष शुक्ला का कहना है कि अस्पताल में आवश्यक डॉक्टरों की उपलब्धता के लिए लगातार सरकार से पैरवी की जा रही है। अपनी निधि से अस्पताल में आंख के ऑपरेशन के लिए मशीन लगवा दी है जिससे लोगों के मुफ्त ऑपरेशन रहे रहे हैं। अल्ट्रासाउंड मशीन के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। शीघ्र ही लोगों को राहत मिलेगी।
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उन्नाव-लालगंज हाईवे रायबरेली, सुल्तानपुर, प्रतापगढ़ और प्रयागराज को जोड़ता है। इस हाईवे पर प्रतिदिन सैकड़ों छोटे-बड़े वाहनों का आवागमन होता है। ऐसे में यहां अक्सर सड़क हादसे होते रहते हैं। दुर्घटना के बाद एंबुलेंस घायलों को सबसे नजदीक इसी अस्पताल लाती हैं। हालांकि यहां संसाधनों और विशेषज्ञ चिकित्सकों की भारी कमी है। उचित इलाज में हुई देरी कई बार घायलों की जान पर भारी पड़ जाती है। अस्पताल में आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं।
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इन व्यवस्थाओं का किया जाता है दावा
अस्पताल में इमरजेंसी वार्ड में 24 घंटे ईएमओ, फार्मासिस्ट, वार्डबॉय की मौजूदगी रहती है। ऑक्सीजन, नेबुलाइजर, सक्शन मशीन, मॉनिटर, ईसीजी, खून की जांच की सुविधा उपलब्ध है। इमरजेंसी वार्ड में पर्याप्त बेड के अलावा जीवन रक्षक सभी जरूरी इंजेक्शन व दवाओं की अस्पताल में उपलब्धता के दावे हैं।
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जरूरत के हिसाब से नहीं है डॉक्टरों व पैरामेडिकल स्टाफ की तैनाती
अस्पताल में पुरुष विभाग में डॉक्टरों के 22 पद सृजित हैं। इसके सापेक्ष सात की ही तैनाती है। महिला विभाग में सृजित 12 पदों के सापेक्ष तीन ही डॉक्टरों से काम चलाया जा रहा है। इसके अलावा पैरामेडिकल व अन्य स्टाफ के कुल 66 पद सृजित है जिनमें केवल 15 की तैनाती है। दुर्घटना के घायलों के उपचार के लिए हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. पुष्कर की तैनाती है लेकिन ऑपरेशन में लगने वाले उपकरण, प्लेट आदि की व्यवस्था न होने से ऑपरेशन के लिए मरीजों को जिला अस्पताल और कानपुर भेज दिया जाता है। वहीं, जनरल सर्जन व एनेस्थीसिया का डॉक्टर न होने से सामान्य सर्जरी भी नहीं हो पा रही है।
कई बार देरी पड़ जाती है गंभीर घायलों की जान पर भारी
हाईवे पर सड़क दुर्घटना में गंभीर घायल मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद अस्पताल से 30 किलोमीटर दूर जिला अस्पताल रेफर किया जाता है। वहां भी समुचित इलाज न मिल पाने की आशंका में परिजन घायलों को 50 किलोमीटर दूर कानपुर या 90 किलोमीटर दूर लखनऊ के अस्पतालों में ले जाते हैं। ऐसे में कई बार उपचार में हुई देरी घायलों की जान पर भारी पड़ जाती है।
फोटो-6- डॉ. पीके दोहरे।
खामियां दूर करने के लिए लिखा है पत्र
सीएमएस डॉ. पीके दोहरे ने बताया कि अस्पताल में सृजित पदों के सापेक्ष डॉक्टर व स्टाफ की तैनाती न होने से अस्पताल के संचालन में दिक्कत आ रही है। एनेस्थीसिया के डॉक्टर व जरूरी उपकरणों के अभाव में ऑपरेशन नहीं हो पा रहे हैं। मरीजों को बेहतर उपचार के लिए रेफर करना मजबूरी है। व्यवस्थागत कमियों के लिए लगातार उच्चाधिकारियों से पत्राचार किया जा रहा है।
फोटो-7- विधायक आशुतोष शुक्ला।
सुविधाएं बढ़ाने के लिए कर रहे पैरवी
विधायक भगवंतनगर विधायक आशुतोष शुक्ला का कहना है कि अस्पताल में आवश्यक डॉक्टरों की उपलब्धता के लिए लगातार सरकार से पैरवी की जा रही है। अपनी निधि से अस्पताल में आंख के ऑपरेशन के लिए मशीन लगवा दी है जिससे लोगों के मुफ्त ऑपरेशन रहे रहे हैं। अल्ट्रासाउंड मशीन के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। शीघ्र ही लोगों को राहत मिलेगी।

फोटो-2- नगर पंचायत में हाईवे किनारे स्थित 100 बेड अस्पताल। संवाद

फोटो-2- नगर पंचायत में हाईवे किनारे स्थित 100 बेड अस्पताल। संवाद