ऐसी पाइपलाइन के भरोसे काशी: 400 किमी पाइपलाइन की उम्र चार साल, 200 साल से नहीं बदली गई
Varanasi News: वाराणसी जिले में 400 किमी पाइपलाइन की उम्र चार साल होती है लेकिन यहां 200 साल से जर्जर पाइपलाइन नहीं बदली गईं। ऐसे में सवाल उठता है कि इन बूढ़ी लाइनों से कैसे अमृत बंटे?
विस्तार
जानकारों के अनुसार, दूषित जलापूर्ति में लीकेज बड़ा कारण है, जिसके चलते पेयजल और सीवर का पानी मिश्रित हो जाता है। बेनियाबाग के पास जलकल कार्यालय के पास हाल ही में खोदाई करके पाइपलाइन दुरुस्त कराई गई थी। इसी प्रकार लीकेज के कारण सिगरा चौराहा धंस गया था, जिसकी मरम्मत के लिए कैंट से लंका मार्ग के यातायात को तीन दिन के लिए डायवर्ट किया गया था।
200 साल पुरानी पानी की पाइपलाइनें जर्जर हो चुकी हैं। इससे पानी लीकेज के जरिये बहकर बर्बाद हो रहा है। इन पाइपलाइनों की कभी-कभार मरम्मत हो जाती है। पूर्व में काशी हिंदू विश्वविद्यालय के भू-भौतिकी विभाग की जांच रिपोर्ट में कहा गया था कि शहर में क्षतिग्रस्त लाइनें पीने के पानी को प्रदूषित कर रही हैं।
372 किमी जर्जर लाइन बदलने के लिए 823 करोड़ रुपये की योजना
पक्के महाल से हर महीने आती हैं 250 शिकायतें
जलकल में हर महीने औसतन 250 शिकायतें आ रही हैं। इनमें ज्यादातर शिकायतें पक्के महाल क्षेत्र से जुड़ी हैं। यहां दूषित जलापूर्ति का संकट सबसे अधिक है, जबकि लगातार मरम्मत का कार्य होता रहता है।
इन इलाकों में होती है दूषित जलापूर्ति
एक किमी पाइप में 450 ज्वाइंट
एक किलोमीटर पाइपलाइन में 450 ज्वाइंट हैं। यदि किसी भी ज्वाइंट में लीकेज होता है, तो सक्शन के कारण सीवर का पानी पेयजल पाइपलाइन में मिल जाता है। इसके बाद दूषित जलापूर्ति होती है।
275.42 करोड़ रुपये बजट
जलकल हर साल पानी की आपूर्ति के लिए 275.42 करोड़ रुपये खर्च करता है। इसका 10 प्रतिशत लाइनों की मरम्मत और बदलने पर खर्च होता है। बावजूद इसके लीकेज की समस्या का समाधान नहीं हो पाया है।
पानी से जुड़े आंकड़े
- 16 लाख की आबादी को जलापूर्ति
- 20.80 करोड़ लीटर जलापूर्ति प्रतिदिन
- 1086 किमी पानी की पाइपलाइन
- 130 लीटर प्रति व्यक्ति पानी की आपूर्ति
- 454 ट्यूबवेल
- 403 एमएलडी आपूर्ति
- 300 एमएलडी की आवश्यकता
- 160 एमएलडी नदी से
- 243 एमएलडी नलकूपों से
- 203 बड़े नलकूप
- 251 मिनी नलकूप
- 43 पानी के टैंकर
अधिकारी बोले
18 वार्ड की जर्जर पाइपलाइन बदलने का काम होने वाला है। इससे दूषित जलापूर्ति और लीकेज की समस्या पूरी तरह से दूर हो जाएगी। -विश्वनाथ, सचिव जलकल
