अस्सी घाट स्थित सुबह-ए-बनारस के मंच पर बुधवार को दक्षिण भारत के युवा कलाकारों ने अपनी अद्भुत शास्त्रीय प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। शुभारंभ भरतनाट्यम की पारंपरिक विधा आलारिप्पु से हुआ। इसके बाद कलाकारों ने नटेशा कौतुवम् के माध्यम से भगवान नटराज की महिमा और उनके तांडव स्वरूप का सजीव चित्रण किया। इसके अलावा, मां गंगा को समर्पित विशेष प्रस्तुति ने अस्सी घाट पर उपस्थित हर श्रद्धालु और दर्शक को श्रद्धा और आस्था के सागर में सराबोर कर दिया। शिव मानस पूजा, शंकर चंद्रशेखर और ओजस्वी कालभैरवाष्टकम् की जीवंत प्रस्तुतियों ने दर्शकों में एक नई ऊर्जा भर दी। तमिलनाडु की नृत्य प्रशिक्षिका प्रेमा जे. और चेन्नई के प्रसिद्ध भरतनाट्यम नर्तक राज परेश बाबा का निर्देशन रहा। ए. यूरेका, पी. रिथिका, ललिताप्रनेश्वरी, शाइनी मेडोना एम., आर. सुबनिशा, डी. विरुक्षा, आर. युवेथिका, साक्षी मर्लिन एम., एस. भविष्या, पी. साधना, एम. हेमलता और के. सिंधु वैष्णवी जैसी युवा प्रतिभाओं ने मंच पर अपनी नृत्य कला का प्रदर्शन किया।