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बनारसगिरी 5.0: शहनाई वादन, बनारसी चाट और अखाड़ा कला से रूबरू हुए लोग, काशी की संस्कृति को निहारा
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
Published by: Pragati Chand
Updated Mon, 16 Mar 2026 03:09 PM IST
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सार
Varanasi News: वाराणसी में दो दिनों तक चलने वाले आयोजन बनारसगिरी 5.0 में रविवार को सांस्कृतिक कार्यक्रमों के तहत पारंपरिक शहनाई वादन और अन्य संगीत प्रस्तुतियों के माध्यम से बनारस की समृद्ध संगीत विरासत को जीवंत किया गया।
बनारसगिरी 5.0
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
वाराणसी शहर की संस्कृति, संगीत, पारंपरिक शिल्प, बनारसी व्यंजनों और सामुदायिक भागीदारी को एक मंच पर लाने वाला बनारसगिरी 5.0 में काशी की परंपरा, संस्कृति और सभ्यताओं का बेजोड़ संगम रविवार को भी देखने को मिला। बड़ी संख्या में लोगों ने यहां पहुंचकर काशी की जीवंतता को आत्मसात किया। छावनी परिषद वाराणसी और वाराणसी स्मार्ट सिटी की ओर से दो दिनों चलने इस आयोजन बनारसगिरी 5.0 में रविवार को सांस्कृतिक कार्यक्रमों के तहत पारंपरिक शहनाई वादन और अन्य संगीत प्रस्तुतियों के माध्यम से बनारस की समृद्ध संगीत विरासत को जीवंत किया गया। खान-पान के शौकीनों ने विशेष फूड स्ट्रीट पर बनारसी चाट, चाय, कुल्फी, लिट्टी-चोखा सहित कई स्थानीय व्यंजन का स्वाद लिया।
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आयोजन में पारंपरिक शहनाई वादन, अखाड़ा कार्यशालाएं, जीआई-टैग उत्पादों की प्रदर्शनी, पारंपरिक शिल्प की लाइव कार्यशाला लोगों ने देखी। किड्स जोन, मेडिटेशन व मेंटल वेलनेस सत्र और मुफ्त स्वास्थ्य जांच जैसी गतिविधियां भी रहीं।
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बनारस की जीवंत गलियों, संस्कृति, खान-पान, कला और सामूहिक भावना का उत्सव देखने को मिला। कुटुम्ब, ग्रीन आर्मी सहित कई नागरिक समूहों की भागीदारी से जिम्मेदार जीवन शैली, पर्यावरण चेतना और नागरिक सहभागिता को प्रोत्साहित किया।
वहीं अखाड़ा कार्यशालाओं के जरिये पारंपरिक भारतीय व्यायाम पद्धतियों और बनारस की ऐतिहासिक अखाड़ा परंपरा से लोगों को परिचित कराया गया। मिट्टी के बर्तन बनाना, मोमबत्ती निर्माण, हथकरघा बुनाई, कालीन निर्माण और कांच के मोती बनाने जैसी पारंपरिक कलाओं को लोगों ने सजीव देखा।
मेडिटेशन और मेंटल वेलनेस कॉर्नर में ध्यान और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े सत्र में लोगों ने भाग लिया। बनारसगिरी को सफल बनाने में छावनी बोर्ड के मुख्य अधिशासी अधिकारी सत्यम मोहन, वीडीए उपाध्यक्ष पुर्ण बोरा और नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल रहे।