BHU: यूपी-बिहार के 35% जज बीएचयू के पूर्व छात्र, पुरातन छात्र सम्मेलन में कल नौ एजेंडों पर होंगे एक संग
Varanasi News: बीएचयू के विधि संकाय के पुरातन छात्र सम्मेलन में सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के छह जज आएंगे। 2047 तक विकसित भारत से पहले न्याय के विकास के लिए डॉक्यूमेंट तैयार होगा और इसे लॉ कमिशन ऑफ इंडिया, नीति आयोग, सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट, राज्य सरकार और केंद्र सरकार से साझा किया जाएगा।
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यूपी-बिहार के 30 से 35 फीसदी जजों ने बीएचयू से ही कानून की पढ़ाई की है। कल यानी शनिवार को ज्यादातर जज बीएचयू में एक साथ होंगे। 14 फरवरी को हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश और विधिवेत्ता भी अपने पुराने कॉलेज में आएंगे। यहां पर कई वर्ष बाद एजेंडा आधारित विशेष पुरातन छात्र सम्मेलन और राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है।
धर्म और एआई पर केंद्रित मुद्दों को न्याय की कसौटियों पर कसा जाएगा। विकसित भारत 2047 से पहले विकसित न्यायिक व्यवस्था बनाई जाएगी। विधि की पढ़ाई कर कॉलेज से निकले छात्रों को वकील के अलावा अन्य क्षेत्रों में भी नौकरियां मिले, इस पर भी बात होगी। ऐसे कुल नौ एजेंडे तय किए गए हैं। इसके निष्कर्ष को डॉक्यूमेंट के रूप में लॉ कमिशन ऑफ इंडिया, नीति आयोग, सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट, राज्य सरकार और केंद्र सरकार को भेजा जाएगा।
कार्यक्रम के समन्वयक और बीएचयू के विधिवेत्ता प्रो. एसके गुप्ता ने बताया कि इस कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस बीएस चौहान ऑनलाइन जुड़ेंगे। वहीं, इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ से जस्टिस अवधेश चौधरी सहित छह हाईकोर्ट के न्यायाधीश, सुप्रीम कोर्ट के न्यायविद और कानून के जानकार इस सम्मेलन में आएंगे।
इस पुरा छात्र सम्मेलन में विकसित भारत 2047 के लिए विकसित न्यायिक व्यवस्था, विकसित पार्लियामेंट और विकसित कानून-व्यवस्था बनाने की बात होगी। इसके अलावा आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस की वैधानिकता, डिजिटल दुनिया में समावेशी न्याय, अंग्रेजों के जमाने के आपराधिक न्याय प्रणाली, धर्म न्यायशास्त्र, साइबर स्वतंत्रता और सुरक्षा और पर्यावरणीय न्याय और शासन जैसे मुद्दों पर एक डॉक्यूमेंट तैयार किया जाएगा।
बीएचयू से निकल चुके हैं 103 विधिक बैच
प्रो. गुप्ता ने बताया कि यूपी और बिहार के अलग-अलग न्यायालयों में 30 से 35 फीसदी जज बीएचयू के ही विद्यार्थी हैं। इनमें से 200 से ज्यादा का पंजीकरण हो गया है। बीएचयू को फैक्टरी ऑफ जजेज कहा गया है। प्रो. गुप्ता ने बताया कि महामना पंडित मदन मोहन मालवीय स्वयं इलाहाबाद हाईकोर्ट में बड़े विधिवेत्ता थे। उनके जमाने में लॉ कॉलेज में दो-तीन कमरों में पार्ट टाइम कक्षाएं चलती थीं। इलाहाबाद हाईकोर्ट के अधिवक्ता पढ़ाने आते थे। 1923 में यहां से पहला बैच निकला था। तब से अब तक 103 बैच निकल चुके हैं।
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