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चैत्र नवरात्र व नव संवत्सर: वरुणा किनारे शैलपुत्री के दर्शन, 9 दिन तक शक्ति का जप-तप शुरू; मंत्र के जाप

अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Aman Vishwakarma Updated Thu, 19 Mar 2026 06:18 AM IST
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सार

Chaitra Navratri: शिव की नगरी काशी में देवी की आराधना शुरू हो गई है। भक्त नाै दिनों तक नवगाैरी के पूजन करेंगे। प्रमुख स्थानों पर स्थित देवी मंदिरों में आज से आराधना का विशेष माहाैल देखने को मिलेगा।

Chaitra Navratri and New Samvatsar Darshan of Shailputri Nine Days of Worship Austerities
माता शैलपुत्री का पूजन। - फोटो : संवाद
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विस्तार

Varanasi News: वरुणा नदी के किनारे माता शैलपुत्री के दर्शन से 9 दिन तक शक्ति का जप-तप शुरू हो रहा है। कलश स्थापना के साथ काशी के हजारों दुर्गा मंदिरों और घरों में चैत्र नवरात्र के अनुष्ठान शुरू हो जाएंगे। परंपरागत तरीके से सबसे पहले गायघाट पर मुख निर्मालिका गौरी और वरुणा किनारे मां शैलपुत्री में दर्शन पूजन से नवरात्र का विधान शुरू किया जाएगा। इसके बाद नाै दिनों तक हर घर और मंदिर में शक्ति ही पूजी जाएंगी।

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नवरात्र के शुभ मुहूर्त में कलश की स्थापना कर दुर्गासप्तशती का पाठ और मंत्र जप करना ही सबसे ज्यादा शुभकर होगा। तीनों मुहूर्त सुबह 6:52 से 7:43 बजे तक, अभीजित मुहूर्त में दोपहर 12:10 बजे से दोपहर 12:49 बजे तक और तीसरा शाम 6:35 से लेकर 6:59 बजे तक मिट्टी, पीतल या ताम्र कलश स्थापित किया जाएगा। 
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25 मार्च को चैत्रशुक्ल पक्ष की अष्टमी की तिथि पर राम नवमी मनाई जाएगी। पहले दिन मां शैलपुत्री, दूसरे दिन ब्रह्मचारिणी, तीसरे दिन मां चंद्रघंटा, चाैथे दिन मां कूष्मांडा, पांचवें दिन स्कंदमाता, छठवें दिन मां कात्यायनी, सातवें दिन कालरात्रि, आठवें मां महागौरी और नाैवें दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा होती है।

सुरक्षा रही दुरुस्त

हिंदू वर्ष की अंतिम निशा दीपक की सात्विक रोशनी से जगमगा उठी। चैत्र प्रतिपदा विक्रम संवत 2083 से पहले बुधवार को ही काशी भगवामय हो गई। नव संवत्सर 2083 की पूर्व संध्या पर शहर भर में दीपमालाएं जलाईं गईं। आरोग्य सुख, समृद्धि, प्रेम और सद्भाव की कामना की गई। ओम अंकित भगवा ध्वज से सजाएं गए मुख्य मार्ग, गलियों में हिंदू नव वर्ष मंगलमय हो का नारा गूंजा। बैनर, अल्पनाएं और रंगोलियां बनाईं गईं। 

बुधवार को श्री लाट भैरव भजन मंडल की ओर से तुलसीदास मार्ग तेलियाना, हनुमान फाटक, बलुआबीर सड़क मार्ग के दोनों ओर दीपमालाएं सजाईं गईं। राम जानकी मंदिर के महंत रामदास ने मंदिर प्रांगण से दीप प्रज्ज्वलित कर दीपोत्सव का शुभारंभ किया।

संपूर्णानंद में धूप-दीप की उजास और दुर्गा मंत्रों की गूंज
सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के मुख्य भवन में नव संवत्सर की पूर्व संध्या पर आद्यशक्ति मां दुर्गा के पूजन-अर्चन किया गया। इस दौरान वैदिक मंत्रोच्चार, धूप-दीप की उजास और मां दुर्गा आराधना से परिसर गूंज उठा। से पूरा परिसर भर उठा। कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने कहा कि भारतीय नव संवत्सर केवल काल-गणना का प्रारंभ नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पुनर्जागरण, आत्मिक परिष्कार और नव-संकल्प का शुभ प्रतीक है। इस दाैरान भव्य गीत-संगीत भी हुए।

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