Dengue: वाराणसी में 17 वार्डों की 87 कॉलोनियों में डेंगू का खतरा, इनमें डॉक्टर्स-डिफेंस कॉलोनी भी शामिल
Varanasi News: वाराणसी जिले में 17 वार्डों की 87 कॉलोनियाें में डेंगू का खतरा बढ़ गया है। हैरान करने वाली बात ये है कि इनमें डॉक्टर्स-डिफेंस काॅलोनी भी शामिल हैं।
विस्तार
वाराणसी शहर के 17 वार्डों की 87 कॉलोनियों में डेंगू का खतरा बना हुआ है। ये वे वार्ड हैं, जहां पिछले पांच वर्षों से लगातार हर साल 10 से 15 मरीज मिल रहे हैं। इसके अलावा इन वार्डों में अधिकांश जगह खाली प्लॉट हैं, जहां कूड़ा फेंकने के साथ ही बरसात के समय पानी जमा होने से मच्छर पनपते हैं। संवेदनशील कालोनियों की सूची में पांडेयपुर स्थित डॉक्टर्स कॉलोनी, कैंटोनमेंट की डिफेंस कॉलोनी, बीएचयू कैंपस, पीएसी रामनगर, सीआरपीएफ बटालियन और पुलिस लाइन शामिल हैं।
इसके अलावा आठ ब्लॉकों के 51 गांवों में भी मच्छरों का प्रकोप अधिक है। लिहाजा, स्वास्थ्य विभाग ने इन कॉलोनियों और गांवों को हॉटस्पॉट घोषित किया है।आम तौर पर डेंगू के मच्छर घरों में रखे कूलर, छतों पर खाली बर्तनों में भरे पानी और बरसात में एक ही जगह पानी जमा होने से पनपते हैं। कॉलोनियों में खाली प्लॉट और घरों के आसपास पानी जमा होना भी इसका प्रमुख कारण है।
जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम की ओर से लोगों से अपील की जाती है कि घर के अंदर कूलर और खाली बर्तनों में पानी जमा न होने दें और आसपास गंदगी न रहने दें। स्वास्थ्य विभाग ने 17 वार्डों की सूची तैयार की है, जहां पिछले पांच वर्षों से 10 से अधिक मामले सामने आ रहे हैं। यहां खाली प्लॉटों में पानी जमा होने और मच्छरों के लार्वा भी मिल चुके हैं। इस वर्ष भी स्थिति लगभग वैसी ही बनी हुई है।
खाली जमीन पर जमा पानी में पनपता है लार्वा
वैसे तो डेंगू का लार्वा एक ही जगह जमा पानी में पनपता है लेकिन शहर के जिन इलाकों को संवेदनशील सूची में रखा गया है, वहां सफाई व्यवस्था बेपटरी हो गई है। कहीं खाली जगह पर कूड़े का ढेर लगा है तो कुछ जगहों पर घर के सामने नाली का पानी सड़क पर बहता नजर आ रहा है। जिस तरह का दृश्य है, उसको देखकर यहीं लग रहा है कि लंबे समय से नगर निगम की टीम यहां आई ही नहीं है। डॉक्टर्स कालोनी जहां डॉक्टर रहते हैं, उसके पास ही खाली जमीन पर लंबे समय से पानी जमा है। यहां विकासनगर, टकटकपुर में जल निकासी की व्यवस्था ही नहीं है। लिहाजा यहां हर साल डेंगू के मरीज मिलते हैं। लोहता के धमरिया, अलावल मुहल्ले में तो हाल यह है कि घर से निकलने पर गेट पर ही पानी लंबे समय से जमा है। इसमें मच्छर का लार्वा भी पनप रहा है। ग्रामीण इलाकों में भी सफाई व्यवस्था बेपटरी हो गई हैं। इसमें आराजीलाइन ब्लॉक के मातलदेई चौराहे पर पंचक्रोशी परिक्रमा मार्ग पर ही पानी जमा है। चौबेपुर के परानापुर गांव, धौरहरा में भी मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है।
शहर के संवेदनशील वार्ड एवं मुहल्ले
- सारनाथ वार्ड-परशुरामपुर, बुद्धनगर कालोनी, अंबेडकर नगर कालोनी।
- शिवपूर वार्ड-परमहंशनगर कालोनी, भगतपुर कालोनी, वीडीए कालोनी, मयूर विहार कालोनी अयोध्यापुरी कालोनी, रामजानकी धाम कालोनी, यमुनानगर कालोनी, गायत्रीधाम कालोनी, कुन्जबिहारी कालोनी।
- पाण्डेयपुर वार्ड-रिजर्व पुलिस लाईन, आवास विकास कालोनी, दौलतपुर, ओमनगर कालोनी, बेलवा बाबा क्षेत्र, प्रेमचन्दनगर कालोनी, भरत नगर कालोनी, डॉक्टर्स कालोनी, खुशहालनगर कालोनी, राजभर बस्ती, अशोक बिहार कालोनी।
- मीरापुर बसही-साईधाम कालोनी, अशोकपुरम कालोनी, नटनीयादाई।
- पहड़िया वार्ड-मारुतिबिहार कालोनी, सत्संग नगर कालोनी, अशोकनगर कालोनी, शंकरपुरम कालोनी, अकथा चौराहा, 95 सीआरपीएफ, वृन्दावन कालोनी, जीडी नगर कालोनी, ओमनगर कालोनी।
- नईबस्ती वार्ड-मिथलेशनगर कालोनी, हुकुलगंज चौराहा, लेबर सटटी।
- रामनगर वार्ड-रत्तापुर, सीतापुर कालोनी, शास्त्री चौक, पीएसी रामनगर।
- खजुरी वार्ड-सुधीपुर, पुलिसलाईन, उल्फत बीबी का हाथा, हासीमपुर चौराहा।
- फुलवरियां वार्ड-डिफेंस कालोनी, पहलुकापुरा।
- नरिया वार्ड-बीएचयू कैम्पस, रोहित नगर।
- सिगरा वार्ड-शास्त्रीनगर कालोनी, अन्नपुर्णानगर कालोनी, राजेश्वरी नगर कालोनी, चन्दुऑसटटी,गाँधी नगर।
- करौदीं-महामनापुरी कालोनी, चन्दननगर।
- सुसुवाही वार्ड-मनोरथपुरी कालोनी, विश्वनाथपुरी कालोनी, गौतमनगर, वैश्णवनगर, सुसवाही।
- कंदवा वार्ड-चितईपुर, बरईपुर, सत्यम नगर कालोनी।
- भगवानपुर वार्ड -हरिओम नगर, बालाजी नगर, सामनेघाट।
- सीर गोवर्धनपुर वार्ड -मारूती नगर, गायत्री नगर, काशीपुरम।
- छित्तुपुर खास वार्ड -तारा नगर, शिवराजनगर, सरस्वती नगर।
एक नजर में आंकड़ा
- 2021- 458 मरीज
- 2022- 562
- 2023- 451
- 2024- 429
- 2025- 229
- 2026- 3 मरीज (अब तक)
जुलाई से दिसंबर तक डेंगू का प्रकोप सबसे अधिक
बारिश का मौसम 15 जून से ही माना जाता है। इस महीने में हालांकि बारिश कम ही होती है, इस वजह से डेंगू का प्रकोप जुलाई से दिसंबर तक सबसे अधिक माना जाता है। ये वो महीने हैं, जिसमें बारिश के बाद पानी जमा होने के साथ ही वातावरण में नमी अधिक होने की वजह से डेंगू को बढ़ावा देने वाले एडीज मच्छरों का प्रकोप अधिक रहता है। पिछले दो साल में अगर स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों की बात करें तो जुलाई से दिसंबर तक ही मरीज अधिक मिले हैं।
अधिकारी बोले
जो भी संवेदनशील वार्ड, मुहल्ले और गांव हैं, यहां अधिकांश जगहों पर खाली प्लाट है। इसमें बरसात के समय पानी जमा होने के साथ गंदगी भी रहती है। वार्डों में पिछले पांच वर्षों से हर साल 10 से अधिक मरीज मिल रहे हैं। एक अप्रैल से चलननेवाले संचारी अभियान में इन वार्डों और मोहल्लों में विशेष अभियान चलाकर सफाई कराया जाएगा। साथ ही नगर निगम की मदद से फॉगिंग भी होगी। -एससी पांडेय, जिला मलेरिया अधिकारी