Fraud: फर्जी नाम-पते पर बेचे 2490 कारतूस, 170 गन लाइसेंस निरस्त; जांच के लिए तीन जिलों में गठित थीं 17 टीमें
जौनपुर, चंदौली और गाजीपुर जिले में फर्जी नाम-पते पर कारतूस बेचने का मामला सामने आया है। जांच के बाद 170 गन लाइसेंस निरस्त किए गए। तीनों जिलों में जांच के लिए 17 टीमें गठित थीं।
विस्तार
रेंज के जौनपुर, चंदौली और गाजीपुर जिलों में फर्जी नाम-पते पर कारतूस बेचने का मामला सामने आया है। पुलिस उपमहानिरीक्षक वैभव कृष्ण की जांच में इस मामले का खुलासा हुआ है। तीनों जिलों के लिए गठित 17 टीमों की जांच में अभिलेखों और वास्तविक खरीदारों के बीच बड़े पैमाने पर अंतर मिला है। लाइसेंसी शस्त्र दुकानों से 2490 कारतूस संदिग्ध तरीके से बेचे गए। इस मामले में सात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है, जबकि हर्ष फायरिंग और नियम विरुद्ध उपयोग के मामलों में 170 शस्त्र लाइसेंस निरस्त किए गए हैं।
सालभर में फर्जी तरीके से 14 लोगों को बेचे 1111 कारतूस
चंदौली में गन हाउसों के सत्यापन में अनियमितता सामने आई है। जांच में पाया गया कि दो गन हाउसों ने सालभर में 14 व्यक्तियों को 1111 कारतूस बेचे। पुलिस ने दोनों गन हाउसों के अनुज्ञापियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। इसके अलावा चार गन हाउस संचालकों ने वर्ष 2021 के बाद नवीनीकरण नहीं कराया है। मानक से अधिक कारतूस खरीदने के आरोप में तीन शस्त्र लाइसेंस धारकों के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस ने 88 शस्त्र लाइसेंस धारकों के लाइसेंस निरस्त करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
जांच में यह भी पता चला कि सालभर के अंदर शस्त्र लाइसेंस धारक मोहम्मद कल्लू (ग्राम बड़गांवा, थाना शहाबगंज) ने 160, जितेंद्र सिंह (ग्राम चौथी, थाना भभुआ, कैमूर, बिहार) ने 125 और मुकुंद रावत (चैनपुर, भभुआ, बिहार) ने 399 कारतूस खरीदे थे, जिनका उपयोग नियमों के खिलाफ किया गया। इसके साथ ही, जीएस गन हाउस (पड़ाव, पीडीडीयू नगर) और वीर गन हाउस (चंदौली) का नवीनीकरण 2021 के बाद नहीं हुआ था। इन गन हाउसों के खिलाफ भी आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।
बिहार पुलिस ने बरामद किए थे 2200 कारतूस
365 दिन में नहीं खरीदी गई कारतूस, फिर भी 960 का रिकॉर्ड दर्ज
जौनपुर के केराकत स्थित राजपूत गन हाउस से तीन व्यक्तियों को 240, 230 और 210 कारतूस बेचे जाने का रिकॉर्ड दर्ज था लेकिन जांच में पाया गया कि एक भी व्यक्ति ने कारतूस नहीं खरीदे। इस पर अनुज्ञापी कैलाशनाथ सिंह के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई। वहीं, कोतवाली क्षेत्र के जयहिंद गन हाउस के अभिलेखों में प्रयागराज निवासी एक व्यक्ति को 280 कारतूस बेचने का रिकॉर्ड दर्ज था लेकिन जांच में ये भी गलत पाया गया। इस मामले में भी अनुज्ञापी अरुण कुमार सिंह के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई। इसी तरह शाहगंज स्थित पांडेय गन हाउस का लाइसेंस 2011 के बाद से रिन्यू ही नहीं हुआ। इस पर पांडेय गन हाउस का लाइसेंस निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू की गई है और दुकान में जमा 11 शस्त्रों को थाने में जमा कराया गया।
20 लाइसेंसधारकों ने शादी, त्योहार या अन्य आयोजनों में की हर्ष फायरिंग
गाजीपुर के थाना नंदगंज क्षेत्र स्थित सिंह मैन्युफैक्चरर का लाइसेंस 2020 के बाद नवीनीकरण न कराने का मामला सामने आया। सुरक्षा के मद्देनजर दुकान पर रखे सात शस्त्रों को जब्त कर थाना नंदगंज में जमा करा दिया गया है, जबकि लाइसेंस निरस्तीकरण की प्रक्रिया जारी है। जांच में यह भी सामने आया कि जिले के 20 लाइसेंसधारकों ने शादी, त्योहार या अन्य आयोजनों में हर्ष फायरिंग तथा जानवरों को भगाने के लिए कारतूस का उपयोग किया। वहीं पांच अन्य लाइसेंसधारकों ने बिना अनुमति खुद फायर कर परीक्षण किया। इन सभी मामलों में शस्त्र लाइसेंस निलंबन या निरस्तीकरण की कार्रवाई की जा रही है।
क्या बोले अधिकारी
शस्त्र और कारतूस की बिक्री में किसी भी तरह की अनियमितता पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी। सत्यापन का काम जारी रहेगा, नियमों को तोड़ने और हेराफेरी करने वालों पर प्राथमिकी दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। लाइसेंस निरस्त किया जाएगा। -वैभव कृष्ण, पुलिस उपमहानिरीक्षक, वाराणसी रेंज