UP News: गाजीपुर से वाराणसी के बीच गंगा में 45 से 60 मीटर होगी ड्रेजिंग, घटेगी गंगा की चौड़ाई; जानें अपडेट
Varanasi News: आईडब्ल्यूएआई के अधिकारियों के अनुसार, गाजीपुर से बनारस के बीच लगभग 19 किलोमीटर का क्षेत्र डेंजर जोन में आता है। यहां हार्ड स्ट्रेटा होने के कारण बड़े जहाज जलमार्ग से बनारस नहीं आ पा रहे हैं। यही कारण है कि जल परिवहन को अपेक्षित बढ़ावा नहीं मिल पा रहा है।
विस्तार
Ganga in Varanasi: भारतीय अंतरदेशीय जलमार्ग प्राधिकरण (आईडब्ल्यूएआई) की ओर से राष्ट्रीय जलमार्ग-1, वाराणसी से हल्दिया तक जल परिवहन विकसित किया जा रहा है। गंगा में बड़े जहाजों के संचालन के लिए पर्याप्त पानी न होने के कारण गाजीपुर से वाराणसी के बीच ड्रेजिंग कराई जाएगी। गंगा में जहाजों के सुगम आवागमन के लिए 45 से 60 मीटर तक ड्रेजिंग की जाएगी। गंगा पर शोध कर रहे वैज्ञानिकों का कहना है कि इससे नदी की चौड़ाई घट सकती है, जबकि अधिकारियों का कहना है कि ड्रेजिंग से चौड़ाई पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
राष्ट्रीय जलमार्ग-1 पर गाजीपुर से वाराणसी के बीच गंगा में पानी की कमी है। गाजीपुर से बनारस के बीच 19 किलोमीटर तक हार्ड स्ट्रेटा है, जो बड़े जहाजों के आवागमन में बाधा बन रहा है। इसी वजह से पिछले 6 वर्षों में केवल 10 मालवाहक जहाज ही वाराणसी पहुंच सके हैं।
विभाग की ओर से सभी कार्य संभावनाओं के आकलन के बाद ही किए जा रहे हैं। सभी कार्यों की निगरानी दिल्ली मुख्यालय से की जाती है। जिले में इस विषय पर अधिकृत रूप से कुछ भी कहने के लिए मैं अधिकृत नहीं हूं। - संजीव शर्मा, निदेशक, आईडब्ल्यूएआई
ड्रेजिंग में गंगा के अंदर 45 से 60 मीटर की होगी खोदाई
आईडब्ल्यूएआई की ओर से बड़े जहाजों के सुगम आवागमन के लिए गंगा में ड्रेजिंग की जाएगी। इसके तहत नदी की सतह में 45 से 60 मीटर तक खुदाई कर रास्ता बनाया जाएगा। साथ ही बड़े पत्थरों को भी हटाया जाएगा। खुदाई के दौरान बड़ी मात्रा में बालू, पत्थर और सिल्ट निकलेगा, जो पानी में ही रह सकता है। इस खोदाई के दोनों ओर जमा सामग्री के कारण पानी की चौड़ाई कम हो सकती है।
वैज्ञानिकों का कहना: चौड़ाई घटेगी, अधिकारी कर रहे इन्कार
बीएचयू में गंगा पर शोध कर रहे वैज्ञानिकों का कहना है कि ड्रेजिंग के कारण गंगा की चौड़ाई घट सकती है। उनके अनुसार गंगा में बड़े मालवाहकों के चलने की संभावना भी सीमित है। गर्मी के दिनों में गंगा में पानी की कमी हो जाती है और कई जगह रेत के टीले दिखाई देने लगते हैं। वहीं अधिकारियों का कहना है कि ड्रेजिंग से चौड़ाई पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।