बीएचयू में गलत सर्जरी का मामला: शिकायत के 21 दिन बाद भी पता नहीं लापरवाही किसने की, दूसरी बार जांच कमेटी गठित
Varanasi News: निदेशक आईएमएस बीएचयू प्रो. एसएन संखवार ने कहा कि गलत सर्जरी मामले में दूसरी बार 13 अप्रैल को जांच कमेटी गठित की गई थी। कमेटी को 7 दिन में रिपोर्ट देने को भी कहा गया था। अभी तक रिपोर्ट नहीं मिल पाई है। रिपोर्ट मिलने के बाद कुलपति को भेजा जाएगा।
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काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के ट्रॉमा सेंटर में महिला की गलत सर्जरी के मामले में 21 दिन बाद भी जिम्मेदारी तय नहीं हो सकी है। आईएमएस प्रशासन की ओर से दूसरी बार गठित जांच समिति की समयसीमा भी समाप्त हो चुकी है, लेकिन अब तक रिपोर्ट तैयार नहीं हो पाई है। इससे मामले में लापरवाही के स्तर को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
बलिया निवासी राधिका देवी (71) को स्पाइन कॉर्ड ट्यूमर की समस्या के चलते न्यूरो सर्जरी विभाग में प्रो. अनुराग साहू की देखरेख में भर्ती किया गया था। उनका ऑपरेशन 7 मार्च को निर्धारित था। वहीं, राधिका देवी (82) नाम की दूसरी महिला आर्थोपेडिक्स विभाग में प्रो. अमित रस्तोगी के अधीन भर्ती थी।
आरोप है कि 7 मार्च को प्रो. अमित रस्तोगी की अगुवाई वाली टीम ने गलती से न्यूरोसर्जरी विभाग की मरीज राधिका देवी (71) को ऑपरेशन थिएटर में ले जाकर उनकी जांघ में चीरा लगा दिया। सर्जरी के दौरान जब हड्डी सामान्य मिली तो डॉक्टरों को शक हुआ और जांच करने पर पता चला कि यह उनकी मरीज नहीं है, बल्कि न्यूरोसर्जरी विभाग की महिला है। इसके बाद सर्जरी रोक दी गई।
घटना के 11 दिन बाद, 18 मार्च को न्यूरोसर्जरी टीम ने राधिका देवी का स्पाइन ट्यूमर का ऑपरेशन किया। हालांकि 27 मार्च की सुबह उनकी मौत हो गई। इस पूरे घटनाक्रम के बाद अस्पताल प्रशासन ने जांच के आदेश दिए।
पहली जांच के बाद 13 अप्रैल को दूसरी बार जांच समिति गठित की गई थी, जिसे सात दिन के भीतर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया था। लेकिन समिति बने आठ दिन से अधिक समय बीत जाने के बावजूद रिपोर्ट अब तक प्रस्तुत नहीं की जा सकी है।
आईएमएस प्रशासन का कहना है कि रिपोर्ट मिलते ही इसे कुलपति को भेजा जाएगा और उनके निर्देशानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं, इस देरी को लेकर परिजनों और आम लोगों में नाराजगी बढ़ रही है और मामले में पारदर्शी जांच की मांग उठ रही है।

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