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Exclusive: काशी में गंगा की निर्मलता हुई कम तो डॉल्फिन ने छोड़ी जगह, लगातार घट रही संख्या

अभिषेक मिश्र, अमर उजाला ब्यूरो, वाराणसी। Published by: Pragati Chand Updated Mon, 23 Mar 2026 12:38 PM IST
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सार

Varanasi News: वाराणसी जिले में गंगा की निर्मलता कम हुई तो डॉल्फिन मछलियों की संख्या भी घट गई। अब सिर्फ नारायणपुर कैनाल के पास और कैथी में एक किलोमीटर के दायरे में डॉल्फिन की संख्या सिमटी। 

Ganga Purity Declines in Kashi Dolphin fish Abandon Area Their Numbers Steadily Dwindling in varanasi
डॉल्फिन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

काशी में गंगा की निर्मलता दिन पर दिन कम होती जा रही है। इसका असर इनमें रहने वाली डॉल्फिन मछलियों के जीवन चक्र पर पड़ा है। साल 2011 तक जहां गंगा के हर घाट के पास इन मछलियों को देखा जा सकता था, वहीं अब सामनेघाट से लेकर नमो घाट तक इनका नामो निशान नहीं मिलेगा। इसका कारण एक तो गंगा में गंदगी और बड़ी संख्या में मोटर बोट का संचालन है।

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काशी में बहने वाले मोक्षदायिनी गंगा न सिर्फ इंसानों के पाप धुलती हैं बल्कि छोटी व बड़ी मछलियों के लिए सुरक्षित व स्वस्थ वातावरण भी प्रदान करती है। गंगा में एक समय था जब काशी के घाटों से डॉल्फिन मछलियों की अटखेलियों का मनमोहक नजारा देखने को मिलता था। लेकिन धीरे- धीरे समय के साथ जहां एक ओर गंगा की निर्मलता कम हुई, वहीं दूसरी ओर डॉल्फिन ने अपना ठौर बदल लिया। 
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मौजूदा समय में नारायणपुर कैनाल, मिल्कीपुर, बहादुरपुर, कुंडाकला, कुंडा खुर्द के पास डॉल्फिन देखने को मिलेंगी। डॉल्फिन संरक्षकों के अनुसार गंगा में बढ़ी गंदगी के साथ ही मोटर बोट के संचालन के कारण ही इनकी संख्या में कमी आई है। इन मछलियों ने अपना ठिकाना बदल दिया है। केंद्र सरकार की ओर से डॉल्फिन को राष्ट्रीय जलीय जीव घोषित किया गया है। इनके संरक्षण के लिए साल 2020 में प्रोजेक्ट डॉल्फिन की शुरुआत हुई फिर भी इनका संरक्षण होता नहीं दिख रहा है।

अक्तूबर 2023 में योगी आदित्यनाथ ने घोषित किया राज्य जलीय जीव

भारत सरकार ने 5 अक्तूबर 2009 को गंगा डॉल्फिन को राष्ट्रीय जलीय जीव घोषित किया था। इनके संरक्षण की जिम्मेदारी वन विभाग को दी गई है। ऐसे ही अक्तूबर 2023 में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गंगा डॉल्फिन को राज्य जलीय जीव घोषित किया है।

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कैथी में सबसे अधिक और नारायणपुर में सबसे कम बचीं डॉल्फिन
काशी में मौजूदा समय में गंगा डॉल्फिन की संख्या 100 भी नहीं है। डॉल्फिन संरक्षक नागेंद्र निषाद ने बताया कि गंगा में पहले बहुत सारी डॉल्फिन थीं। प्रदूषण व पूरी खुराक न मिलने के कारण इन्होंने ठिकाना बदल दिया है। मौजूदा समय में कैथी में करीब 50 व नारायणपुर कैनाल के पास 12 के आस-पास डॉल्फिन बची हैं।

ध्वनि तरंगों में कंपन के डर से भी शांति की ओर किया रुख

गंगा में पाई जाने वाली डॉल्फिन एक बुद्धिमान, सामाजिक और चंचल समुद्री स्तनधारी जीव हैं। ये जीव इंसानों की तरह बच्चे पैदा करते हैं। ये सांस लेने के लिए सतह पर आती हैं। ध्वनि तरंगों (इकोलोकेशन) का उपयोग करती हैं। गंगा में चलने वाली मोटर से तरंगों में कंपन होता है। इससे ये डर जाती हैं। इस कारण भी इन मछलियों ने अपना रुख शांति की ओर किया है।

क्या बोले अधिकारी
गंगा में बढ़ते प्रदूषण और मोटर बोट की बढ़ती संख्या डॉल्फिन के लिए खतरा है। इनको जीवनयापन के लिए शांत माहौल और साफ पानी की आवश्यकता होती है। इनके संरक्षण के लिए प्रशासन को ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है। -दर्शन निषाद, डॉल्फिन संरक्षक

डॉल्फिन संरक्षण के लिए प्रोजेक्ट डॉल्फिन के तहत काम किया जा रहा है। कैथी व नारायणपुर के आसपास अभी इनकी मौजूदगी है। इनके संरक्षण का लगातार प्रयास किया जा रहा है। जल्द ही अभियान भी चलेगा। -स्वाती श्रीवास्तव, प्रभागीय वनाधिकारी

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