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Yoga Yatra: काशी के घाटों पर पहुंची 1800 किमी की गंगोत्री-गंगासागर यात्रा, प्रशिक्षकों को किया सम्मानित
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
Published by: Pragati Chand
Updated Thu, 18 Jun 2026 12:12 PM IST
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सार
काशी में गंगा घाटों पर 1800 किमी की ‘गंगोत्री-गंगासागर’ योग यात्रा पहुंची। इन योग यात्रियों ने अभ्यास कर रविदास घाट पर स्वस्थ वृद्धावस्था, मानसिक संतुलन और तनाव प्रबंधन की सीख दी।
योग करते लोग
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
काशी में गंगा घाटों पर बुधवार को 1800 किमी की ‘गंगोत्री-गंगासागर’ योग यात्रा पहुंची। उत्तराखंड में गंगा उद्गम स्थल गंगोत्री से आए योग यात्रियों ने अभ्यास कर रविदास घाट पर स्वस्थ वृद्धावस्था, मानसिक संतुलन और तनाव प्रबंधन की सीख दी। ऋषिकेश, हरिद्वार, प्रयागराज से वाराणसी पहुंची यह यात्रा अब पटना और हुगली तक जाएगी। यात्रा 13 जून को शुरू हुई है, जो 20 जून तक चलेगी। इसमें बड़ी संख्या में योग साधक, विद्यार्थी, समाजसेवी और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल रहे।
कार्यक्रम में पहुंचे मुख्य अतिथि आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’ और आयुष मंत्रालय की महानिदेशक डॉ. चित्रा बी. जी. रहीं। भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष संजय सिंह ‘बबलू’ ने योग प्रशिक्षकों को सम्मानित किया।
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संस्कृत विवि में तीन दिन तक योग महोत्सव
संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में बृहस्पतिवार से तीन दिवसीय योग महोत्सव शुरू हुआ। इसमें योग के महत्व बताए जाने के साथ ही विवि कैंपस में दीक्षांत लॉन में हर दिन सुबह 1 घंटा योग की अलग-अलग क्रियाओं का अभ्यास कराया गया। विवि में ऋषि-परंपरा से विश्व कल्याण तक विषय पर मनाए जाने वाले महोत्सव की तैयारियां चल रही हैं।
कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय योग दिवस केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि भारत की सनातन ऋषि-परम्परा, विश्वबंधुत्व और लोकमंगल की महान भावना का उत्सव है। योग भारतीय संस्कृति की ऐसी अमूल्य धरोहर है, जो मनुष्य को शारीरिक आरोग्य, मानसिक संतुलन, आत्मिक उत्कर्ष तथा सामाजिक समरसता का मार्ग प्रदान करती है।
योग विज्ञान पाठ्यक्रम के निदेशक डॉ. दुर्गेश पाठक के निर्देशन एवं संयोजन में आयोजित इस महोत्सव में योगाचार्य राजकुमार मिश्र, आदित्य कुमार प्रतिभागियों को प्राणायाम, ध्यान एवं स्वस्थ जीवन-पद्धति का प्रशिक्षण प्रदान करेंगे।