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Varanasi News: क्रेडिट कार्ड ठगी से खरीदा जा रहा था सोना, 2500 खातों को साइबर सेल ने खंगाला
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छह महीने में छह करोड़ कराया होल्ड, 5200 संदिग्ध मोबाइल नंबर ब्लॉक
संवाद न्यूज एजेंसी
वाराणसी। ऑनलाइन ठगी खासकर ओटीपी प्राप्त कर खाते से पैसे निकालने के तुरंत बाद ही साइबर ठगों ने खरीदारी की है। सबसे ज्यादा खरीदारी क्रेडिट कार्ड से हुई ठगी में की गई। साइबर ठगों ने पैसा गोल्ड समेत अन्य महंगे सामानों में खर्च किया। खरीदारी कब, कहां और किस शहर में हुई या निवेश किया गया इसकी जांच कर रही है। वहीं, साइबर सेल ने 2500 संदिग्ध बैंक खातों की जांच की। तफ्तीश में सामने आया है कि साइबर अपराधियों ने लोगों को झांसे में लेकर क्रेडिट कार्ड की जानकारी और ओटीपी हासिल की। खाते से पैसे उड़ने के बाद उस रकम को तुरंत या तो थर्ड पार्टी एप से खरीदारी की या म्यूल खातों में ट्रांसफर किया। पुलिस लॉगिन आईपी और डिवाइस विवरण के बारे में जानकारी जुटाने के साथ ही भुगतान की तारीख और समय, प्राप्तकर्ता की जानकारी, संबंधित बैंक खाता या वॉलेट की हिस्ट्री को बैंकों की मदद से खंगाल रही है। साइबर सेल ने 18 महीने में 214 म्यूल खातों को बंद कराने के साथ ही 5200 संदिग्ध मोबाइल नंबर ब्लॉक कराया है। जांच के दौरान छह महीने में 42 वॉयस ओवर इंटरनेट कॉल की भी बात सामने आई। पुलिस ने 10 करोड़ 47 लाख रुपये अलग-अलग बैंक खातों में होल्ड कराए हैं। छह महीनों के भीतर 6 करोड़ की साइबर ठगी होने से बचाई गई है। जिसमें 76 लाख लौटाए गए। समय रहते खातों को होल्ड किए जाने से यह भारी-भरकम रकम ठगों के हाथों में जाने से बच गई। रकम को पीड़ितों के खाते में भेजने की कानूनी प्रक्रिया चल रही है।
म्यूल खातों की जांच के लिए साइबर सेल एक विंग अलग से जुटी है। जांच में पुष्टि होने के बाद संदिग्ध खातों को ब्लॉक कराया गया। अन्य खातों की जांच की जा रही है। साइबर अपराधियों की लॉगिन आईपी की जांच की जा रही है। किसी भी हॉल में अपना ओटीपी, पासवर्ड या क्रेडिट कार्ड डिटेल्स साझा न करें। ठगी का अंदेशा होने पर तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें। - विदुष सक्सेना, एसीपी साइबर क्राइम
संवाद न्यूज एजेंसी
वाराणसी। ऑनलाइन ठगी खासकर ओटीपी प्राप्त कर खाते से पैसे निकालने के तुरंत बाद ही साइबर ठगों ने खरीदारी की है। सबसे ज्यादा खरीदारी क्रेडिट कार्ड से हुई ठगी में की गई। साइबर ठगों ने पैसा गोल्ड समेत अन्य महंगे सामानों में खर्च किया। खरीदारी कब, कहां और किस शहर में हुई या निवेश किया गया इसकी जांच कर रही है। वहीं, साइबर सेल ने 2500 संदिग्ध बैंक खातों की जांच की। तफ्तीश में सामने आया है कि साइबर अपराधियों ने लोगों को झांसे में लेकर क्रेडिट कार्ड की जानकारी और ओटीपी हासिल की। खाते से पैसे उड़ने के बाद उस रकम को तुरंत या तो थर्ड पार्टी एप से खरीदारी की या म्यूल खातों में ट्रांसफर किया। पुलिस लॉगिन आईपी और डिवाइस विवरण के बारे में जानकारी जुटाने के साथ ही भुगतान की तारीख और समय, प्राप्तकर्ता की जानकारी, संबंधित बैंक खाता या वॉलेट की हिस्ट्री को बैंकों की मदद से खंगाल रही है। साइबर सेल ने 18 महीने में 214 म्यूल खातों को बंद कराने के साथ ही 5200 संदिग्ध मोबाइल नंबर ब्लॉक कराया है। जांच के दौरान छह महीने में 42 वॉयस ओवर इंटरनेट कॉल की भी बात सामने आई। पुलिस ने 10 करोड़ 47 लाख रुपये अलग-अलग बैंक खातों में होल्ड कराए हैं। छह महीनों के भीतर 6 करोड़ की साइबर ठगी होने से बचाई गई है। जिसमें 76 लाख लौटाए गए। समय रहते खातों को होल्ड किए जाने से यह भारी-भरकम रकम ठगों के हाथों में जाने से बच गई। रकम को पीड़ितों के खाते में भेजने की कानूनी प्रक्रिया चल रही है।
म्यूल खातों की जांच के लिए साइबर सेल एक विंग अलग से जुटी है। जांच में पुष्टि होने के बाद संदिग्ध खातों को ब्लॉक कराया गया। अन्य खातों की जांच की जा रही है। साइबर अपराधियों की लॉगिन आईपी की जांच की जा रही है। किसी भी हॉल में अपना ओटीपी, पासवर्ड या क्रेडिट कार्ड डिटेल्स साझा न करें। ठगी का अंदेशा होने पर तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें। - विदुष सक्सेना, एसीपी साइबर क्राइम
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