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Gyanvapi Case: ज्ञानवापी के प्राचीन मुकदमे में इस वजह से नहीं हो सकी सुनवाई, अब 16 अप्रैल की पड़ी तारीख
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
Published by: वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 02 Apr 2026 01:18 PM IST
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सार
Varanasi News: पीठासीन न्यायिक अधिकारी के अवकाश पर होने के कारण बुधवार को ज्ञानवापी मामले की सुनवाई टल गई। अब मामले की अगली सुनवाई 16 अप्रैल को निर्धारित की गई है।
Gyanvapi Case
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
सिविल जज (सीनियर डिवीजन/फास्ट ट्रैक) शुभि अग्रवाल की अदालत में बुधवार को ज्ञानवापी के प्राचीन मुकदमे में सुनवाई नहीं हो सकी। पीठासीन न्यायिक अधिकारी के अवकाश पर होने के कारण सुनवाई टल गई। अब मामले की अगली सुनवाई 16 अप्रैल को निर्धारित की गई है।
पिछली सुनवाई के दौरान प्रतिवादी पक्ष उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड की ओर से दलील दी गई थी कि इस मामले में अग्रिम सुनवाई नहीं की जानी चाहिए। बोर्ड के अधिवक्ता ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए कहा था कि वरिष्ठ अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय की याचिका पर वरशिप एक्ट के तहत विवादित सभी मामलों की अग्रिम सुनवाई पर रोक लगाई गई है, इसलिए इस मामले की सुनवाई भी फिलहाल नहीं हो सकती। वहीं, वाद मित्र विजय शंकर रस्तोगी ने इसका विरोध करते हुए कोर्ट में कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने इस मुकदमे पर कोई रोक नहीं लगाई है।
उन्होंने दलील दी कि इलाहाबाद हाईकोर्ट पहले ही इस मामले के निस्तारण के लिए छह महीने के भीतर सुनवाई पूरी करने का आदेश दे चुका है और उसी के तहत अदालत में त्वरित सुनवाई चल रही है। यह मुकदमा वर्ष 1991 में दायर किया गया था, जिसमें ज्ञानवापी परिसर में नए मंदिर के निर्माण और हिंदुओं को पूजा-पाठ का अधिकार देने की मांग की गई है। फिलहाल, अदालत में इस मामले में पक्षकार बनाए जाने से जुड़े प्रार्थना पत्र पर सुनवाई चल रही है।
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पिछली सुनवाई के दौरान सुन्नी वक्फ बोर्ड के अधिवक्ता तौहिद खान की ओर से एक अन्य प्रार्थना पत्र भी दाखिल किया गया था, जिसमें ज्ञानवापी से जुड़े सभी मामलों की सुनवाई पर रोक लगाने की मांग की गई है। इस अर्जी पर भी सुनवाई लंबित है।
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पिछली सुनवाई के दौरान प्रतिवादी पक्ष उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड की ओर से दलील दी गई थी कि इस मामले में अग्रिम सुनवाई नहीं की जानी चाहिए। बोर्ड के अधिवक्ता ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए कहा था कि वरिष्ठ अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय की याचिका पर वरशिप एक्ट के तहत विवादित सभी मामलों की अग्रिम सुनवाई पर रोक लगाई गई है, इसलिए इस मामले की सुनवाई भी फिलहाल नहीं हो सकती। वहीं, वाद मित्र विजय शंकर रस्तोगी ने इसका विरोध करते हुए कोर्ट में कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने इस मुकदमे पर कोई रोक नहीं लगाई है।
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उन्होंने दलील दी कि इलाहाबाद हाईकोर्ट पहले ही इस मामले के निस्तारण के लिए छह महीने के भीतर सुनवाई पूरी करने का आदेश दे चुका है और उसी के तहत अदालत में त्वरित सुनवाई चल रही है। यह मुकदमा वर्ष 1991 में दायर किया गया था, जिसमें ज्ञानवापी परिसर में नए मंदिर के निर्माण और हिंदुओं को पूजा-पाठ का अधिकार देने की मांग की गई है। फिलहाल, अदालत में इस मामले में पक्षकार बनाए जाने से जुड़े प्रार्थना पत्र पर सुनवाई चल रही है।
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पिछली सुनवाई के दौरान सुन्नी वक्फ बोर्ड के अधिवक्ता तौहिद खान की ओर से एक अन्य प्रार्थना पत्र भी दाखिल किया गया था, जिसमें ज्ञानवापी से जुड़े सभी मामलों की सुनवाई पर रोक लगाने की मांग की गई है। इस अर्जी पर भी सुनवाई लंबित है।