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UP: सिम रिचार्ज नहीं होने से 70 लाख की हाईटेक निगरानी दो महीने में ठप पड़ी, 40 गांवों की सुरक्षा भगवान भरोसे

Sat, 18 Jul 2026 06:03 PM IST
Pragati Chand संजय सिंह, संवाद न्यूज एजेंसी, वाराणसी।
संजय सिंह, संवाद न्यूज एजेंसी, वाराणसी। Published by: Pragati Chand Updated Sat, 18 Jul 2026 06:03 PM IST
सार

Varanasi News: सिम रिचार्ज नहीं होने से 70 लाख की हाईटेक सीसीटीवी निगरानी दो महीने में ठप पड़ गई। ऐसे में 40 गांवों की सुरक्षा भगवान भरोसे है। 282 सीसीटीवी कैमरे अब खुद सरकारी व्यवस्था की लापरवाही के शिकार हो गए हैं।

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High-tech CCTV surveillance system worth ₹70 lakh non-functional due to failure to recharge SIM in varanasi
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Adobe Stock

विस्तार

अपराध पर लगाम लगाने और ग्रामीण इलाकों की निगरानी मजबूत करने के उद्देश्य से चोलापुर विकास खंड की 40 ग्राम पंचायतों में 70 लाख रुपये खर्च कर लगाए गए 282 सीसीटीवी कैमरे अब खुद सरकारी व्यवस्था की लापरवाही के शिकार हो गए हैं। 2024 में ‘ऑपरेशन त्रिनेत्र’ के तहत स्थापित हाईटेक निगरानी व्यवस्था महज दो महीने ही चल सकी। इसके बाद कैमरों में लगी सिम का रिचार्ज न होने से पूरी प्रणाली ठप हो गई। 

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गांवों के प्रमुख चौराहे, बाजार, मंदिर, स्कूल और सार्वजनिक स्थल अब फिर से बिना किसी इलेक्ट्रॉनिक निगरानी के हैं। राज्य वित्त एवं केंद्रीय वित्त आयोग की धनराशि से ग्राम पंचायतों के माध्यम से कैमरों की खरीद की गई थी। एक निजी एजेंसी ने इन्हें स्थापित किया। हर कैमरे और पोल पर 24,866 रुपये खर्च हुए, लेकिन करोड़ों की योजनाओं की तरह यह भी रखरखाव की अनदेखी के कारण दम तोड़ती नजर आ रही है। 
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भुगतान न होने से इंटरनेट सेवा बंद हुई और सभी कैमरे निष्क्रिय हो गए। कैथी, उगापुर, श्रीकंठपुर, बर्थरा, परानापुर, कौवापुर, गौरा उपरवार, चौबेपुर, सिंगुलपुर, बहादुरपुर, मुनारी, नियारडीह, उधोरामपुर, हरदासीपुर, बाबतपुर, रामपुर, रजला, सिंहपुर, लखनपुर आदि 40 ग्राम पंचायतों में कैमरे लगे थे।

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आपराधिक घटनाओं में तकनीकी मदद था लक्ष्य
इन कैमरों का उद्देश्य चोरी, लूट, हत्या, छेड़खानी, रंगदारी जैसी घटनाओं की निगरानी करना और पुलिस को जांच में तकनीकी मदद उपलब्ध कराना था। लेकिन कैमरों के बंद होने से यह पूरा तंत्र बेकार साबित हो रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि कई घटनाओं का खुलासा कैमरों की मदद से हो सकता था, लेकिन कैमरे केवल शोपीस बनकर रह गए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि कैमरों के रखरखाव और सिम रिचार्ज की व्यवस्था पहले से तय नहीं थी तो इतनी बड़ी राशि खर्च करने का औचित्य क्या था। लोगों ने कैमरों की खरीद, स्थापना और रखरखाव की पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

इन ग्राम पंचायतों में लगाए गए थे कैमरे
कैथी, उगापुर, श्रीकंठपुर, बर्थरा, परानापुर, कौवापुर, गौरा उपरवार, चौबेपुर, सिंगुलपुर, बहादुरपुर, मुनारी, नियारडीह, उधोरामपुर, हरदासीपुर, बाबतपुर, रामपुर, रजला, सिंहपुर, लखनपुर, मोहनीडीह, लाखी, बन्तरी, चोलापुर, भरतपुर, मवईया, कपीसा, जगदीशपुर, जरियारी, सुआरी, पहाड़पुर, चंद्रावती, लश्करपुर, भदवा, रसड़ा, सुल्तानीपुर, मोलनापुर सहित कुल 40 ग्राम पंचायतों में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे।

क्या बोले अधिकारी
मुझे कैमरे लगाए जाने की जानकारी नहीं है। ग्राम प्रधान और सचिव इस संबंध में बेहतर बता सकते हैं। मामले की जानकारी कर कार्रवाई की जाएगी। -आलोक सिन्हा, जिला पंचायत राज अधिकारी

ग्राम पंचायतों द्वारा कैमरे लगाए गए थे। संभव है कि सिम रिचार्ज न होने के कारण कैमरे बंद हुए हों। जांच कराई जाएगी। -शिवनरायन सिंह, खंड विकास अधिकारी, चोलापुर

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