Varanasi News: नागरी प्रचारिणी सभा में बनेगा हाईटेक रीडिंग स्पेस, मई में मुख्यमंत्री योगी करेंगे शिलान्यास
Varanasi News: नागरी प्रचारिणी सभा में हाईटेक रीडिंग स्पेस बनेगा। मई में इसका शिलान्यास मुख्यमंत्री योगी के हाथों किया जा सकता है। आवास विकास परिषद के माध्यम से यह कार्य जल्द ही शुरू होने जा रहा है।
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उत्तर प्रदेश शासन ने नागरी प्रचारिणी सभा के विकास कार्यों को गति देते हुए स्वीकृत राशि की पहली किस्त जारी कर दी है। इसके तहत सभा-परिसर में अत्याधुनिक प्रेक्षागृह, हाईटेक रीडिंग स्पेस और साहित्यिक गलियारे का निर्माण किया जाएगा। आवास विकास परिषद के माध्यम से यह कार्य शीघ्र शुरू होने जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक मई के पहले सप्ताह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इसका शिलान्यास कर सकते हैं।
लखनऊ में रविवार को भारतेंदु नाट्य अकादमी के स्वर्ण जयंती समारोह का उद्घाटन करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नागरी प्रचारिणी सभा की सराहना की। उन्होंने कहा कि काशी की यह संस्था आधुनिक हिंदी की जननी है और हिंदी व खड़ी बोली के विकास में इसका योगदान अविस्मरणीय है।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार सभा के साथ मिलकर उसके उद्देश्यों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। केंद्र सरकार के संस्कृति मंत्रालय की ओर से शुरू किए गए महत्वाकांक्षी सर्वेक्षण अभियान को नई गति देते हुए काशी की नागरी प्रचारिणी सभा ने महत्वपूर्ण भूमिका निभानी शुरू कर दी है। सभा के आर्यभाषा पुस्तकालय में संरक्षित दुर्लभ हस्तलिखित ग्रंथों, पांडुलिपियों और अभिलेखों का डिजिटाइजेशन तेजी से जारी है। अब तक करीब 15 हजार पृष्ठाें की स्कैनिंग पूरी हो चुकी है।
आजादी से पहले सभा ने हिंदी के हस्तलिखित ग्रंथों की खोज का जो अभियान चलाया, उसी के परिणामस्वरूप चंद बरदाई, कबीर, रैदास, गुरु नानक, तुलसीदास, सूरदास, जायसी, केशव और बिहारी जैसे महान कवियों की रचनाएं सामने आईं। सभा ने इन ग्रंथों का संपादन और प्रकाशन कर हिंदी समाज को उसकी समृद्ध साहित्यिक विरासत से परिचित कराया।
सभा के प्रधानमंत्री व्योमेश शुक्ल ने बताया कि इस सर्वेक्षण अभियान में अब अन्य संस्थाएं भी आगे आने लगी हैं। कबीरचौरा मठ और विश्वेश्वर ट्रस्ट ने अपने-अपने ग्रंथागारों में उपलब्ध पांडुलिपियों का प्रारंभिक विवरण साझा किया है। आने वाले समय में इन संस्थानों में भी केंद्र सरकार की ओर से संरक्षण और डिजिटाइजेशन का कार्य शुरू किया जाएगा।