अदालतों पर मुकदमों का बोझ: पीढ़ियां बीतीं, फैसले नहीं, 39 मामलों में 50 साल से लड़ी जा रही न्याय की लड़ाई
Varanasi News: वाराणसी जिले के अदालतों में मुकदमों का बोझ ज्यादा है। यहां पीढ़ियां बीतीं, लेकिन फैसले नहीं। 39 मामलों में 50 साल से न्याय की लड़ाई लड़ी जा रही है। वहीं 11 हजार मामलों में स्टे लग चुका है। साथ ही 19 मामलों में रिकॉर्ड का इंतजार है।
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वाराणसी जिले की अदालतों में मुकदमों के बोझ का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 1970 से 1980 के बीच के 39 ऐसे मामले हैं, जिनकी लड़ाई कोर्ट में 50 साल से दो पीढ़ियां लड़ रही हैं। 39 ऐसे मामले हैं, जिनमें अब तक कोई फैसला नहीं आया है।
दीवानी अदालतों में लंबित 59 हजार मामलों में से 11 हजार पर केवल स्टे लगा हुआ है। सबसे ज्यादा मामले जमीन विवाद के कोर्ट के समक्ष हैं। नए मामलों की रफ्तार बीते कुछ वर्षों में बढ़ी है। हालांकि, अदालत ने इधर आठ साल में 86,270 मामलों का निस्तारण किया, जबकि इसी अवधि में 94,816 नए मामले अदालत में दाखिल हुए।
सिविल सूट के 41 हजार मामले लंबित हैं। इनमें सबसे ज्यादा जमीन और मकान से जुड़े विवाद हैं। इसके अतिरिक्त, सात हजार विविध सिविल केस भी अदालतों में विचाराधीन हैं। उच्च न्यायालय में भी 41 मामले लंबित हैं। इनमें से 19 मामलों में तो रिकॉर्ड भी उपलब्ध नहीं हैं।
साल 2018 से 2026 के बीच कुल 94,816 नए मामले दर्ज किए गए। इस अवधि में 86,270 मामलों का निस्तारण भी हुआ है। साल 2018, 2022 और 2025 में नए मामलों की संख्या ज्यादा दर्ज की गई। लंबित मुकदमों की गंभीर स्थिति यह है कि अदालतों में कई मुकदमे दशकों से लंबित हैं।
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आठ मामले तो ऐसे हैं, जिनमें 50 साल से दो पीढ़ियां न्याय के लिए संघर्ष कर रही हैं। कुल 39 मामले ऐसे हैं, जिनमें अभी तक कोई अंतिम फैसला नहीं आ सका है। दीवानी अदालतों में 59 हजार से अधिक मामले विचाराधीन हैं। इनमें से 11 हजार मामलों में केवल स्टे आदेश जारी किए गए हैं। यह स्थिति न्याय मिलने में हो रही देरी को उजागर करती है।
11 हजार मामलों में स्टे, 41 मामले हाईकोर्ट में, 19 में रिकॉर्ड का इंतजार
लंबित 59 हजार मामलों में 11 हजार मामलों में स्टे लगा है। 41 मामले हाईकोर्ट में हैं, जबकि 19 ऐसे मामले हैं, जिनमें अदालत के समक्ष रिकॉर्ड नहीं है। इन वजहों से भी मामलों के निस्तारण में देरी हो रही है। सिविल सूट के 41 हजार मामले अदालतों में लंबित हैं। इन मामलों में सबसे अधिक संख्या जमीन और मकान से जुड़े विवादों की है। इसके अलावा, सात हजार विविध सिविल केस भी न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं। देखा जाए तो सबसे ज्यादा मामले जमीन, मकान और खरीद-फरोख्त के कोर्ट में लंबित हैं।
केस-1
मुखर्जी बनाम मुश्ताक का मामला अदालत में 12 जनवरी 1970 को दाखिल हुआ। इस मामले में अगली सुनवाई 20 अगस्त को निर्धारित है। केस में अब दूसरी पीढ़ी पैरवी कर रही है।
केस-2
डॉ. जेएम भोसले बनाम प्रियंवदा तिवारी का मामला 20 सितंबर 1971 को दाखिल हुआ, जिसमें सुनवाई चल रही है। अगली तिथि 29 जुलाई है। परिवार के लोग इस मामले को देख रहे हैं।
केस-3
हरिश्चंद्र बनाम भागवती देवी समेत अन्य का मामला 1972 में दर्ज हुआ। इस मामले में भी सुनवाई चल रही है। 26 अगस्त को सुनवाई की तिथि निर्धारित है।