{"_id":"6a4748d6a8338bc09e0908a8","slug":"shiva-in-every-brick-three-buildings-taking-shape-in-forms-of-trishul-damru-and-tripund-in-varanasi-2026-07-03","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"काशी का नया स्वरूप: ईंट-ईंट में शिव... त्रिशूल, डमरू, त्रिपुंड के आकार के बन रहे तीन भवन; 2027 तक होंगे तैयार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
काशी का नया स्वरूप: ईंट-ईंट में शिव... त्रिशूल, डमरू, त्रिपुंड के आकार के बन रहे तीन भवन; 2027 तक होंगे तैयार
Fri, 03 Jul 2026 11:49 AM IST
Pragati Chand
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
Published by: Pragati Chand
Updated Fri, 03 Jul 2026 11:49 AM IST
सार
Varanasi News: काशी में 2027 तक शिवलिंग की डिजाइन वाले तीन भवन तैयार होंगे। यहां बाबा विश्वनाथ के मंदिर, त्रिशूल, डमरू, बेलपत्र, त्रिपुंड के आकार को केंद्र में रखकर विकास कार्य हो रहे हैं।
विज्ञापन
गंजारी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर के बाद काशी में अगले साल तक शिवलिंग की डिजाइन वाले तीन और भवन तैयार हो जाएंगे। इनमें शिवलिंग थीम पार्क, भेलूपुर जलकल परिसर, कमिश्नरी कंपाउंड में एकीकृत मंडलीय कार्यालय और नगर निगम सदन भवन शामिल हैं। बाबा विश्वनाथ के मंदिर, त्रिशूल, डमरू, बेलपत्र, त्रिपुंड के आकार को केंद्र में रखकर विकास कार्य कराए जा रहे हैं। मंदिर थीम और उनके प्रतीक चिह्नों के आधार पर कई निर्माण कार्य पूरे होंगे।
विज्ञापन
गंजारी स्टेडियम में त्रिशूल के आकार की फ्लड लाइटें लगाई गई हैं। शिवलिंग और बेलपत्र की झलक यहां दिख रही है। यही नहीं, रोपवे में भी बाबा विश्वनाथ के मंदिर की थीम है। शहर में सबसे पहले वनखंडी महादेव मंदिर है। यह पूरी तरह से एक बड़े शिवलिंग के आकार में निर्मित है और काशी के सबसे अनूठे और प्राचीन मंदिरों में से एक है। इसके बाद बनारस में जापान के सहयोग से रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर का निर्माण कराया गया है, जो शिवलिंग की आकृति का है।
विज्ञापन
शिवलिंग और मंदिर थीम पर बनेगा नगर निगम सदन भवन
अब 22 हजार वर्गमीटर क्षेत्रफल में बनने वाला नगर निगम सदन भवन शिवलिंग और मंदिर थीम पर बनेगा। इसकी लागत 97 करोड़ रुपये है। यह सात मंजिला भवन होगा, जिसे गंगा और काशी की थीम पर बनाया जाएगा। इसमें मुख्य भवन शिवलिंग की आकृति का होगा, जिससे काशी में आने का एहसास होगा। इसी बिल्डिंग में नगर निगम के सभी कार्यालय शिफ्ट किए जाएंगे। सदन में 300 लोगों के बैठने की व्यवस्था बनाई जाएगी।
इसे भी पढ़ें; रिसर्च पर विवाद: लैब में इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक सॉल्वेंट्स, रासायनिक प्रदूषकों को गोमूत्र में मिला बताया
शिवलिंग थीम पार्क में विकसित की जाएंगी सभी सुविधाएं
भेलूपुर जलकल परिसर में शिवलिंग थीम पार्क में सभी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इसके आसपास का पूरा क्षेत्र एक विशाल आध्यात्मिक और आधुनिक पार्क के रूप में विकसित किया जाएगा। कमिश्नरी के एकीकृत मंडलीय कार्यालय में 62 विभागों को शिफ्ट किया जाएगा। इसके निर्माण का काम शुरू हो गया है। वीडीए की देखरेख में 12 मंजिला भवन का निर्माण कराया जा रहा है। यह भवन भी मंदिर और शिवलिंग की थीम पर आधारित होगा। अभी मंडलीय कार्यालय अलग-अलग स्थानों पर हैं। 200 करोड़ रुपये की लागत से यह भवन तैयार किया जाएगा। सबसे बड़ी बात यह है कि इस बिल्डिंग में अंडरग्राउंड पार्किंग की सुविधा होगी, जिससे लोगों को बड़ी राहत मिलेगी।
अब 22 हजार वर्गमीटर क्षेत्रफल में बनने वाला नगर निगम सदन भवन शिवलिंग और मंदिर थीम पर बनेगा। इसकी लागत 97 करोड़ रुपये है। यह सात मंजिला भवन होगा, जिसे गंगा और काशी की थीम पर बनाया जाएगा। इसमें मुख्य भवन शिवलिंग की आकृति का होगा, जिससे काशी में आने का एहसास होगा। इसी बिल्डिंग में नगर निगम के सभी कार्यालय शिफ्ट किए जाएंगे। सदन में 300 लोगों के बैठने की व्यवस्था बनाई जाएगी।
इसे भी पढ़ें; रिसर्च पर विवाद: लैब में इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक सॉल्वेंट्स, रासायनिक प्रदूषकों को गोमूत्र में मिला बताया
शिवलिंग थीम पार्क में विकसित की जाएंगी सभी सुविधाएं
भेलूपुर जलकल परिसर में शिवलिंग थीम पार्क में सभी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इसके आसपास का पूरा क्षेत्र एक विशाल आध्यात्मिक और आधुनिक पार्क के रूप में विकसित किया जाएगा। कमिश्नरी के एकीकृत मंडलीय कार्यालय में 62 विभागों को शिफ्ट किया जाएगा। इसके निर्माण का काम शुरू हो गया है। वीडीए की देखरेख में 12 मंजिला भवन का निर्माण कराया जा रहा है। यह भवन भी मंदिर और शिवलिंग की थीम पर आधारित होगा। अभी मंडलीय कार्यालय अलग-अलग स्थानों पर हैं। 200 करोड़ रुपये की लागत से यह भवन तैयार किया जाएगा। सबसे बड़ी बात यह है कि इस बिल्डिंग में अंडरग्राउंड पार्किंग की सुविधा होगी, जिससे लोगों को बड़ी राहत मिलेगी।
स्कल्पचर में बाबा की सवारी नंदी
शहर के 62 चौराहों पर जो स्कल्पचर लगाए जा रहे हैं, वे भी मंदिर और शिवलिंग आधारित हैं। इनमें बाबा की सवारी नंदी को ध्यान में रखकर चौराहों पर स्कल्पचर बनाए गए हैं। लैंडस्केपिंग, हरियाली और रात्रि प्रकाश व्यवस्था जैसे सौंदर्यीकरण के अन्य पहलुओं में भी मंदिर को फोकस किया गया है।
पेंटिंग और म्यूरल आर्ट में थीम शिवलिंग
शहर की दीवारों और घाटों पर पेंटिंग और म्यूरल आर्ट में भी मंदिर और शिवलिंग थीम को रखा गया है। यही कारण है कि शहर के प्रमुख इलाकों की दीवारों और घाटों पर बाबा विश्वनाथ के अलावा उनके मंदिर आदि की थीम पर पेंटिंग कराई जा रही है।
शहर के 62 चौराहों पर जो स्कल्पचर लगाए जा रहे हैं, वे भी मंदिर और शिवलिंग आधारित हैं। इनमें बाबा की सवारी नंदी को ध्यान में रखकर चौराहों पर स्कल्पचर बनाए गए हैं। लैंडस्केपिंग, हरियाली और रात्रि प्रकाश व्यवस्था जैसे सौंदर्यीकरण के अन्य पहलुओं में भी मंदिर को फोकस किया गया है।
पेंटिंग और म्यूरल आर्ट में थीम शिवलिंग
शहर की दीवारों और घाटों पर पेंटिंग और म्यूरल आर्ट में भी मंदिर और शिवलिंग थीम को रखा गया है। यही कारण है कि शहर के प्रमुख इलाकों की दीवारों और घाटों पर बाबा विश्वनाथ के अलावा उनके मंदिर आदि की थीम पर पेंटिंग कराई जा रही है।