Magh Purnima: स्नान-दान से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की सिद्धि, 21 घंटे 46 मिनट रहेगा मुहूर्त; जानें खास
Varanasi News: संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बिहारीलाल शर्मा ने बताया कि माघी पूर्णिमा पर स्नान दान के लिए 21 घंटे 46 मिनट रहेगा मुहूर्त है। अन्न, वस्त्र, तिल, घृत एवं स्वर्णदान के विशेष फल मिलेंगे।
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Magh Purnima 2026: माघी पूर्णिमा पर इस बार उत्तम योग बन रहे हैं। स्नान, दान, जप, तप एवं व्रत का विशिष्ट अवसर है। जो भारतीय लोकजीवन में करुणा, दया, सेवा एवं समत्व की भावना को सुदृढ़ करते हैं। इस दिन संगमों, तीर्थों एवं पवित्र नदियों में स्नान कर दान-पुण्य के विशेष फल मिलते हैं।
इस वर्ष सूर्य के मकर राशि में तथा चन्द्रमा कर्क राशि में पुनर्वसु नक्षत्र में स्थिर होने से पुण्यप्रद योग का निर्माण होगा। रविवार को सुबह 05:53 से 10:59 तक पुनर्वसु नक्षत्र एवं प्रीति योग होने स्नान-दान का फल कई गुणा बढ़ जाते हैं। धर्मशास्त्रों के अनुसार माघी पूर्णिमा पर स्नान-दान के सहस्रगुणित फल है। इसमें अन्न, वस्त्र, तिल, घृत एवं स्वर्णदान के विशेष महत्व हैं। शास्त्रीय मान्यता है कि इस दिन किया गया पुण्यकर्म जीवन में धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष चारों पुरुषार्थों की सिद्धि में सहायक होता है।
जुटेंगे आस्थावान
हिंदू पंचांग के अनुसार धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से माघ पूर्णिमा का विशेष महत्व है। इस तिथि पर स्नान, दान और जप फलदायी है। माघ माह में चलने वाला यह स्नान पौष मास की पूर्णिमा से आरंभ होकर माघ पूर्णिमा तक होता है। रविवार को गंगा में स्नान के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ेगी। श्रद्धालुओं को स्नान-दान के लिए 21 घंटे 46 मिनट तक मिलेगा। माघ मेला से पलट प्रवाह से भी भीड़ बढ़ेगी।
मघा नक्षत्र के नाम से माघ पूर्णिमा की उत्पत्ति होती है। मान्यता है कि माघ माह में देवता पृथ्वी पर आते हैं और मनुष्य रूप धारण करके प्रयाग में स्नान, दान और जप करते हैं। इसलिए कहा जाता है कि इस दिन प्रयाग में गंगा स्नान करने से समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। शास्त्रों में लिखे कथनों के अनुसार यदि माघ पूर्णिमा के दिन पुष्य नक्षत्र हो तो इस तिथि का महत्व और बढ़ जाता है।
स्नान-दान के बन रहे हैं ये मुहूर्त : सर्वश्रेष्ठ काल एक फरवरी को सुबह 05:53 से 10:59 बजे, उत्तम काल सुबह 11 से 15:56 बजे, मध्यम काल दोपहर 3:57 से शाम 5:26 बजे तक और शाम 6:14 से अगले दिन भोर में 03:39 बजे तक शुभ मुहूर्त है।
माघ और कल्पवास होंगे पूर्ण, अखाड़े आएंगे काशी
तीर्थराज प्रयाग में हर साल माघ मेला लगता है। देश-विदेश के श्रद्धालु शामिल होकर श्रद्धालु कल्पवास करते हैं। कल्पवास का समापन माघ पूर्णिमा के साथ हो जाती है। प्रयागराज से साधु-संत व नागा साधु काशी में प्रवास करेंगे। महाशिवरात्रि तक काशी में रहेंगे।
