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UP: विवाहिता की मौत, अस्पताल संचालक सहित पांच पर FIR, ओटी सील; मां की मौत से अनजान है पांच माह का बच्चा

अमर उजाला नेटवर्क, बलिया। Published by: Aman Vishwakarma Updated Tue, 24 Mar 2026 05:31 AM IST
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सार

Ballia News: अस्पताल में मरीज व एसएनसीयू वार्ड में नवजात भर्ती होने के कारण अस्पताल को सील नहीं किया जा सका। दूसरे दिन अस्पताल की सुरक्षा के लिए पीएसी मुस्तैद रही। सुरक्षा के बीच अनीशा का दाह संस्कार महावीर घाट पर हुआ।

Married Woman Dies FIR Filed Against Five Including Hospital Operator OT Sealed in ballia
अनीशा राय की फाइल फोटो और हंगामा करते लोग। - फोटो : संवाद
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विस्तार

Ballia News: बलिया जिले में पिछले एक माह में चिकित्सीय लापरवाही से ऑपरेशन के कारण चार महिलाओं व तीन नवजात की मौत हो चुकी है। प्रशासन ने छह निजी अस्पताल को सील किया है। इसके बाद भी प्राइवेट अस्पतालों में मौत का सिलसिला थम नहीं रहा है।

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रविवार को शहर के जगदीश स्थित अपूर्वा अस्पताल में पथरी के ऑपरेशन के दौरान अनीशा राय (24) की मौत के मामले में पुलिस ने पति शिवांशु राय की तहरीर पर अस्पताल संचालक ज्योत्सना सिंह, बेटी डॉक्टर अपूर्वा सिंह, दामाद डॉक्टर दीपक सिंह, डॉक्टर रोहन गुप्ता व डॉक्टर संजय सिंह पर प्राथमिकी दर्ज की है। डॉ. संजय सिंह की मौत हो चुकी है।
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रात में अस्पताल पर हंगामा कर रहे लोगों पर पुलिस ने हल्का बल प्रयोग कर हालत को नियंत्रित किया था। घटना के 24 घंटे बाद भी सभी आरोपी गिरफ्त से बाहर हैं। स्वास्थ्य विभाग ने जांच के बाद ऑपरेशन में लापरवाही मिलने पर अस्पताल की ओटी को सील कर दिया। 

पुलिस ने की कार्रवाई

Married Woman Dies FIR Filed Against Five Including Hospital Operator OT Sealed in ballia
पोस्टमार्टम हाउस के बाहर माैजूद महिलाएं। - फोटो : संवाद

सुखपुरा थाना के देवकली गांव निवासी शिवांशु राय की पत्नी अनीशा राय को करीब पांच माह पूर्व अपूर्वा अस्पताल में सीजेरियन से बच्चा हुआ था। उस समय अल्ट्रासाउंड जांच में दो एमएम की पथरी की शिकायत आई थी, महिला चिकित्सक ने दूरबीन विधि से ऑपरेशन कराने की सलाह दी। शिवांशु ने तहरीर में बताया कि रविवार को पथरी के ऑपरेशन के लिए अपूर्वा नर्सिग होम में भर्ती कराया था। वहां डॉक्टर ज्योत्सना सिंह ने लेजर विधि से ऑपरेशन के लिए 50 हजार रुपये एडवांस जमा करा लिए। 

एक फॉर्म पर हस्ताक्षर करवाए। अनीशा को डॉ ज्योत्सना सिंह, डॉ. अपूर्वा सिंह, डॉ. दीपक सिंह, डॉ.संजय सिंह व डॉ. रोहन गुप्ता आपरेशन कक्ष में ले गए। वहां इलाज में लापरवाही से मौत हो गई। मामले को छिपाने के लिए डॉ. ज्योत्सना ने बताया कि मेदांता अस्पताल लखनऊ ले जाइए। प्रभारी कोतवाल विजेंद्र सिंह ने बताया कि तहरीर पर ज्योत्सना सहित पांच पर प्राथमिकी दर्ज कर जांच की जा रही है।

एसएनसीयू वार्ड में मरीज भर्ती होने से सील नहीं हुआ अस्पताल
महिला की मौत के बाद पहुंचे एडीएम अनिल कुमार के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग की दो सदस्यीय टीम पहुंची। एसीएमओ डॉ. मंजू रानी व एसीएमओ डॉ. अभिषेक मिश्र के नेतृत्व में टीम ने जांच पड़ताल कर ऑपरेशन थियेटर को सील कर दिया। हालांकि एसनएसीयू वार्ड में नौ नवजात व अन्य वार्डों में 10 से अधिक प्रसूता भर्ती होने के कारण अस्पताल सील नहीं कर पाए।

जिले में मानक के अनुसार सिर्फ महिला अस्पताल का ही एसएनसीयू वार्ड संचालित होता है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा एसएनसीयू वार्ड सहित अन्य पत्रावली मांगने पर संचालक सिर्फ रजिस्ट्रेशन दिखा पाए थे। एसीएमओ डॉ. अभिषेक मिश्र ने कहा कि अस्पताल में नवजात व ऑपरेशन वाली महिलाएं भर्ती होने के कारण अस्पताल को सील नहीं किया गया है। ओटी को सील किया गया है। आगे संबंधित पत्रावली उपलब्ध कराने पर कार्रवाई जारी रहेंगी।

पुलिस ने बल प्रयोग कर हालत को किया कंट्रोल
महिला की मौत के बाद परिजनों ने हंगामा किया। परिजनों ने शव को पोस्टमार्टम के लिए ले जाने से रोक दिया। सूचना पर एसडीएम तिमराज सिंह, सीओ सीटी उस्मान ने अस्पताल संचालक पर कार्रवाई का आश्वासन दिया लेकिन लोग सुनने को तैयार नहीं थे, वे अस्पताल का गेट तोड़कर अंदर जाने का प्रयास करने लगे, अधिकारियों के खिलाफ नारेबाजी की। पुलिसकर्मियों से कहासुनी के बाद लाठी भांजकर भीड़ को तितर बितर किया गया। एडीएम अनिल कुमार, एएसपी कृपाशंकर के आशवासन पर मामला शांत हुआ।

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पोस्टमार्टम हाउस के बाहर बातचीत करते लोग। - फोटो : संवाद

मृत चिकित्सक का नाम पर हुई प्राथमिकी, बदलेगा नाम
पांच वर्ष पूर्व मृत चिकित्सक पर प्राथमिकी दर्ज होने पर प्रभारी कोतवाल विजेन्द्र सिंह ने कहा कि परिजनों ने जो तहरीर दी, उसी आधार पर प्राथमिकी दर्ज की गई। जांच में नाम हटा लिया जाएगा। शिवांशु राय ने कहा कि दूसरे डाक्टर की जगह गलती से संजय सिंह का नाम लिखा गया है, पुलिस को सुधार के लिए दिया गया है।

मां की मौत से अनजान है बच्चा
अनीशा का पांच माह का बच्चा है, जो मां की मौत से अनजान है। वह बड़ी मम्मी के पास है। नानी उसे गोद में लेकर बिलख रही थीं। उन्होंने कहा कि दो एमएम की पथरी दवा से भी ठीक हो गई होती, वह जानलेवा नहीं होती है लेकिन पैसों के लालच में चिकित्सक ने बेटी की हत्या कर दी।

सील न करने का दबाव बनाते रहे संगठन के पदाधिकारी
अपूर्वा अस्पताल में महिला की मौत की सूचना पर शहर के सभी निजी अस्पताल के संचालक जुट गए। स्वास्थ्य विभाग की टीम कार्रवाई के लिए पहुंची तो संगठन के पदाधिकारी अस्पताल को सील न करने का दबाव बनाने लगे। इसको लेकर काफी देर तक डाक्टर के चेंबर में वार्ता होती रही।

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