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नदेसर गोली कांड: ...तो फिर 24 साल पहले किसने की थी तत्कालीन रारी विधायक पर गोलियों की बौछार, उठे सवाल

अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Aman Vishwakarma Updated Fri, 17 Apr 2026 06:02 AM IST
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सार

Varanasi News: घटना के दिन कैंट पुलिस ने अत्याधुनिक असलहों के 19 कारतूस बरामद किए थे। आत्मरक्षा में धनंजय सिंह के गनर वासुदेव पांडेय ने कार्बाइन से 49 राउंड फायरिंग की थी। 15 अप्रैल को इस मामले में वाराणसी की अदालत से सभी आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया।

Nadesar Shooting Incident: 24 years ago opened fire on then-sitting MLA from Rari Questions raised
धनंजय सिंह, पूर्व सांसद जौनपुर। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार

Varanasi Crime: वाराणसी की एमपी-एमएलए कोर्ट द्वारा 24 वर्ष पुराने चर्चित जानलेवा हमले के मामले में सभी आरोपियों को दोषमुक्त किए जाने के बाद अब कचहरी में एक बड़ा सवाल उठ खड़ा हुआ है कि आखिर 2002 में टकसाल सिनेमा के पास हुई फायरिंग किसने की थी। इस मामले में पूर्व सांसद धनंजय सिंह पर जानलेवा हमला हुआ था।

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बुधवार को आए फैसले में गोसाईगंज विधायक अभय सिंह, एमएलसी विनीत सिंह समेत छह आरोपियों को कोर्ट ने साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया। 78 पेज के विस्तृत निर्णय में घटना से जुड़े कई अहम तथ्य सामने आए हैं।
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चार अक्तूबर 2002 की शाम करीब छह बजे नदेसर क्षेत्र में टकसाल सिनेमा के पास अचानक गोलियों की तड़तड़ाहट से हड़कंप मच गया था। उस समय धनंजय सिंह अपने परिजनों के साथ सफारी और बोलेरो गाड़ियों से जौनपुर लौट रहे थे। रास्ते में उन पर असाल्ट राइफल जैसे अत्याधुनिक हथियारों से फायरिंग की गई।

पुलिस ने बरामद किया था खोखा

अभियोजन पक्ष के अनुसार, तत्कालीन कैंट एसएचओ सोहन लाल तोमर ने घटनास्थल से .315 बोर का एक खोखा, 12 बोर के दो खोखे, नाइन एमएम के 16 खोखे समेत कुल 19 कारतूस बरामद किए थे। हमले में धनंजय सिंह की सफारी गाड़ी पर कई गोलियों के निशान पाए गए—शीशे पर तीन, बोनट पर चार, बाईं ओर दो और छत पर एक निशान मिला था।

हमले में धनंजय सिंह के हाथ में दो गोलियां लगी थीं, जबकि उनके गनर वासुदेव पांडेय, ड्राइवर दिनेश गुप्ता, संतोष सिंह और जितेंद्र बहादुर सिंह घायल हो गए थे। बचाव में गनर वासुदेव पांडेय ने कार्बाइन से 49 राउंड फायरिंग की थी। 

कोर्ट में सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं की दलीलों और सात गवाहों की गवाही ने मामले का रुख बदल दिया। साक्ष्यों की कमी और गवाहों के बयानों के आधार पर कोर्ट ने सभी आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया। हालांकि, इस फैसले के बाद यह प्रश्न अनुत्तरित रह गया है कि उस दिन हुई गोलीबारी के पीछे असली हमलावर कौन थे। यह मामला अब भी रहस्य बना हुआ है, जिस पर कानूनी और सामाजिक हलकों में चर्चा जारी है।

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