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Varanasi News: नगवा, सामने घाट में टीडीएस 850, इससे दिमागी-नस संबंधी बीमारी का खतरा

राहुल दुबे, अमर उजाला ब्यूरो, वाराणसी। Published by: प्रगति चंद Updated Tue, 13 Jan 2026 01:46 PM IST
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सार

वाराणसी जिले के प्रमुख रिहायशी और व्यावसायिक इलाकों में लिए गए पानी के नमूनों के अनुसार कई क्षेत्रों में टीडीएस स्तर सामान्य सीमा से ऊपर दर्ज किया गया। 

Nagwa, near Samne Ghat TDS level 850 which increases risk of neurological diseases in varanasi
रामापुर मार्ग पर लीकेज की समस्या - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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काशी में शुद्ध जल की स्थिति अब चिंता का विषय बन गई है। शहर के अलग-अलग इलाकों से सामने आए पानी के टीडीएस (टोटल डिसॉल्व्ड सॉलिड्स) आंकड़े बताते हैं कि बनारस के कई हिस्सों में पीने का पानी निर्धारित मानकों पर खरा नहीं उतर रहा। कुछ क्षेत्रों में हालात इतने गंभीर हैं कि पानी सीधे स्वास्थ्य जोखिम की श्रेणी में आ गया है।

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शहर के प्रमुख रिहायशी और व्यावसायिक इलाकों में लिए गए पानी के नमूनों के अनुसार, मंडुवाडीह (450), महमूरगंज (400), अस्सी (430), सिगरा (450), लहुराबीर (450) और गोदौलिया (470) जैसे क्षेत्रों में टीडीएस स्तर सामान्य सीमा से ऊपर दर्ज किया गया। वहीं भेलूपुर (370), मैदागिन (370), पांडेयपुर (350), चौक (350) और कैंट (330) में स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है, लेकिन ये आंकड़े भी पूरी तरह निश्चिंत करने वाले नहीं हैं।
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सबसे गंभीर स्थिति नगवा और सामने घाट की सामने आई है, जहां टीडीएस स्तर 850 तक पहुंच गया है। यह न सिर्फ पानी के स्वाद और गुणवत्ता को प्रभावित करता है, बल्कि लंबे समय तक सेवन से किडनी, पाचन तंत्र और हड्डियों से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। लंका क्षेत्र में भी टीडीएस 550 दर्ज किया गया, जो साफ संकेत है कि शहर के दक्षिणी हिस्सों में भूजल की गुणवत्ता तेजी से गिर रही है।

टीडीएस क्यों बढ़ रहा है

बीएचयू के जल वैज्ञानिक डॉ. कृपाराम बताते हैं कि अनियंत्रित बोरिंग, भूजल का अत्यधिक दोहन, सीवर और गंदे नालों का रिसाव टीडीएस बढ़ने के प्रमुख कारण हैं। पीने के पानी में 300 तक टीडीएस अच्छा, 300 से 500 तक संतोषजनक, 500 से ऊपर खराब और टीडीएस 850 तक पहुंच जाना गंभीर स्थिति को दर्शाता है।

स्वास्थ्य पर प्रभाव
स्वामी विवेकानंद अस्पताल, भेलूपुर के डॉ. क्षितिज तिवारी बताते हैं कि अधिक टीडीएस के पानी से दिमागी और नस संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। माइक्रोबॉयोलॉजी विभाग के प्रो. गोपाल नाथ के अनुसार, टीडीएस अधिक होने पर पानी में कैल्शियम और मैग्नीशियम की मात्रा बढ़ जाती है। इससे पेट संबंधी बीमारियों के साथ जोड़ो में समस्या भी बनी रहती है।

शहर के विभिन्न इलाकों में टीडीएस की स्थिति
इलाका         टीडीएस स्तर (पीपीएम)

मंडुवाडीह      450
महमूरगंज      400
लंका             550
भेलूपुर          370
अस्सी           430
सिगरा          450
पांडेयपुर      350
गोदौलिया     470
मैदागिन       370
भदैनी          400
कैंट             330
लहुराबीर     450
चौक           350
नगवा          850
सामने घाट   850

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