नवसंवत्सर: 300 से ज्यादा मठ और मंदिरों में अनुष्ठान, घरों में कलश स्थापना कर शुरू होगी देवी की आराधना
Varanasi News: सूरज की पहली किरणों से नवसंवत्सर का अगवानी करेंगे। वहीं घाटों के अलावा 300 से अधिक मठ व आश्रमों और मंदिरों में विविधि अनुष्ठान होंगे।
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नवसंवत्सर और वासंतिक नवरात्र 19 मार्च से शुरू हो रही है। इसकी अगवानी के लिए काशी के मठ, मंदिर और आश्रम से लेकर घरों में तैयारी तेज हो गई। बटुक मां गंगा पूजन करेंगे और सूर्यदेव को अर्घ्य देंगे। मंदिरों में धर्म ध्वज लगेगा। घरों में कलश स्थापना के साथ देवी की आराधना शुरू हो जाएगी। शहर के 300 से अधिक मठ व आश्रमों में विविध अनुष्ठान होगा।
करीब नौ दशक बाद पुराने साल में ही नवरात्र शुरू होगा। प्रतिपदा में नए साल की शुरुआत होगी। तिथियों के अनुसार प्रतिपदा से नवसंवत्सर शुरू हो जाएगा। श्रीकाशी विश्वनाथ धाम में पूजन होगा। गंगा की आरती होगी। ललिता घाट पर गंगा आरती होगी। दशाश्वमेध घाट, अस्सीघाट पर मां गंगा का पूजन व आरती होगी। वैदिक मंत्रों के उच्चारण के साथ धूप, दीप, नैवेद्य, पुष्प और दीप कुलिका अर्पित कर पूजन जाएंगे। आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार करेंगे।
केदारघाट के पास शंकराचार्य घाट पर बटुक पूजन के बाद मां गंगा का पूजन कर आरती उतारेंगे। सूर्य की पहली किरण के साथ सूर्य नमस्कार कर नए संवत्सर का अगवानी करेंगे। बटुकों और संतों के साथ आम लोग भगवान भाष्कर को जल अपर्ण कर हिंदू नववर्ष का आगाज करेंगे। लोकहित की कामाना करेंगे। शुरुआत शंखनाद और ध्वजारोहण से होगा। सनातन पंचांग का विमोचन होगा। पंचांग का श्रवण और पंचांग दान करेंगे।
माता अन्नपूर्णा मंदिर, मठ, सतुआ बाबा आश्रम, साधुवेला आश्रम, भूमानंद आश्रम, पातालपुरी मठ, शारदापीठम्, शृंगेरी मठ, मुमुक्षु भवन, रामजानकी मठ, श्रीरामजानकी मंदिर, धर्मसंघ, द्वारिकाधीश मंदिर आदि में भी उत्सव होंगे। सुबह ए बनारस मंच, जय मां गंगा समिति, आरएसएस के स्वयंसेवक, संस्कृत विद्यालयों के शिक्षक, बटुक आदि भी पूजन अर्चन कर नवसंवत्सर का स्वागत करेंगे।
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घरों में कलश स्थापना के साथ देवी की आराधना
देवी मंदिरों में मां के शृंगार के साथ कलश स्थापना व दर्शन पूजन शुरू होगा। घरों में विधिवत कलश स्थापना होगा। इसके साथ ही चैत्र नवरात्र का शुभारंभ हो जाएगा। श्रद्धालु नौ दिनों तक मां दुर्गा की उपासना, व्रत और विशेष पूजा अर्चन करेंगे। मंदिरों और घरों में कलश स्थापना कर मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा शुरू हो जाएगी।