Varanasi News: काशी में एक और श्रीजगन्नाथ धाम की तैयारी, 108 फीट का होगा शिखर; विश्वनाथ धाम के तर्ज पर बनेगा
Varanasi News: धार्मिक नगरी काशी में जगन्नाथ मंदिर के जीर्णोद्धार के साथ धाम का रूप दिया जाएगा। एक मई को कांची कामकोटि शंकराचार्य शिलान्यास करेंगे। इससे विविध आयाम भी जुड़ेंगे। आश्रम से वेद विद्यालय तक की व्यवस्था का शिला पूजन करेंगे।
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Varanasi News: काशी के उत्तर में श्रीकाशी विश्वनाथ धाम के बाद अब दक्षिण में श्रीजगन्नाथ धाम बनाने की तैयारी है। इस धाम का शिखर 108 फीट का होगा, जिसे गंगा स्नान-दान करने वाले श्रद्धालु वहीं से शिखर का दर्शन कर सकेंगे। धाम क्षेत्र में धर्मशाला से लेकर वेद विद्यालय बनेगा। हर वर्ग के विकास के लिए कौशल प्रशिक्षण केंद्र खोले जाएंगे।
करीब 230 साल पुराने इस मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए शिलान्यास बैशाख पूर्णिमा यानी एक मई को कांची कामकोटि पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी शंकर विजयेंद्र सरस्वती महाराज करेंगे। इसके निर्माण में तीन साल लगेंगे। प्रथम चरण में 30 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
ट्रस्ट श्री जगन्नाथ के सचिव शैलेश त्रिपाठी, सदस्य डॉ. संजीव कुमार एवं उत्कर्ष श्रीवास्तव ने शनिवार को दुर्गाकुंड स्थित हनुमान प्रसाद पोद्दार विद्यालय में पत्रकारों को बताया कि काशी में असि स्थित ऐतिहासिक श्रीजगन्नाथ मंदिर को श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर के तर्ज पर और धाम का रूप देने की तैयारी है। इस मंदिर का शिखर ऐसा बनाया जाएगा, जो शास्त्र सम्मत होने के साथ ही भक्त गंगा से शिखर का दर्शन कर सकें। अभी 108 फीट तय किया गया है। इसे और बढ़ाया जा सकता है।
होगा भव्य नजारा
उन्होंने बताया कि एक मई को सुबह नौ बजे से शिला पूजन एवं शिलान्यास के साथ निर्माण शुरू हो जाएगा। शंकराचार्य स्वामी शंकर विजयेंद्र सरस्वती विधिवत शिलान्यास करेंगे। शिलान्यास के पूर्व मजिलाएं कलश यात्रा निकालेंगी, जो नगर भ्रमण के बाद मंदिर पहुंचेगी, जहां पर पूजन अर्चन होगा। शंकराचार्य 108 विशिष्ट कार्य करने वालों का सम्मान करेंगे। उनका आशीर्वाद होगा। अनुष्ठान में साधु-संत, काशी विद्वत परिषद के विद्वान और श्रद्धालु शामिल होंगे। पूरी के जगन्नाथ मंदिर के ट्रस्टी भी आएंगे।
नागर शैली में निर्माण, राजस्थान से आएगा पत्थर
शैलेश त्रिपाठी ने बताया कि श्रीजगन्नाथ धाम के निर्माण के मॉडल तैयार कर लिया गया है। इसे नागर शैली में बनाया जाएगा। राजस्थान के धौलपुर से पत्थर लाया जाएगा। वहीं से इसके कारीगर भी जाएंगे। मंदिर का निर्माण 2029 तक पूर्ण हो जाएगा। निर्माण के लिए ट्रस्ट के अलावा भक्तों से सहयोग लिया जाएगा।

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