ट्रॉमा सेंटर में लापरवाही की जांच पूरी: डॉक्टरों को क्लीन चिट, कर्मचारी पर आंच; 13 पेज की रिपोर्ट में ये बात
Varanasi News: आईएमएस-बीएचयू ट्रॉमा सेंटर में गलत सर्जरी से महिला राधिका देवी की मौत मामले में जांच रिपोर्ट में डॉक्टरों को क्लीन चिट दी गई है। रिपोर्ट में वार्ड से ओटी तक मरीज ले जाने वाले कर्मचारी को दोषी ठहराया गया। परिजनों ने लापरवाही का आरोप लगाया, अब आगे की कार्रवाई पर सबकी नजर है।
विस्तार
IMS BHU: आईएमएस बीएचयू के ट्रॉमा सेंटर में बलिया निवासी जिस महिला की गलत सर्जरी के बाद मौत हो गई थी। इस मामले में गठित दूसरी जांच कमेटी की जांच पूरी हो गई हैं। 13 पेज की जो रिपोर्ट कमेटी ने निदेशक को दी, उसको निदेशक ने कुलपति को भेज दी है।
हैरानी की बात तो यह है कि स्पाइन कार्ड सर्जरी से ग्रसित न्यूरो सर्जरी वार्ड में भर्ती राधिका देवी की आर्थो विभाग के जिन डॉक्टरों ने गलत सर्जरी कर जांघ में चीरा लगाया, रिपोर्ट में डॉक्टरों की लापरवाही का कोई जिक्र ही नहीं है। यानी डॉक्टरों को क्लीन चिट दे दिया गया है। इसमें महिला मरीज को वार्ड से ओटी तक लेकर लेकर जाने वाले कर्मचारियों को दोषी बताया गया है।
ट्रॉमा सेंटर में बलिया निवासी राधिका देवी(71) को 24 फरवरी 2026 को स्पाइन कार्ड टयूमर की समस्या पर न्यूरो सर्जरी के डॉ. अनुराग साहू के अंडर में भर्ती किया गया। महिला न्यूरोसर्जरी के बेड नंबर 29 पर भर्ती थी। 7 मार्च को इसी महिला को ऑपरेशन थिएटर में ले जाया गया, जहां न्यूरो सर्जरी की टीम की वजह आर्थों विभाग के डॉक्टरों ने उसकी जांघ में चीरा लगाया। जब जांघ में चीरा लगाने के बाद अंदर की हड्डी सही दिखी तो डॉक्टरों की टीम हैरान हो गई।
पता चला कि वास्तव में जिस महिला के जांघ में चोट लगी थी, वह राधिका देवी नहीं है। इसके बाद महिला को ओटी से बाहर किया गया। इस गलत सर्जरी के 10 दिन बाद 18 मार्च को फिर न्यूरो सर्जरी विभाग की टीम ने सर्जरी (सही सर्जरी) की। 12 दिन में दो बार सर्जरी होने के बाद 27 मार्च को उनकी मौत हो गई। महिला के पोते मृत्युंजय पाल ने इसके बाद आईएमएस निदेशक और कुलपति को शिकायत कर जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की थी।
निदेशक की ओर से आर्थों विभाग के प्रो. अजीत सिंह की अध्यक्षता में जो कमेटी गठित की गई थी, उसने अपनी जांच कर रिपोर्ट मंगलवार को निदेशक को बंद लिफाफे में सौंपी। इसमें जांच टीम ने उस कर्मचारी की गलती बताई है, जो राधिका देवी को 7 मार्च को वार्ड से ओटी तक लेकर गया।
सवाल यह है कि अगर कोई कर्मचारी वार्ड से किसी गलत मरीज को ओटी में लेकर गया तो एनीस्थीसिया देते समय, जांघ में चीरा लगाते समय जो डॉक्टरों की टीम वहां थी, उसने यह नहीं देखा कि यह राधिका देवी सही मरीज है कि नहीं। अब सभी की नजर इस रिपोर्ट पर अगली कार्रवाई पर टिकी है।
तीन बार मीटिंग, आर्थो, न्यूरो टीम को नोटिस, तैयार की 13 पेज की रिपोर्ट
गलत सर्जरी के बाद मृत महिला राधिका देवी के पोते मृत्युंजय पाल ने निदेशक, कुलपति से जो शिकायत की थी, उस पर पहले निदेशक ने आर्थों विभाग के प्रो. अमित रस्तोगी की अध्यक्षता में कमेटी गठित की। जैसे ही निदेशक को पता चला कि प्रो.रस्तोगी के निर्देशन वाली टीम ने ही सर्जरी की थी, उन्हीं पर आरोप है तो उन्होंने तुरंत दूसरी जांच कमेटी कर दी।
निदेशक के निर्देश पर प्रो. अजीत सिंह की अध्यक्षता वाली जो कमेटी बनी थी, उसने तीन बार मीटिंग(17 अप्रैल, 21 अप्रैल और 24 अप्रैल) की। इसके बाद जो 13 पेज की रिपोर्ट तैयार की गई हैं, उसमें आर्थो, न्यूरो सर्जरी की टीम को नोटिस देने के साथ ही ऑपरेशन थिएटर में डयूटी वाले स्टाफ को भी नोटिस देकर जवाब मांगने का जिक्र है। अब सवाल है कि जब रिपोर्ट में डॉक्टरों की गलती नहीं मानी गई हैं तो सभी को नोटिस क्यों मांगा गया है।
प्रो. अजीत सिंह वाली जांच कमेटी की रिपोर्ट मुझे बंद लिफाफे में मिली। मैने उसको फारवर्ड कर कुलपति को भेज दिया है। इसमें क्या हैं, मुझे कुछ नहीं मालूम है। इस पूरे प्रकरण में जो भी होगा वह बीएचयू पीआरओ सेल के माध्यम से नियमानुसार बताया जाएगा। - प्रो.एसएन संखवार, निदेशक आईएमएस
मैंने जो शिकायत की थी, पहले जिस डॉक्टर को अध्यक्ष बनाया गया, बाद में उनको हटाकर दूसरी कमेटी बनाई गई। मुझे कमेटी ने बुलाया था लेकिन मेरी बातों को सही तरीके से न तो सुना गया और न ही मुझसे कोई कागजात लिया गया। अब जांच रिपोर्ट तैयार कर दे दी गई हैं तो इसकी भी कोई जानकारी नहीं है। एक बार फिर कुलपति, निदेशक को पत्र लिखकर जाच रिपोर्ट मांगूंगा। - मृत्युंजय पाल, मृत राधिका देवी के पोते

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