यूपी कॉलेज में प्रदर्शन खत्म: फास्ट ट्रैक कोर्ट में केस, प्राचार्य पर लगे आरोपों की होगी जांच; आश्वासन
Varanasi News: यूपी कॉलेज हत्याकांड को लेकर चर्चाओं का बाजार अब भी गर्म है। गेट के बाहर मेयर ने पुलिस और जिला प्रशासन के साथ बैठक कर धरनारत छात्रों से बातचीत की। उनकी पांच मांगें मान ली गईं। जनसहयोग से एक लाख रुपये भी दिए जाएंगे।
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Varanasi Crime: यूपी कॉलेज में बीएससी छात्र सूर्य प्रताप सिंह की हत्या के बाद से धरने पर बैठे छात्रों ने 24 घंटे से चल रहा अपना विरोध प्रदर्शन समाप्त कर दिया। रविवार को होने वाली लोक सेवा आयोग की एपीओ परीक्षा का बड़ा केंद्र होने के नाते मेयर भी पहुंचे और गेट के बाहर स्थित सिंह भवन में अधिकारियों संग बैठक कर धरना समाप्त करवाने के लिए घंटों चर्चा की।
सूर्य प्रताप को न्याय दिलाने की मांग पर बीएचयू से भी शोध छात्र यूपी कॉलेज पहुंच गए। दो मिनट का मौन रख श्रद्धांजलि दी और नारेबाजी शुरू कर दी। दोपहर बाद प्राचार्य के इस्तीफे, फास्ट ट्रैक कोर्ट, मुआवजा सहित पांच मांगों पर अड़े छात्रों ने एडीएम सिटी आलोक कुमार वर्मा और डीसीपी आकाश कुमार को ज्ञापन सौंपा और धरना-प्रदर्शन को स्थगित किया। अधिकारियों ने मेयर अशोक तिवारी के साथ बैठक के बाद कई आश्वासन दिए।
इन पर मिला आश्वासन : पहली मांग स्वीकार करते हुए बताया गया कि सूर्य प्रताप हत्याकांड का केस फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाया जाएगा। शासन को पत्र लिखकर उचित मुआवजा दिलाया जाएगा। दूसरा, वांछित फरार अभियुक्त को जल्द गिरफ्तार किया जाएगा और प्राचार्य पर लगे आरोपों की जांच के लिए कमेटी बनाई जाएगी। तब तक प्रो. डीके सिंह प्राचार्य अपने पद पर न रहें, ऐसी संस्तुति शासन से की जाएगी। गेट पर मेयर और अधिकारियों की बैठक हुई। मेयर ने कहा कि जनसहयोग से पीड़ित परिवार को एक लाख रुपये दिए जाएंगे।
आरोपी का हो एनकाउंटर...कहकर फफक पड़ीं सूर्य प्रताप की मां
सूर्य प्रताप सिंह हत्याकांड के बाद पैतृक गांव दुबईठा में मातम पसरा है। गांव के साथ-साथ आसपास के इलाकों से भी लोगों का आना-जाना लगा है। सूर्य प्रताप की मां किरण सिंह का रो-रोकर बुरा हाल है। दिल्ली में रहने वाले चाचा सतीश सिंह भी घटना की जानकारी मिलने के बाद घर आ रहे हैं।
सूर्य प्रताप की मां किरण सिंह ने प्रशासन से मांग की है कि उनके बेटे की हत्या करने वाले अपराधियों का एनकाउंटर किया जाए, तभी उन्हें न्याय मिलेगा। ये कहते ही वह फफक-फफक कर रो पड़ीं। वहां मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। उन्होंने कहा कि इस प्रकरण में कॉलेज के प्रिंसिपल भी जिम्मेदार हैं।
आरोप लगाया कि छात्रों के अनुसार प्रिंसिपल ने फोन कर सूर्य प्रताप को अपने कार्यालय बुलाया था। वहां दोनों पक्षों को समझाने के बजाय केवल सूर्य प्रताप को डांटा और अपमानित किया। उनका कहना है कि जब आरोपी मंजीत चौहान वारदात को अंजाम दे रहा था, तब भी प्रिंसिपल ने हस्तक्षेप नहीं किया। ऐसे में उन्हें भी सजा मिलनी चाहिए।
बीएचयू में जितने हॉस्टल, यूपी कॉलेज में उसके आधे ही हॉस्टलर्स उनमें से भी आधे निकले घर
बीएचयू में जितने हॉस्टल हैं, यूपी कॉलेज में उसके आधे भी हॉस्टलर्स नहीं हैं। अब कॉलेज में हत्या की घटना के बाद उनमें से आधे छात्रों को उनके परिजनों ने घर बुला लिया है। यूपी कॉलेज के न्यू हॉस्टल में पहले मात्र 30-35 छात्र रहते थे, लेकिन अब केवल 20-25 छात्र ही बचे हैं।
यूपी कॉलेज के छात्रों ने बातचीत में बताया कि कॉलेज में कुछ भी अप्रिय घटना होती है, तो उसका ठीकरा हॉस्टल पर ही फोड़ दिया जाता है, जबकि बीएचयू में 64 से ज्यादा हॉस्टल होने के बावजूद उसे बंद करने की बात कभी नहीं होती। यूपी कॉलेज के हॉस्टल में रहने वाले नमन सिंह ने कहा कि कॉलेज में कुछ भी होता है तो हॉस्टल में रहने वाले छात्रों पर रैगिंग के आरोप लगाकर उन्हें निलंबित करने की धमकी दी जाती है। कई छात्रों पर इसी तरह कार्रवाई भी की गई है।
छात्र शिवम सिंह ने बताया कि यूपी कॉलेज में न्यू हॉस्टल बनने के बाद इसी तर्ज पर विद्यापीठ में भी हॉस्टलों का निर्माण किया गया। यूपी कॉलेज के न्यू हॉस्टल में आए पूर्व हॉस्टलर अभय सिंह ने बातचीत में कहा कि हॉस्टल की व्यवस्था जर्जर हो चुकी है। बात-बात पर छात्रों को हटाने की चेतावनी दी जाती है। बाथरूम में लगे नल में टोटी नहीं है और पानी लगातार बहता रहता है। कहीं दरवाजा नहीं है, तो कहीं पल्ला नहीं है। जहां दरवाजे हैं, वहां बदबू के कारण कोई खड़ा नहीं हो सकता।
पिता बोले, हत्यारों को कड़ी से कड़ी सजा मिले
पिता ऋषि देव सिंह ने कहा कि उनके बेटे के हत्यारों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने बताया कि परिवार या पड़ोस में किसी भी कार्यक्रम में सूर्य प्रताप जरूर शामिल होता था। दादी मालती सिंह की हालत भी खराब है और वह बेसुध हैं। गांव के तेज तिवारी ने बताया कि सूर्य प्रताप बेहद सरल और मिलनसार स्वभाव का था। वह जब भी गांव आता, सभी से मिलकर जाता था। पिछले वर्ष होली पर भी वह घर आया था और सभी से मिला था।