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MGKVP: डिजिटाइजेशन के दौर में आर्थिक क्रियाकलापों पर शोध करना जरूरी, कुलपति ने दी खास जानकारी

अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Aman Vishwakarma Updated Sun, 26 Apr 2026 12:35 PM IST
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सार

Varanasi News: महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में वाणिज्य विभाग की शोध पत्रिका का विमोचन कुलपति प्रो. आनंद कुमार त्यागी ने किया और डिजिटल अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर शोध को जरूरी बताया। वहीं संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने दो ग्रंथों का लोकार्पण कर उन्हें भारतीय ज्ञान परंपरा का महत्वपूर्ण योगदान बताया।

Research on Economic Activities Essential in Era of Digitization Vice-Chancellor Shares Key Insights
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

Mahatma Ghandi Kashi Vidyapeeth: महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के वाणिज्य विभाग में शनिवार को द काशी जर्नल ऑफ कॉमर्स शोध पत्रिका के नए संस्करण का विमोचन कुलपति प्रो. आनंद कुमार त्यागी ने किया। कहा कि डिजिटलाइजेशन के दौर में आर्थिक क्रियाकलापों पर शोध करना जरूरी है। 

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निश्चित तौर इसका लाभ विद्यार्थियों को भी मिलेगा। काशी विद्यापीठ के कुलपति प्रो. आनंद कुमार त्यागी ने वाणिज्य के क्षेत्र में विशेष रूप से क्रिप्टोकरेंसी, डिजिटल करेंसी, ई बैंकिंग, साइबर सिक्योरिटी, वर्चुअल अकाउंटिंग सिस्टम, डिजिटल मार्केटिंग, कंप्यूटराइज्ड अकाउंटिंग, ईरिटेलिंग, टूरिज्म एंड ट्रेवल सेक्टर, फाइनेंशियल सेक्टर आदि क्षेत्र में अनुसंधान को समय की मांग बताया। 
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शोधार्थियों से कहा कि वाणिज्य के क्षेत्र में नवोन्मेषी व वित्तीय समावेशन विषयों पर अपना ध्यान केंद्रित करें, इससे भारतीय अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा। समारोह में डॉ. अंकिता की ओर से लिखित पुस्तक खंड रिपोर्टिंग प्रथाएं एवं डॉ. देवचंद की ओर से लिखित पुस्तक खुदरा परिचालन में टिकाऊ कार्य पद्धतियां का भी विमोचन किया गया। कार्यक्रम में विभागाध्यक्ष प्रो. अजीत कुमार शुक्ल, स्वागत संकायाध्यक्ष प्रो. सुधीर कुमार शुक्ल, संचालन डॉ. धनंजय विश्वकर्मा, धन्यवाद ज्ञापन डॉ. आयुष कुमार ने किया। 

संविवि में कुलपति ने किया ग्रंथों का लोकार्पण
संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने शनिवार को दो मौलिक ग्रंथों का लोकार्पण किया। प्राकृत विभाग के आचार्य और श्रमण विद्या संकाय के पूर्व प्रमुख प्रो. हरिशंकर पांडेय की रचित दो मौलिक और शोधपरक ग्रंथों (अहिंसा इन ओरिएंटल स्ट्डीज) प्राच्य अध्ययन में अहिंसा तथा चिन्मय गुरुदेव ग्रंथ को कुलपति ने भारतीय बौद्धिक परंपरा का सशक्त प्रतिनिधि बताया। 

कुलपति ने कहा कि ये ग्रंथ मात्र पुस्तकें नहीं, अपितु भारतीय ज्ञान-संस्कृति के दीप स्तंभ हैं। कुलसचिव राकेश कुमार ने बताया कि प्राच्य अध्ययन में अहिंसा का आवरण स्वयं में एक सांस्कृतिक संवाद है। कार्यक्रम में श्रमण विद्या संकाय प्रमुख प्रो. रमेश प्रसाद, परीक्षा नियंत्रक दिनेश कुमार, डॉ. रविशंकर पांडेय मौजूद रहे। 

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