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Varanasi News: तिलक लगाने या भगवा पहन लेने से कोई धार्मिक नहीं हो जाता, काशी में बोले स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
Published by: Pragati Chand
Updated Thu, 14 May 2026 12:25 PM IST
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सार
Varanasi News: शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि कुछ लोग धार्मिक वेशभूषा और नारों का सहारा लेकर समाज को भ्रमित कर रहे हैं। माथे पर तिलक लगाने या भगवा पहन लेने से कोई धार्मिक नहीं हो जाता है।
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
गोरक्षा के लिए निकली 81 दिवसीय गविष्ठी गोरक्षार्थ धर्मयुद्ध यात्रा के तहत बुधवार को शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद वाराणसी पहुंचे। यात्रा के दौरान समर्थकों ने जगह-जगह पुष्पवर्षा, ढोल-नगाड़ों और जयघोष के साथ उनका स्वागत किया गया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने कलश यात्रा भी निकाली। शंकराचार्य ने अपने संबोधन में कालनेमियों को पहचानो विषय पर कहा कि वर्तमान समय में सबसे बड़ी चुनौती उन लोगों को पहचानना है, जो धार्मिक वेशभूषा और नारों का सहारा लेकर समाज को भ्रमित कर रहे हैं।़
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उन्होंने कहा कि केवल माथे पर तिलक लगाने या भगवा पहन लेने से कोई धार्मिक नहीं हो जाता, बल्कि उसके भीतर धर्म और संवेदना का भाव होना जरूरी है। सभा में उन्होंने गो हत्या और मांस निर्यात के मुद्दे पर भी सरकारों को घेरा। उन्होंने कहा कि देश में गोरक्षा के नाम पर राजनीति हो रही है। उन्होंने बीफ निर्यात पर सवाल उठाते हुए कहा कि गाय और भैंस के मांस को एक ही श्रेणी में दिखाकर भ्रम फैलाया जाता है। उन्होंने दावा किया कि कई मामलों में जांच के दौरान गोमांस की पुष्टि हुई है, जो गंभीर चिंता का विषय है।
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अपने प्रवचन में उन्होंने गो हत्या को महापाप बताते हुए कहा कि केवल हत्या करने वाला ही नहीं, बल्कि उसका समर्थन करने वाला, अनुमति देने वाला और उससे लाभ लेने वाला भी पाप का भागीदार होता है। यात्रा के दौरान रोहनिया, लंका, सिगरा, कचहरी और जाल्हूपुर समेत कई इलाकों में सभाएं आयोजित हुईं। मीडिया प्रभारी संजय पांडेय ने बताया कि यात्रा बृहस्पतिवार को अजगरा, पिंडरा और सेवापुरी के बाद भदोही की ओर प्रस्थान करेगी।