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काशी की अनकही कहानी: जहां घर उल्टे बनते हैं, इलाज दर्शन से होता है; रामलीला के पुतले गली के हिसाब से बनते हैं

अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: प्रगति चंद Updated Thu, 01 Jan 2026 11:20 AM IST
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सार

Varanasi News: साल के पहले दिन काशी की अनकही कहानी से आपको अलगत कराएंगे, जहां घर उल्टे बनते हैं और इलाज दर्शन से होता है। वहीं रामलीला के पुतले गली के हिसाब से बनते हैं।   

Special story of Kashi on New Year 2026 houses built upside down treatment through darshan and Ramlila effigie
अनोखी है काशी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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काशी केवल एक नगर नहीं, बल्कि जीती-जागती परंपराओं, लोकविश्वासों और अनकही विरासतों का संगम है। यहां घर छत से बनते हैं, देवता दिनभर विचरण करते हैं और रोगों का इलाज सिर्फ दवाओं से नहीं-दर्शन से भी होता है। गलियों में द्वारपाल की तरह स्थापित जीवंत भक्त हों या कार्तिक मास में मणिकर्णिका की अनोखी रामलीला हर परंपरा काशी को असाधारण बनाती है।

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यहां मृत्यु भी नियमों से बंधी है और इतिहास एक कंगन से हवेली तक सांस लेता है। काशी को जानना, भारत की आत्मा को समझना है। उस रूप में, जो बहुत कम लोगों ने देखा है। बीएचयू में न्यूरोलॉजिस्ट प्रोफेसर विजय नाथ मिश्र ने अपनी पुस्तक दंडपाणि च भैरवम् में भी ऐसी कई परंपराओं का जिक्र किया है।
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यह जानें

Special story of Kashi on New Year 2026 houses built upside down treatment through darshan and Ramlila effigie
प्रोफेसर विजय नाथ मिश्र - फोटो : स्वयं
  • दुनिया में अकेला शहर जहां पहले छत की ढलाई होती है, और फिर दीवार बनाई जाती है और फिर नींव भरी जाती है। इसी पद्धति से पक्के महाल में घर बनाए जाते हैं।
  • ये दो अनोखे भक्त काशी के संहार भैरव पाटन दरवाजा, गाय घाट वाली गली में स्थापित हैं। और ये दोनों भगवान के द्वारपाल की तरह स्थापित हैं। इन दोनों के हर रोज जीवंत व्यक्ति की तरह पूजा होती है।
  • काशी में बाबा विश्वनाथ दिन भर विचरण करते हैं। ब्रह्म मुहूर्त में आरती में वह विश्वनाथ मंदिर में सभी ज्योतिर्लिंगों के साथ विराजमान होते हैं। सुबह वे आत्मविश्ववेशर शिवलिंग में विराजमान होते हैं तो दोपहर को त्रिपुरांतकेश्वर शिवलिंग में। सावन में वे अपने साले सारंगनाथ के साथ सारनाथ में विश्राम करते हैं।
  • भारतीय मिलिट्री की पहली रेजिमेंट की स्थापना काशी नरेश महाराज चेत सिंह जी ने अपने 18 घुड़सवारों से सन् 1974 में की थी। आज इस रेजिमेंट को भारत के राष्ट्रपति के अंगरक्षक के रूप में जाना जाता है।
  • पूरी दुनिया में क्वार (सितंबर-अक्तूबर) महीने में रामलीला होती है। वहीं मणिकर्णिका पर कार्तिक (अक्तूबर-नवंबर) में होती है। इस रामलीला में निकालने वाले विमान रावण कुंभकर्ण के पुतले भी गली से हिसाब से छोटे छोटे बनाए जाते।
  • काशी में अनोखे चिकित्सक हैं। जो केवल सुन कर दर्शन मात्र से रोगों का इलाज करते हैं। जैसे बुखार के इलाज के लिए ज्वरहरेश्वर महादेव के दर्शन, चेचक के इलाज के लिए मां शीतला के दर्शन, स्वप्न रोगों के लिए स्वप्नेश्वरी देवी के दर्शन, शक के रोग के इलाज के लिए शक्का देवी के दर्शन, निसंतान दंपतियों के लिए लोलार्केश्वर भगवान के दर्शन।
  • वैसे तो काशी में श्मशान भूमि पर चिता जलाने के लिए डोम राजा के प्रतिनिधि डोम ही कर लेने के बाद आग देते हैं, पर एक मोहल्ला ऐसा भी है जहां से जब कोई शव जाता है तो, वहां के निवासी अपने शव के लिए आग अपने मोहल्ले से ही ले जाते हैं। चिता को अग्नि देने से लेकर उसे जलाने तक का काम वो खुद ही करते हैं। ये मोहल्ला है, भदैनी।
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