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परेशानी: 5.56 करोड़ खर्च नहीं कर पाए, परिजनों से रूई तक बाहर से मंगाई; वाराणसी के सरकारी अस्पतालों का हाल

अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Aman Vishwakarma Updated Sun, 03 May 2026 02:52 PM IST
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सार

Varanasi News: वाराणसी के सरकारी अस्पतालों में इलाज मुफ्त होने के बावजूद मरीजों को कॉटन, बैंडेज, सर्जिकल सामान बाहर से खरीदना पड़ रहा है। 62.19 करोड़ के बजट में 5.56 करोड़ खर्च नहीं हो पाए। बीएचयू सहित कई अस्पतालों में यह समस्या आम है, हालांकि स्वास्थ्य विभाग पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध होने का दावा कर रहा है।

Unable Spend 5 Crore Even Cotton Had Sourced from Outside Relatives State of Government Hospitals in Varanasi
मंडलीय अस्पताल में मरीजों और तीमारदारों की भीड़। - फोटो : संवाद
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विस्तार

वाराणसी जिले के सरकारी अस्पतालों में इलाज मुफ्त मिल रहा है लेकिन मरीजों और उनके तीमारदारों को कॉटन बैंडेज, सर्जिकल ब्लेड और यहां तक कि टांका लगाने वाला धागा भी अस्पताल के बाहर स्थित निजी दुकानों से खरीदना पड़ रहा है। ऐसी स्थिति तब है जब बीएचयू समेत जिले के 17 अस्पतालों में सुविधाओं पर खर्च करने के लिए आए 62.19 करोड़ रुपये में से 5.56 करोड़ रुपये विभाग खर्च ही नहीं कर पाया। 

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कई गंभीर सर्जरी के मामलों में तो सर्जिकल किट और एनेस्थीसिया की दवाएं भी बाहर से मंगाना अब एक सामान्य प्रक्रिया बन गई है। बीएचयू, मंडलीय, जिला अस्पताल समेत कई सीएचसी-पीएचसी में यह स्थिति है। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि मरीजों को सभी सुविधाएं अस्पताल में उपलब्ध कराई जा रही हैं। बावजूद इसके मरीजों को सुविधाओं के लिए निजी मेडिकल स्टोर पर पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं। 
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जिला स्वास्थ्य समिति की फरवरी 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक जिले में अस्पतालों में सुविधाओं पर खर्च करने के लिए आए 62.19 करोड़ रुपये का बजट जारी किया गया था। प्रसव के दौरान बाहर से विक्रिल 2-0 (सीसीएन 2317), विक्रिल 1 नं. (2347), विक्रिल (2437), प्रोलीन 0 नं. के सूचर बाहर से ज्यादतर मंगाए जाते हैं।

केस 1 : सलारपुर के रहने वाले गोपाल ने अपनी पत्नी को प्रसव के लिए बीएचयू एमसीएच विंग में भर्ती कराया था। चिकित्सकों ने ऑपरेशन से 30 मिनट पहले उन्हें सादे पर्चे पर कुछ सामान लिखकर लाने को कहा। गोपाल ने तत्काल अस्पताल के बाहर स्थित मेडिकल स्टोर से 4870 रुपये का सामान खरीदा। इसमें दो ऑपरेशन में प्रयोग होने वाले टांके, तीन इंजेक्शन और एक कॉटन का बड़ा पैकेट शामिल था।

केस 2 : शिवपुर के विकास श्रीवास्तव का मार्च महीने में जिला अस्पताल में अपेंडिक्स का ऑपरेशन हुआ। शुरू में सब कुछ मुफ्त था, लेकिन ऑपरेशन के कुछ दिनों बाद टांका कटवाने के लिए उन्हें सर्जिकल ब्लेड और कुछ अन्य सामान बाहर से खरीदना पड़ा।

केस 3 : छित्तूपुर के रहने वाले रोहित केशरी ने कबीरचौरा स्थित महिला अस्पताल में अपनी पत्नी को प्रसव के लिए भर्ती कराया। ऑपरेशन से कुछ देर पहले महिला के पति से कुछ सामान मंगाया गया, जिसमें कॉटन, प्रोटीन पाउडर, दो डाइक्लोफेनेक इंजेक्शन समेत अन्य सामान थे, जिनकी कीमत 1050 रुपये थी।

सर्जिकल सामानों का नहीं है कोई निश्चित दाम
सर्जिकल सामानों का कोई निश्चित दाम नहीं है। कॉटन, बैंडेज एमआरपी के अलावा अलग-अलग दरों पर भी बाजार में बिकते हैं। जिसकी जितनी पहुंच, उसे उतना ही सस्ता सामान मिल रहा है। उदाहरण के लिए 200 ग्राम के कॉटन की एमआरपी 150 से 180 रुपये के बीच होती है, वहीं इसकी बिक्री 80-150 रुपये के बीच होती है। उसी प्रकार सर्जिकल ब्लेड अलग-अलग नंबर और साइज के अनुसार 10 से 35 रुपये में बिक रहे हैं।

अस्पतालों में सभी दवाएं और जरूरी सामान उपलब्ध कराए गए हैं। बहुत कम मामलों में कुछ दवाएं ऐसी होती हैं, जिन्हें बाहर से लिखा जाता है। उन दवाओं को भी अस्पतालों में उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है। - डॉ. एनडी शर्मा, अपर निदेशक, स्वास्थ्य विभाग

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