अमर उजाला पड़ताल: बारिश में झरना बना कैंट स्टेशन, प्लेटफार्म की छतों से टपका पानी; 40 यात्रियों की छूटी ट्रेन
Varanasi News: वाराणसी में बारिश के दौरान कैंट स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर झरने जैसा नजारा दिखा। यात्री भीगते हुए सिर पर बैग रखकर दौड़ते हुए प्लेटफार्म पर पहुंचे, फिर भी 40 यात्रियों की ट्रेन छूट गई।
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बारिश के दौरान सड़कों पर जलभराव की तस्वीरें अक्सर सामने आती हैं, लेकिन बृहस्पतिवार दोपहर हुई बारिश में कैंट रेलवे स्टेशन का नजारा बेहद चौंकाने वाला रहा। स्टेशन परिसर में प्लेटफॉर्मों की छत से इस तरह पानी टपक रहा था, मानो किसी झरने से पानी गिर रहा हो। पानी टपकने की समस्या लगभग सभी प्लेटफॉर्मों पर रही, लेकिन प्लेटफॉर्म नंबर 2-3 और 4-5 पर स्थिति ज्यादा खराब थी। उधर, प्लेटफॉर्म नंबर 5 से 10-11 तक जाने वाले रास्ते पर शेड न होने के कारण यात्रियों को भीगते हुए दौड़कर प्लेटफॉर्म तक पहुंचना पड़ा। तेज बारिश और फिसलन के कारण कई लोग गिरने से बाल-बाल बचे। इस अव्यवस्था के चलते 40 से अधिक यात्रियों की ट्रेन भी छूट गई।
कैंट रेलवे स्टेशन पर दोपहर करीब 1.50 बजे जब बारिश शुरू हुई, उस समय प्लेटफॉर्मों पर यात्रियों की भीड़ थी। लोग परिवार के साथ अलग-अलग स्थानों पर सामान लेकर बैठे थे। शुरुआत में हल्की बारिश हुई, लेकिन देखते ही देखते बारिश तेज हो गई और यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। हालात यह थे कि प्लेटफॉर्म नंबर 2-3 और 4-5 पर शेड कई जगह से क्षतिग्रस्त होने और दरारें पड़ने के कारण पानी तेजी से नीचे गिर रहा था। इससे कई स्थानों पर पानी जमा हो गया। लोग बारिश से बचने के लिए फुटओवर ब्रिज की सीढ़ियों के नीचे खड़े हो गए। प्लेटफॉर्म नंबर 5 पर, जहां गार्ड का डिब्बा खड़ा होता है, वहां सबसे अधिक पानी भर गया। यात्री उसी पानी से होकर आते-जाते दिखाई दिए।
जिन यात्रियों को काशी महाकाल एक्सप्रेस पकड़नी थी, उसके दोपहर दो बजे प्रस्थान की घोषणा हो रही थी। बारिश भी करीब 1.50 बजे शुरू हुई। प्लेटफॉर्म नंबर 10 तक पहुंचने का सीधा रास्ता प्लेटफॉर्म नंबर 5 से होकर जाता है। करीब 100 मीटर से अधिक दूरी तक वहां कोई शेड नहीं है। सामने ट्रेन खड़ी थी और उसके रवाना होने की घोषणा लगातार हो रही थी। ऐसे में बारिश से बचने के लिए महिला, पुरुष और बच्चों समेत कई यात्रियों को सिर पर बैग रखकर दौड़ना पड़ा। इसके बावजूद वे पूरी तरह भीग गए। कुछ लोगों की चप्पल टूट गई, तो कुछ को हाथ में चप्पल लेकर दौड़ना पड़ा। सबसे अधिक परेशानी बुजुर्गों और बच्चों को हुई, क्योंकि वे तेजी से नहीं चल पा रहे थे। हालांकि बारिश करीब आधे घंटे बाद थम गई, लेकिन तब तक काशी महाकाल एक्सप्रेस से यात्रा करने वाले 40 से अधिक यात्री ट्रेन छूटने के कारण वापस लौट आए। इनमें से कई यात्री भीगते हुए प्लेटफॉर्म नंबर 5 पर बैठकर अगली व्यवस्था का इंतजार करते रहे।
सर्कुलेटिंग एरिया में जलभराव ने बढ़ाई मुसीबत
आधे घंटे की बारिश ने कैंट रेलवे स्टेशन की व्यवस्थाओं की पोल खोल दी। सर्कुलेटिंग एरिया में मुख्य प्रवेश द्वार से लेकर पार्सल घर के गेट तक कई स्थानों पर पानी जमा हो गया। इससे पैदल आने-जाने वाले यात्रियों को काफी परेशानी हुई। बारिश के दौरान कुछ प्लेटफॉर्मों और पार्सल घर के पास खुले में रखा सामान भी भीग गया।
अधिकारी बोले
स्टेशन पर सात जुलाई को ही एडीआरएम के साथ निरीक्षण कर सभी प्लेटफॉर्मों पर उन स्थानों का जायजा लिया गया था, जहां से बारिश का पानी नीचे आ सकता है। जिन जगहों पर समस्या मिली, वहां संबंधित विभाग को मरम्मत कराने के निर्देश दिए गए हैं। जहां तक प्लेटफॉर्म नंबर 5 से 10 तक जाने वाले मार्ग पर शेड न होने का प्रश्न है, वहां शेड लगाने की प्रक्रिया भी संबंधित विभाग के माध्यम से शुरू करा दी गई है। -अर्पित गुप्ता, निदेशक, कैंट रेलवे स्टेशन