Varanasi News: सूर्य प्रताप बोले- वैज्ञानिक प्रगति किसानों तक पहुंचनी चाहिए, अन्नदाता सम्मानित; दी जानकारी
Varanasi News: कृषि मंत्री ने कहा कि इससे उत्पादकता, स्थिरता और किसानों की आय में बढ़ोतरी होगी। उन्होंने बीएचयू द्वारा ऐसे आयोजनों के माध्यम से शोध संस्थानों और किसानों के बीच की दूरी कम करने के प्रयासों की सराहना की।
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काशी हिंदू विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञान संस्थान में किसान मेले का आयोजन किया गया। बतौर मुख्य अतिथि यूपी सरकार के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि कृषि क्षेत्र को सशक्त बनाने में नवाचार और किसानों की भागीदारी बहुत अहम है। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक प्रगति किसानों तक जमीनी स्तर पर पहुंचाना चाहिए। इस दौरान प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया गया।
कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने वैज्ञानिक अनुसंधान को किसानों के व्यावहारिक ज्ञान के साथ जोड़ने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसानों के पास खेतों से जुड़ा अमूल्य अनुभव होता है और उन्हें कृषि नवाचार में साझेदार के रूप में मान्यता दी जानी चाहिए। प्रो. अमित पात्रा निदेशक आईआईटी (बीएचयू) ने बताया कि तकनीकी नवाचार और संस्थानों के बीच शोध साझेदारी आधुनिक कृषि चुनौतियों का समाधान करने और उत्पादकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण है।
पद्मश्री चंद्र शेखर सिंह ने प्रगतिशील खेती और जमीनी स्तर पर नवाचार से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने किसानों को नई तकनीकों को अपनाने के साथ पारंपरिक ज्ञान को भी संरक्षित रखने के लिए प्रेरित किया। प्रो. उदय प्रताप सिंह निदेशक कृषि विज्ञान संस्थान ने बताया कि ऐसे आयोजन आधुनिक कृषि तकनीकों, उन्नत किस्मों और सतत कृषि पद्धतियों को किसानों तक पहुंचाने में सहायक होते हैं। संयोजक प्रो. पीके ने धन्यवाद ज्ञापित कर किया।
संसाधनों के कुशल उपयोग टिकाऊ कृषि पद्धति पर जोर
अंतरराष्ट्रीय धान अनुसंधान संस्थान दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र (आइसार्क) ने इंडियन काउंसिल फॉर रिसर्च ऑन इंटरनेशनल इकोनॉमिक रिलेशंस के सहयोग से इरी में दो दिवसीय नीति संवाद कार्यक्रम का आयोजन हुआ। इसमें विशेषज्ञों ने संसाधनों के कुशल उपयोग और टिकाऊ कृषि पद्धति पर जोर दिया।
इंडियन काउंसिल फॉर रिसर्च ऑन इंटरनेशनल इकोनॉमिक रिलेशंस डॉ. अशोक गुलाटी ने कहा कि विश्व के प्रमुख धान उत्पादक और निर्यातक देश के रूप में भारत के पास ऐसे नवाचारपूर्ण नीतिगत उपाय अपनाने का अवसर है। आर्थिक सलाहकार डॉ. केवी राजू ने कहा कि वैज्ञानिक रूप से परीक्षण किए गए अवरोधों की पहचान से सरकारों को क्षेत्रीय स्तर पर धान नीतियों के पुनर्गठन में सहायता मिल सकती है।
प्रमुख सचिव कृषि रविंदर ने कहा कि कृषि नीति निर्माण एक जटिल प्रक्रिया है। डॉ. सुखपाल सिंह, अध्यक्ष, पंजाब राज्य किसान कृषि श्रमिक आयोग, सौम्या श्रीवास्तव कृषि विशेषज्ञ विश्व बैंक, डॉ. परेश वर्मा महानिदेशक फेडरेशन ऑफ सीड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया, डॉ. सुधांशु सिंह, निदेशक, आइसार्क और डॉ. वीरेंद्र कुमार अनुसंधान निदेशक इरी रहे।