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UP: मोक्ष प्राप्ति के लिए बेटे के साथ काशी आए थे मां-बाप, होम स्टे में मां और बेटे की खुदकुशी में बड़ा खुलासा

Wed, 12 Aug 2026 12:17 PM IST
Sharukh Khan अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी Published by: Sharukh Khan Updated Wed, 12 Aug 2026 12:17 PM IST
सार

वाराणसी सुसाइड केस में बड़ा खुलासा हुआ है। पिता के निधन के बाद होम स्टे में खुदकुशी करने वाले मां और बेटे को लेकर चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। महाराष्ट्र से मुखर्जी परिवार मोक्ष प्राप्ति के लिए काशी आया था।

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Varanasi three suicide Parents had come to Kashi with their son seeking salvation
varanasi suicide - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

वाराणसी के होम स्टे में दंपती और बेटे की मौत मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। महाराष्ट्र के रायगढ़ से मुखर्जी परिवार काशी में मोक्ष प्राप्ति के लिए आया था। गंभीर बीमारी से ग्रसित पिता विशाल मुखर्जी की अंतिम इच्छा थी कि वह काशी में ही दम तोड़े। मां जया मुखर्जी भी मानसिक रूप से अस्वस्थ थी। 
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पिता की मौत होने के बाद बेटे ईशान मुखर्जी और मां जया मुखर्जी ने विषाक्त पदार्थ खाकर जान दे दी। परिवार पर काफी कर्ज था और 10 लाख का विशाल ने लोन ले रखा था। होम स्टे में आने के बाद ही कर्मचारियों से उसने पीड़ा व्यक्त की थी। 
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लक्सा पुलिस ने रायगढ़ पुलिस से संपर्क साधा। वाची होम स्टे में सोमवार को सुसाइड करने वाले मां-बेटे, पिता के शव को शिवपुर मोच्यूरी में रखा गया है। लक्सा पुलिस के अनुसार, अभी तक किसी भी रिश्तेदार या परिजन से संपर्क नहीं हो सका है। 
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महाराष्ट्र की रायगढ़ पुलिस को आधार कार्ड समेत अन्य विवरण भेजे गए हैं। एसीपी दशाश्वमेध अतुल अंजान ने बताया कि परिजनों या किसी रिश्तेदार के पहुंचने पर शवों का पोस्टमार्टम कराया जाएगा। कोई नहीं आता है तो फिर 72 घंटे पूरे होने पर पुलिस पोस्टमार्टम कराएगी। जांच में आया कि पिता की पहले मौत हुई। उसके बाद मां-बेटे कमरे पर पहुंचे और जहर खाकर जान दी।

 

5 साल में 30 लोगों ने मोक्ष के लिए मौत को लगाया गले 
काशी में मोक्ष की प्राप्ति के लिए मुमुक्ष भवन बना हुआ। पिछले पांच साल में दक्षिण भारत समेत महाराष्ट्र के 30 लोगों ने यहां मौत को गले लगाया है। कोई फंदे पर लटका तो कोई गंगा में कूदा। परिवार के साथ आए लोगों ने जहर खाकर काशी में जान दी है। 

 

पुलिस आंकड़ों के अनुसार, फरवरी में हैदराबाद सिकंदराबाद के सीताफल सब्जी मंडी के रहने वाले सगे भाई-बहन ने कैंट स्टेशन के सामने होटल सिटी इन में नशीली दवाएं खाकर जान दे दी थी। 

बड़ी बहन की तेरहवीं के दिन ही दोनों ने कदम उठाया। सितंबर 2024 में सोनारपुरा के आंध्रा आश्रम में पी लक्ष्मी नारायण, पी लोक विनोक ने फंदे से लटक जान दे दी थी। दोनों वेस्ट गोदावरी के थे। 5 दिसंबर 2025 में दिल्ली के कारोबारी सुरेंद्र ने दशाश्वमेध घाट से गंगा में छलांग लगाकर जान दे दी थी। 

यह था पूरा मामला
वाराणसी के लक्सा थाना क्षेत्र के वाची होम स्टे में ठहरे मां-बेटे (जया मुखर्जी और ईशान मुखर्जी) ने सोमवार की रात जहर खाकर जान दे दी। पुलिस के मुताबिक एक दिन पहले महिला के पति विशाल मुखर्जी का बीमारी से निधन हो गया था। पति का अंतिम संस्कार भी नहीं किया और दुखी होकर दोनों ने जान दे दी। परिवार महाराष्ट्र से तीन दिन पहले ही काशी दर्शन-पूजन के लिए आया था। होम स्टे से जहर के पैकेट मिले हैं। लक्सा पुलिस और फॉरेंसिक टीम ने छानबीन की। काशी जोन के एडीसीपी वैभव बांगर और एसीपी दशाश्वमेध अतुल अंजान ने होम स्टे के मैनेजर व कर्मियों से पूछताछ की है। 

 

महाराष्ट्र के रायगढ़ निवासी विशाल मुखर्जी (55), उनकी पत्नी जया (51) और बेटा ईशान (27) सात अगस्त को काशी आए थे। लक्सा थाना क्षेत्र के वाची होम स्टे में कमरा बुक कराया। तीनों ने पहले दिन काशी दर्शन किए और फिर आकर कमरे में ठहर गए।

 

एडीसीपी ने बताया कि रविवार की रात अचानक कमरे में विशाल मुखर्जी की तबीयत बिगड़ गई तो होम स्टे के कर्मचारियों और पुलिस की मदद से उन्हें बीएचयू के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। 

 

कमरे में बेड पर पड़े थे मां-बेटे
दोनों उनके शव को पोस्टमार्टम हाउस में रखवाकर होम स्टे में चले गए। सोमवार की सुबह कमरे का दरवाजा नहीं खुला तो इसकी सूचना पुलिस को दी गई। पुलिस पहुंची तो दरवाजा किसी तरह खोला गया। पुलिस ने देखा कि मां-बेटे कमरे में बेड पर पड़े थे।
 

दोनों के मुंह से झाग निकला था और उल्टी भी की थी। पुलिस दोनों को मंडलीय अस्पताल ले गई, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। फॉरेंसिक टीम ने दोनों के मोबाइल भी कब्जे में लिए हैं। 

एसीपी दशाश्वमेध अतुल अंजान ने बताया कि छानबीन में सामने आया कि विशाल मुखर्जी की आर्थिक स्थिति भी ठीक नहीं थी। मोबाइल पर आए परिचितों के फोन कॉल से यह जानकारी हुई। विशाल ने लोन भी ले रखा था। जया की भी तबीयत ठीक नहीं रहती थी। 
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