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Varanasi Weather: तापमान बढ़ते ही बर्न वार्ड फुल, मंडलीय अस्पताल में 25 मरीज भर्ती; तीन चिकित्सकों की ड्यूटी

अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Aman Vishwakarma Updated Wed, 29 Apr 2026 06:06 AM IST
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सार

Varanasi News: वाराणसी में भीषण गर्मी का असर दिखने लगा है। मंडलीय, जिला अस्पताल में मरीजों को लेकर सीएमओ ने व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के निर्देश दिए हैं। यहां सभी के शरीर का तापमान मेंटेन रखते हुए सिल्वर नाइट्रेट लगाया जा रहा है।

Varanasi Weather Burn Ward Reaches Full Capacity as Temperatures Soar 25 Patients Admitted Divisional Hospital
मंडलीय अस्पताल में मरीजों और तीमारदारों की भीड़। - फोटो : संवाद
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विस्तार

Varanasi Weather: जिले में 40 डिग्री से अधिक तापमान बढ़ते ही अस्पतालों में जलने के केसे भी आने लगे हैं। आम दिनों में खाली रहने वाला मंडलीय अस्पताल इस समय मरीजों से भर गया है। यहां कुल 25 मरीज भर्ती हैं जिनका अस्पताल में इलाज चल रहा है। इनमें करीब 70 फीसदी युवा हैं, जिनकी उम्र 20 से 45 वर्ष के बीच है। 

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अस्पताल के स्किन रोग विशेषज्ञ डॉ. रवि सिंह बताते हैं कि इन मरीजों में गैस सिलिंडर से झुलसे, खेतों में आग बुझाने में जले, बिजली शॉट सर्किट से घायल समेत कई लोग भर्ती हैं। अस्पताल में शिफ्टवार तरीके से तीन चिकित्सकों और अन्य मेडिकल स्टाफ की ड्यूटी लगाई गई है। सभी के शरीर का तापमान मेंटेन रखते हुए सिल्वर नाइट्रेट लगाया जा रहा है। इसके अलावा गंभीर रूप से घायल मरीजों को एंटीबायोटिक इंजेक्शन देकर भी ठीक किया जा रहा है।

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केवल मंडलीय अस्पताल में बर्न के मरीजों के लिए व्यवस्था
जिले में बर्न के मरीजों के इलाज के लिए केवल मंडलीय अस्पताल में 25 बेड का बर्न वार्ड बनाया गया है। इसके अलावा बीएचयू में सात बेड का वार्ड बनाया गया है लेकिन आपात स्थिति में मरीजों को बेड भी नहीं मिल पाता है। इसके बाद मरीजों को प्राइवेट अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता है। वहीं मंडलीय अस्पताल में बीते 10 वर्षों से प्लास्टिक सर्जन की कमी चल रही है। मंडलीय अस्पताल में भर्ती मरीजों को प्लास्टिक सर्जन की आवश्यकता पड़ते ही उन्हें बीएचयू के लिए रेफर कर दिया जाता है।

बर्न के मरीजों के लिए अस्पताल में सभी सुविधाएं मौजूद हैं। तापमान मेंटेंन रखने से लेकर दवाएं पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। अस्पताल से केवल उन मरीजों को रेफर किया जाता है जिन्हें प्लास्टिक सर्जरी की आवश्यकता होती है। - डॉ. बृजेश कुमार, एसआईसी, मंडलीय अस्पताल।

आग से जलने पर क्या करें

  • जले हुए हिस्से पर तुरंत ठंडा पानी (नल का पानी) तब तक डालें जब तक जलन कम न हो जाए (कम से कम 10-15 मिनट)।
  • यदि जले हुए हिस्से पर कोई कपड़ा, अंगूठी, घड़ी या गहने हैं, तो उन्हें सूजन आने से पहले सावधानीपूर्वक उतार दें।
  • प्राथमिक उपचार के बाद घाव को एक साफ, सूखे और चिपचिपा न होने वाले कपड़े (जैसे मलमल का कपड़ा या स्टरलाइज्ड गेज) से ढीला ढंक दें।
  • यदि मरीज होश में है, तो उसे ओआरएस का घोल, पानी या तरल पदार्थ पिलाएं ताकि शरीर में पानी की कमी न हो।
  • यदि जलन का क्षेत्र बड़ा है, चेहरा, हाथ या जोड़ जले हैं, तो तुरंत अस्पताल जाएं।

क्या न करें

  • जले हुए स्थान पर कभी भी सीधे बर्फ न रगड़ें। इससे रक्त संचार रुक सकता है और त्वचा के ऊतक डैमेज हो सकते हैं।
  • अक्सर लोग जले पर टूथपेस्ट, मक्खन, घी या तेल लगा देते हैं। यह सबसे बड़ी गलती है। ये चीजें गर्मी को त्वचा के अंदर ही रोक देती हैं और संक्रमण का खतरा बढ़ा देती हैं।
  • यदि कपड़ा जलकर त्वचा से चिपक गया है, तो उसे जबरदस्ती न खींचें। केवल आस-पास का कपड़ा काट दें और डॉक्टर की मदद लें।
  • घाव पर सीधी रुई कभी न रखें, क्योंकि इसके रेशे घाव में चिपक जाते हैं और बाद में ड्रेसिंग निकालते समय असहनीय दर्द और चोट देते हैं।
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