वैशाली जिले के गरौल में सड़क पर बुजुर्ग महिला का अंतिम संस्कार किए जाने की घटना के बाद प्रशासन हरकत में आ गया है। जिलाधिकारी वर्षा सिंह और पुलिस अधीक्षक विक्रम सिहाग गुरौल पहुंचे और घटनास्थल का निरीक्षण किया। यह घटना बुधवार को सामने आई थी, जब एक महादलित परिवार ने बीच चौराहे पर दाह संस्कार किया था।
श्मशान घाट का रास्ता बंद होने का आरोप
यह मामला गरौल थाना क्षेत्र के सोन्धो अंधारी गांव का है, जहां 91 वर्षीय झपकी देवी का अंतिम संस्कार सड़क पर किया गया। परिजनों का आरोप है कि श्मशान घाट जाने वाली सड़क पर अतिक्रमण कर लिया गया था और दुकानदारों ने शव ले जाने से मना कर दिया। इसी के विरोध में आक्रोशित परिजनों और स्थानीय लोगों ने बीच सड़क पर ही दाह संस्कार कर दिया।
परिजनों का दर्द और मजबूरी
मृतका के पुत्र बबीतन मांझी ने बताया कि वे अपनी मां का शव लेकर श्मशान घाट जा रहे थे, लेकिन रास्ता बंद होने के कारण आगे नहीं बढ़ पाए। साथ चल रहे लोगों के सुझाव पर मजबूरी में सड़क पर ही अंतिम संस्कार करने का फैसला लिया गया। घटना के दौरान आसपास के लोग भी बड़ी संख्या में जुट गए।
पुलिस की मौजूदगी, पर नहीं हुआ हस्तक्षेप
घटना की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन परिजनों और स्थानीय लोगों के भारी आक्रोश को देखते हुए पुलिस मूकदर्शक बनी रही। यह मामला महादलित समुदाय से जुड़ा होने के कारण इलाके में नाराजगी और संवेदनशीलता और बढ़ गई।
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जांच समिति गठित, 24 घंटे में रिपोर्ट का आदेश
घटना के बाद जिलाधिकारी वर्षा सिंह के निर्देश पर एक जांच समिति का गठन किया गया है। महुआ के एसडीओ, डीएसपी और गोरौल के बीडीओ को मामले की जांच सौंपी गई है। दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की बात कही गई है और जांच रिपोर्ट 24 घंटे के भीतर मांगी गई है।
स्थायी समाधान की उठी मांग
स्थानीय लोगों का कहना है कि श्मशान घाट का रास्ता लंबे समय से बंद है, जिससे अंतिम संस्कार में लगातार बाधा आ रही है। यह घटना सोनधो वास्देव गांव से शव लेकर मुबारकपुर के मांझी टोला के पास दाह संस्कार के लिए जाते समय हुई थी, जिसने प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।