बिहार की काशी कहे जाने वाले बाबा उमानाथ मंदिर और उसके नाम पर कथित भ्रष्टाचार एक बार फिर सवालों के घेरे में है। माघी पूर्णिमा के अवसर पर बीते शनिवार और रविवार को उमानाथ घाट पर स्नान करने आए श्रद्धालुओं से प्रति व्यक्ति सौ–सौ रुपये की अवैध वसूली का मामला सामने आया है। इस सैरात वसूली ने मंदिर प्रबंधन, पुजारी और प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
उमानाथ मंदिर की सचिव कनक कुमारी ने इस वसूली को पूरी तरह अवैध बताते हुए कहा कि माघी पूर्णिमा के दिन न्यास समिति द्वारा गठित किसी भी अधिकृत कमेटी के माध्यम से सैरात की वसूली नहीं कराई जा रही थी। उन्होंने आरोप लगाया कि यह अवैध वसूली उमानंद भारती और उसके समर्थकों द्वारा की गई। अवैध रूप से कितनी राशि वसूली गई, इसका कोई लेखा-जोखा नहीं है और वसूली करने वाले लोग समिति को किसी तरह की जानकारी भी नहीं देते।
लाखों रुपये की अवैध वसूली होने की आशंका
कनक कुमारी का आरोप है कि जब वे या अन्य लोग मौके पर विरोध करते हैं तो वसूली करने वाले लोग मारपीट पर उतारू हो जाते हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि एक पूर्व विधायक के संरक्षण में वर्षों से यह नाजायज कमाई का खेल चल रहा है। माघी पूर्णिमा के दौरान लाखों रुपये की अवैध वसूली होने की आशंका है। उन्होंने कहा कि वे इस मामले की शिकायत पहले भी उमानाथ समिति के अध्यक्ष सह अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) से कर चुकी हैं और अब दोबारा शिकायत करेंगी।
उन्होंने स्पष्ट किया कि समिति के महंथ निगमानंद भारती का इस अवैध वसूली या दबंगई से कोई लेना-देना नहीं है। माघी पूर्णिमा के दौरान वसूली गई राशि का न तो कोई हिसाब है और न ही उसे किसी खाते में जमा कराया गया है, इसलिए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
उधर, माघी पूर्णिमा के दौरान दो दिनों तक वाहनों से की जा रही अवैध वसूली को लेकर प्रशासन की कड़ी आलोचना हुई थी। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए करीब डेढ़ दर्जन युवकों को जेल भेजा। नगर परिषद के अनुसार, माघी पूर्णिमा को लेकर 25 लोगों को दो दिनों के लिए दैनिक भुगतान पर रखा गया था, लेकिन फर्जी आई-कार्ड के सहारे लगभग 50 से 60 युवक वसूली में लगे हुए थे, जिनके पास फर्जी रसीदें भी थीं।
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दो लाख 80 हजार रुपये ही सैरात जमा हुआ
नगर परिषद के आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्ष कार्तिक पूर्णिमा में लगभग दो लाख रुपये और माघी पूर्णिमा में लगभग साढ़े चार लाख रुपये सैरात के रूप में वसूले गए थे, जबकि इस वर्ष कार्तिक पूर्णिमा में करीब 50 हजार रुपये और माघी पूर्णिमा में लगभग दो लाख 80 हजार रुपये ही सैरात जमा हुआ। यह राशि पिछले वर्ष की तुलना में लगभग आधी है। स्थानीय लोगों के अनुसार इसके दो प्रमुख कारण माने जा रहे हैं। एक, लगातार घटनाओं के कारण श्रद्धालुओं की संख्या में कमी और दूसरा, बड़े पैमाने पर अवैध वसूली।
कई पदाधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध
इस पूरे मामले में कई पदाधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध बताई जा रही है। हैरानी की बात यह है कि घटना के सात दिन बीत जाने के बावजूद उमानाथ घाट पर हुई अवैध वसूली को लेकर कोई ठोस जांच या कार्रवाई नहीं की गई है। मामले पर अनुमंडल पदाधिकारी गरिमा लोहिया और एसडीपीओ आनंद कुमार सिंह ने चुप्पी साध रखी है। एसडीपीओ ने कोई जानकारी साझा करने से इनकार किया, जबकि एसडीओ ने व्हाट्सएप संदेशों का भी जवाब नहीं दिया।
प्रशासनिक कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति किए जाने के आरोप लग रहे हैं, जबकि त्योहार के नाम पर हो रही अवैध वसूली कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है। उधर, नगर परिषद की कार्यपालक पदाधिकारी कुमारी हिमानी ने बताया कि माघी पूर्णिमा के दौरान आने वाली गाड़ियों और नगर परिषद क्षेत्र की दुकानों से नियमानुसार सैरात वसूला गया था।