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Punjab Governor Gulab Chand Kataria issued a clarification regarding his statement on Maharana Pratap.
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पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने महाराणा प्रताप पर दिए बयान पर दिया स्पष्टीकरण
पंजाब के राज्यपाल और चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने महाराणा प्रताप पर दिए अपने बयान पर स्पष्टीकरण जारी दिया है। सोमवार को एक वीडियो जारी करते हुए गुलाब चंद कटारिया ने कहा कि उनके शब्दों को गलत संदर्भ में पेश किया गया है। उन्होंने लोगों से अपील की कि कोई भी राय बनाने से पहले उनका पूरा भाषण सुना जाए। महाराणा प्रताप के प्रति उनके मन में अगाध श्रद्धा, आस्था और विश्वास है। कटारिया ने स्पष्ट किया कि उनका मकसद महाराणा प्रताप के सम्मान को कम करना नहीं, बल्कि उनकी शौर्य गाथा को विश्व स्तर पर स्थापित करने के प्रयासों के बारे में बताना था। अगर फिर भी किसी को बुरा लगा हैं तो वह क्षमा चाहते हैं।
राज्यपाल ने अपने राजनीतिक सफर का हवाला देते हुए कहा कि जब वे 33 साल की उम्र में पहली बार विधायक बने थे, तब से ही वे महाराणा प्रताप के जीवन को घर-घर पहुंचाने के लिए प्रयासरत हैं। उन्होंने बताया कि साल 1977 से 1980 के बीच उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री (भरत सिंह) से अनुरोध कर पहली बार 'मेवाड़ कॉम्प्लेक्स योजना' मंजूर करवाई थी। इसी योजना के कारण आज कुंभलगढ़, गोगुंदा, चावंड और हल्दीघाटी जैसे ऐतिहासिक स्थलों का विकास संभव हो पाया है। उन्होंने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि 1947 से 1977 तक रही कांग्रेस सरकारों ने महाराणा प्रताप की विरासत को ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए कोई ठोस काम नहीं किया था।
कटारिया ने अपने बयान में इस्तेमाल किए गए शब्द 'हमने प्रताप को जिंदा किया' पर सफाई देते हुए कहा कि इसका भाव महाराणा प्रताप की गाथा को दुनिया के कोने-कोने तक पहुंचाने से था। उन्होंने कहा कि दिल्ली, गुजरात, बंगाल सहित पूरे देश में महाराणा प्रताप की प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं, जो हमारी सरकार के प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने आंकड़े साझा करते हुए बताया कि वर्तमान सरकार ने भी बजट में महाराणा प्रताप से संबंधित स्थलों के विकास के लिए 175 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है। उन्होंने कहा कि अगर उनके किसी शब्द से किसी की भावनाओं को ठेस पहुंची है, तो वे स्पष्ट करना चाहते हैं कि उनका उद्देश्य केवल सम्मान बढ़ाना था।
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