बालोद जिले के राजहरा नगर अंतर्गत खान व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्र परिसर से एक बेहद हैरान और डराने वाली खबर सामने आ रही है। बरसों से हजारों चमगादड़ों का सुरक्षित बसेरा रहे इस परिसर में पिछले लगभग एक सप्ताह से रोजाना सैकड़ों की संख्या में चमगादड़ों की रहस्यमय मौत हो रही है। हालात इतने बदतर हैं कि मृत चमगादड़ों को परिसर के भीतर ही केमिकल छिड़ककर आग के हवाले किया जा रहा है, जिससे पूरा इलाका भारी बदबू की चपेट में है। अभी भी पेड़ों से बारी-बारी कर चमगादड़ नीचे गिर रहे हैं और उनके अवशेष जमीन पर बिखरे पड़े हैं।प्रारंभिक तौर पर मौत की वजह भीषण गर्मी बताई जा रही है, लेकिन एक ही पर्टिकुलर जगह पर इतनी बड़ी तादाद में मौतें किसी बड़ी और गंभीर समस्या की ओर इशारा कर रही हैं।
डीएफओ पहुंचे मौके पर, दी बड़ी चेतावनी
पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए बालोद वन मंडल अधिकारी (DFO) अभिषेक अग्रवाल खुद अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने स्थिति का बारीकी से निरीक्षण किया और स्थानीय लोगों को इस जगह से दूर रहने की सख्त हिदायत दी है। डीएफओ अभिषेक अग्रवाल ने बताया कि ऐसी घटनाएं पहले कांकेर और कोरबा में भी सामने आ चुकी हैं। चमगादड़ों में जिस तरह के लक्षण दिख रहे हैं, वह किसी गंभीर संक्रमण की ओर इशारा करते हैं। यह संक्रमण इंसानों में भी फैलने में सक्षम है, इसलिए सतर्कता बेहद जरूरी है। गर्मी पूरे क्षेत्र में एक जैसी है, लेकिन सिर्फ इसी एक आशियाने में मौतें होना चिंताजनक है। हमने मृत चमगादड़ों के सैंपल लेकर भोपाल के राष्ट्रीय संस्थान में जांच के लिए भेज दिए हैं। रिपोर्ट आने के बाद ही असली वजह साफ हो पाएगी।
बरसों पुराना आशियाना, पहली बार ऐसा संकट
आपको बता दें कि यह खान व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्र के पीछे पेड़ों की एक लंबी श्रृंखला है, जहां दशकों से हजारों चमगादड़ बिना किसी परेशानी के रह रहे थे। इलाके के बुजुर्गों का भी कहना है कि इतने वर्षों में पहली बार ऐसा खौफनाक नजारा देखने को मिला है। घटना के बाद से पूरे क्षेत्र के ग्रामीणों में चिंता और दहशत का माहौल है।
बीएसपी प्रबंधन ने साधी चुप्पी, पर जांच शुरू
चमगादड़ों की लगातार हो रही मौतों और बढ़ते दबाव के बाद अब प्रशासन पूरी तरह एक्टिव हो चुका है। यह परिसर भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) के अधीन आता है, इसलिए बीएसपी प्रबंधन के जनरल मैनेजर (GM) ने भी पूरे मामले को लेकर आंतरिक जांच के निर्देश जारी कर दिए हैं। हालांकि, संवेदनशीलता को देखते हुए प्रबंधन के अधिकारियों ने ऑन-कैमरा कुछ भी बोलने से साफ इनकार कर दिया है। अब देखना होगा कि भोपाल से आने वाली जांच रिपोर्ट में क्या खुलासा होता है, तब तक वन विभाग और स्थानीय प्रशासन पूरी मुस्तैदी से नजर बनाए हुए है।