बालोद जिले में गिरते परीक्षा परिणामों के आधार पर आठ प्राचार्यों के निलंबन और 14 अन्य की वेतन वृद्धि रोकने का मामला अब तूल पकड़ चुका है। छत्तीसगढ़ शिक्षक फेडरेशन ने इस प्रशासनिक कार्रवाई को 'नियमों को ताक पर रखकर की गई कार्रवाई' बताया है। फेडरेशन के पदाधिकारियों ने कलेक्ट्रेट का घेराव किया।
फेडरेशन के प्रांताध्यक्ष राजेश चटर्जी ने कहा कि निलंबन की यह पूरी प्रक्रिया दोषपूर्ण है। उन्होंने बताया कि प्राचार्य वर्ग-1 के अधिकारी होते हैं। नियमानुसार कलेक्टर को केवल वर्ग-3 और वर्ग-4 के कर्मचारियों पर कार्रवाई का अधिकार है। प्राचार्यों के विरुद्ध कार्रवाई के लिए आयुक्त (शिक्षा विभाग) को अनुशंसा भेजी जानी चाहिए थी। फेडरेशन ने आरोप लगाया कि बिना कारण बताओ नोटिस और बिना पक्ष सुने की गई यह कार्रवाई अलोकतांत्रिक है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह विवाद अब स्थानीय न रहकर प्रदेश स्तर पर व्यापक हो चुका है।
बुनियादी ढांचे की कमी का आरोप
फेडरेशन ने जिला प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि स्कूलों के खराब परिणाम के लिए केवल प्राचार्य जिम्मेदार नहीं हैं। कई प्राथमिक स्कूलों में केवल दो शिक्षक पदस्थ हैं, जिससे बुनियादी शिक्षा कमजोर होती है। फेडरेशन ने गैर-शैक्षणिक कार्यों का भी उल्लेख किया। शिक्षकों और छात्रों का उपयोग अक्सर सरकारी आयोजनों में भीड़ बढ़ाने के लिए किया जाता है, जिससे पढ़ाई प्रभावित होती है और गुणवत्ता गिरती है।
कार्रवाई शून्य करने की मांग
प्रदेश शिक्षक फेडरेशन के जिलाध्यक्ष राधेश्याम साहू ने कहा कि तुलनात्मक अध्ययन के नाम पर शिक्षकों का उत्पीड़न किया जा रहा है। उन्होंने बिना पक्ष सुने वेतन वृद्धि रोकने और निलंबन करने को 'गधा चरण' कार्रवाई बताया। फेडरेशन ने मांग की है कि इस निलंबन आदेश को तत्काल प्रभाव से शून्य किया जाए। अन्यथा आंदोलन को और तेज किया जाएगा।पदाधिकारियों ने कलेक्टर से मुलाकात कर अपना ज्ञापन सौंपा है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि प्रशासन अपनी इस गलत कार्रवाई पर सकारात्मक पहल करते हुए इसे वापस लेगा।