दुर्ग में शारीरिक अक्षमताएं संकल्प सिद्धि की राह में बाधा नहीं बनतीं, यह एक बार फिर साबित हुआ है। दुर्ग जिले के बहुविकलांग गौकरण, जो बोल व सुन नहीं सकते और जिनके दोनों हाथ नहीं हैं, अपनी अनोखी चित्रकारी के कारण चर्चा में हैं। उनकी असाधारण प्रतिभा को पहचानते हुए भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें 26 जनवरी के गणतंत्र दिवस समारोह के अवसर पर राष्ट्रपति भवन में चाय और भोजन के लिए आमंत्रित किया है। यह आमंत्रण गौकरण और उनके परिवार के लिए अत्यंत गर्व का क्षण है।
पैरों से चित्रकारी, बुलंद हौसला
गौकरण का बचपन से ही बहुविकलांग होना उनके हौसले को पस्त नहीं कर सका। उन्होंने अपने पैरों को ही अपने कला के माध्यम के रूप में चुना। परिवार के पूर्ण सहयोग से उन्होंने प्रयास मूकबधिर स्कूल से स्कूली शिक्षा प्राप्त की और उत्तर प्रदेश के चित्रकूट से मास्टर ऑफ फाइन आर्ट की डिग्री हासिल की। इसके बाद, उन्होंने अपने पैरों से अद्भुत पेंटिंग और ड्राइंग बनाना शुरू कर दिया। उनकी कलाकृतियों में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, छत्तीसगढ़ की राज्यपाल अनसुईया उइके और अमिताभ बच्चन जैसी हस्तियों के चित्र शामिल हैं, जिन्हें उन्होंने न केवल बनाया बल्कि उनसे सराहना भी प्राप्त की।
रोजमर्रा के कार्य और भविष्य की इच्छाएं
गौकरण अपने दैनिक कार्य अपने पैरों के सहारे ही करते हैं। वे रायपुर में मूकबधिर स्कूल के बच्चों को पढ़ा भी रहे हैं। घर वालों पर बोझ न बनकर वे आत्मनिर्भरता का एक मिसाल पेश कर रहे हैं। उनकी एक खास इच्छा है कि वे अक्षय कुमार और सोनू सूद से मिलें। इस इच्छा को उन्होंने अपने मोबाइल पर पैरों से व्हाट्सएप पर टाइप करके व्यक्त किया है। उनकी पेंटिंग इतनी जीवंत होती हैं कि उन्हें देखकर लोग चकित रह जाते हैं। राष्ट्रपति भवन से आमंत्रण पत्र मिलने के बाद, गौकरण 24 जनवरी को अपने परिवार के साथ दिल्ली जाने की तैयारी कर रहे हैं। यह आमंत्रण उनकी असाधारण प्रतिभा और अटूट संकल्प का प्रमाण है।