जीपीएम जिले की सबसे ऊंची चोटी राजमेरगढ़ मानसून के मौसम में पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गई है। समुद्र तल से लगभग 1100 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह स्थल 'रूफ ऑफ जीपीएम' के नाम से भी जाना जाता है। यहां से सूर्योदय और सूर्यास्त का मनमोहक दृश्य देखने दूर-दूर से पर्यटक आते हैं। बारिश में यहां का नजारा किसी हिल स्टेशन से कम नहीं होता।
मानसून के दौरान राजमेरगढ़ की वादियां घने बादलों और धुंध में लिपटी रहती हैं। बादल कभी घाटियों में तैरते तो कभी तेज हवाओं के साथ पहाड़ियों को छूते हुए ऊपर उठते दिखते हैं। यह दृश्य ऐसा लगता है मानो बादल धरती पर उतर आए हों। चारों ओर हरियाली, ऊंचे साल के वृक्ष, ठंडी हवाएं और प्राकृतिक शांति पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देती है।
प्राकृतिक सौंदर्य के कारण हर वर्ष बड़ी संख्या में प्रकृति प्रेमी, फोटोग्राफर, ट्रैकिंग के शौकीन और युवा यहां पहुंचते हैं। कई पर्यटक राजमेरगढ़ में कैंपिंग कर टेंट में रात्रि विश्राम का आनंद लेते हैं। सूर्योदय और सूर्यास्त के दृश्य यहां की खूबसूरती बढ़ाते हैं।
राजमेरगढ़ केवल प्राकृतिक सौंदर्य तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अपनी समृद्ध जैव विविधता और स्थानीय बैगा संस्कृति के लिए भी जाना जाता है। यहां ट्रेकिंग, नेचर वॉक और कैंपिंग जैसी गतिविधियां इको-टूरिज्म को बढ़ावा दे रही हैं। यह स्थल धीरे-धीरे प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में अपनी पहचान बना रहा है।
पर्यटन की दृष्टि से यहां अभी भी कई मूलभूत सुविधाओं और अधोसंरचना के विकास की आवश्यकता है। वर्तमान में विभिन्न निर्माण एवं विकास कार्य जारी हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि इन कार्यों के पूर्ण होने के बाद राजमेरगढ़ में पर्यटकों की संख्या और अधिक बढ़ेगी। बेहतर सड़क, ठहरने की सुविधाएं, व्यू प्वाइंट, सुरक्षा व्यवस्था और पर्यटन सुविधाओं के विकसित होने से राजमेरगढ़ न केवल जीपीएम जिले बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के प्रमुख प्राकृतिक पर्यटन स्थलों में अपनी अलग पहचान स्थापित करेगा।