डोंगरगढ़ में इस बार नवरात्रि पर आस्था, परंपरा और इतिहास का अद्भुत संगम देखने को मिला। आदिवासी गोंड समाज की सदियों पुरानी पंचमी भेंट यात्रा पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ संपन्न हुई। इस यात्रा में आज समाज के लोग खैरागढ़ राजपरिवार से जुड़ी राजा की प्राचीन तलवार लेकर माता बम्लेश्वरी के दरबार पहुंचे।
नवरात्रि की पंचमी तिथि पर मां बम्लेश्वरी मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी थी। छोटी मां बम्लेश्वरी मंदिर को 601 किलो फलों से सजाया गया, जिससे मंदिर का दृश्य बेहद आकर्षक और भव्य नजर आया। गोंड समाज के सैकड़ों लोग पारंपरिक वेशभूषा में ढोल-नगाड़ों के साथ बूढ़ादेव देव स्थान से भेंट यात्रा निकालते हुए मंदिर पहुंचे।

यह बूढ़ादेव देव स्थान गोंड समाज के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र है। मंदिर पहुंचने के बाद समाज के प्रतिनिधि किशोर नेताम और बैगा ने गर्भगृह में विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। उन्होंने माता को श्रद्धापूर्वक भेंट अर्पित की। पूरे आयोजन के दौरान प्रशासन ने कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की थी। पुलिस अधीक्षक अंकिता शर्मा और एसडीएम एम. भार्गव सहित अन्य अधिकारी मौके पर मौजूद रहे। प्रशासन, ट्रस्ट और समाज के आपसी सहयोग से यह कार्यक्रम शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ।
गोंड महासभा के अध्यक्ष रमेश उइके ने बताया कि पंचमी भेंट की यह परंपरा बहुत पुरानी है। इसे हर साल दोनों नवरात्र में पूरी श्रद्धा के साथ निभाया जाता है। उन्होंने कहा कि यह परंपरा समाज की आस्था और पहचान से गहराई से जुड़ी हुई है। पंचमी भेंट के मौके पर प्राचीन तलवार को मंदिर लाना इस परंपरा का अहम हिस्सा है।
एसडीएम एम. भार्गव ने इस आयोजन को सफलतापूर्वक संपन्न बताया। उन्होंने प्रशासन, पुलिस, ट्रस्ट और समाज के लोगों के सराहनीय योगदान की सराहना की। डोंगरगढ़ की यह पंचमी भेंट यात्रा केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं है। यह आदिवासी गोंड समाज की आस्था, उनकी परंपरा और क्षेत्र के गौरवशाली इतिहास का जीवंत उदाहरण है। यह आयोजन नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और विरासत से जोड़ने का काम भी करता है।