कोंडागांव में ग्राम नेवता से जूनापानी तक लगभग साढ़े चार किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण कार्य पीडब्ल्यूडी विभाग कोंडागांव द्वारा कराया जा रहा है। जन सूचना पटल के अनुसार इस कार्य की शुरुआत 15 जुलाई 2025 को की गई थी और ठेकेदार को पांच माह के भीतर कार्य पूर्ण करना था। यानी दिसंबर 2025 तक सड़क तैयार हो जानी चाहिए थी, लेकिन फरवरी 2026 तक भी निर्माण कार्य अधूरा पड़ा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि एक ओर समय सीमा का खुला उल्लंघन किया जा रहा है, तो दूसरी ओर सड़क निर्माण के नाम पर पर्यावरण की अनदेखी की गई है। ग्रामीणों के मुताबिक 50 से अधिक पेड़ों की बेतरतीब कटाई कर दी गई, कई पेड़ों को जला भी दिया गया। पेड़-पौधों की इस अंधाधुंध कटाई से क्षेत्र में आक्रोश व्याप्त है।
मामले में जब मुलमुला वन परिक्षेत्र अधिकारी धीरेंद्र मिश्रा से संपर्क किया गया तो उन्होंने स्पष्ट किया कि इस सड़क निर्माण के लिए वन विभाग से कोई एनओसी नहीं ली गई थी। पेड़ों की कटाई के लिए भी विभाग से किसी प्रकार की अनुमति नहीं दी गई थी और न ही वन परिक्षेत्र मूलमुला से कोई पत्राचार किया गया। बिना अनुमति पेड़ काटे जाने पर कार्रवाई करते हुए कटे हुए लकड़ी को डिपो में जमा कराया जा रहा है और अग्रिम कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है।
वहीं पीडब्ल्यूडी विभाग कोंडागांव के सब इंजीनियर प्रमोद नेताम ने बताया कि फॉरेस्ट क्लीयरेंस नहीं मिलने के कारण फिलहाल निर्माण कार्य बंद कर दिया गया है। अब सवाल यह उठता है कि जब फॉरेस्ट क्लीयरेंस ही नहीं मिला था तो निर्माण कार्य शुरू कैसे किया गया? और जब वन विभाग ने कार्रवाई की, तभी काम क्यों रोका गया?
इतना ही नहीं, एक ओर विभाग कार्य बंद होने की बात कह रहा है, वहीं दूसरी ओर ठेकेदार द्वारा फॉरेस्ट लैंड के आसपास अर्थवर्क के लिए मिट्टी-मुरूम की खुदाई जारी है। ग्रामीणों का आरोप है कि यह खुदाई भी बिना वैध अनुमति के की जा रही है।
खनिज विभाग कोंडागांव से जब इस संबंध में जानकारी ली गई तो सहायक खनिज अधिकारी गौतम नेताम ने संसाधनों की कमी का हवाला देते हुए कहा कि फील्ड निरीक्षण नहीं हो पाता, इसलिए मामले की जानकारी नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि बिल पास कराने या माइनिंग क्लीयरेंस के लिए ठेकेदार को विभाग के पास आना ही पड़ेगा, तब देखा जाएगा।
ऐसे में पीडब्ल्यूडी, फॉरेस्ट और खनिज विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। बिना क्लीयरेंस कार्य प्रारंभ होना, पेड़ों की अवैध कटाई, और खनिज विभाग की अनभिज्ञता—तीनों विभागों की भूमिका पर अब चौतरफा घेरा कसता नजर आ रहा है।