आदिवासी नेता मनीष कुंजाम ने नक्सलियों के डंप से बरामद सोने पर बयान दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि नक्सलियों तक विदेश से सोने की आपूर्ति होती रही है। कुंजाम ने दावा किया कि इसका संबंध स्विट्जरलैंड से हो सकता है, जिसकी गहन जांच आवश्यक है।
कुंजाम के अनुसार, यदि आरोप सही हैं, तो यह राष्ट्रीय सुरक्षा का बड़ा मामला है। उन्होंने बस्तर में सक्रिय संगठनों की आर्थिक मदद के स्रोतों की पारदर्शी जांच मांगी। उनका मानना है कि बाहरी आर्थिक मदद से नक्सली गतिविधियां बढ़ती हैं। आदिवासी नेता ने आत्मसमर्पण कर चुके नक्सलियों पर तीखा बयान दिया। उन्होंने कहा कि इन लोगों ने जल, जंगल, जमीन की लड़ाई नहीं लड़ी। कुंजाम ने आरोप लगाया कि नक्सली पहले खदानों का विरोध करते थे। बड़ी डील होने पर उनका विरोध अचानक खत्म हो जाता था। इससे खदानों का रास्ता साफ होता और परियोजनाएं शुरू होती थीं। उन्होंने इसे आदिवासी हितों का विश्वासघात बताया, जिससे स्थानीय लोगों को नुकसान हुआ।
मनीष कुंजाम ने नक्सलियों के डंप से मिले सोने का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह सोना विदेश से नक्सलियों तक पहुंचता रहा है। इस कथित नेटवर्क में स्विट्जरलैंड का भी संबंध हो सकता है। कुंजाम ने इसकी गहन जांच को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने बस्तर में सक्रिय संगठनों की आर्थिक मदद के स्रोतों की जांच पर जोर दिया।
कुंजाम ने हाल ही में आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि यह सरकारी नीति नहीं, बल्कि कथित समझौते का परिणाम है। दावा किया गया कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से समझौते के बाद आत्मसमर्पण हुआ। आत्मसमर्पण करने वाले बड़े कैडर के नक्सलियों को इनामी राशि के अलावा बड़ी रकम मिली।