{"_id":"69c157d31264f2c1610822ed","slug":"video-greater-noida-nefowa-foundation-raises-voice-at-trai-seminar-2026-03-23","type":"video","status":"publish","title_hn":"ग्रेटर नोएडा: लिफ्ट और बेसमेंट में 100% कनेक्टिविटी जरूरी, नेफोवा फाउंडेशन ने TRAI के सेमिनार में उठाई आवाज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ग्रेटर नोएडा: लिफ्ट और बेसमेंट में 100% कनेक्टिविटी जरूरी, नेफोवा फाउंडेशन ने TRAI के सेमिनार में उठाई आवाज
नोएडा ब्यूरो
Updated Mon, 23 Mar 2026 08:40 PM IST
Link Copied
ग्रेटर नोएडा वेस्ट स्थित लाखों निवासियों की आवाज नेफोवा फाउंडेशन ने टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया के सेमिनार में उठाई। पदाधिकारियों ने कहा कि अब इंटरनेट और मोबाइल नेटवर्क सुविधा नहीं, बल्कि शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर अनिवार्य है।
दीपांकर कुमार ने कहा कि लिफ्ट और बेसमेंट में 100 प्रतिशत कनेक्टिविटी होनी चाहिए। इन क्षेत्रों को पास या फेल का मानक बनाया जाए। अगर यहां नेटवर्क नहीं, तो पूरी बिल्डिंग फेल। रिपोर्ट में जिस फैराडे केज इफेक्ट का जिक्र है, वह अब सिर्फ तकनीकी शब्द नहीं रहा। ग्लास और स्टील से बनी आधुनिक इमारतें सिग्नल को इस तरह रोकती हैं कि ऊपरी मंजिलों पर नेटवर्क कमजोर पड़ जाता है, बेसमेंट और लिफ्ट में सिग्नल पूरी तरह खत्म हो जाता है, अधिक आबादी के कारण नेटवर्क जाम हो जाता है। यह स्थिति केवल असुविधा नहीं, बल्कि आपातकालीन परिस्थितियों में जानलेवा भी साबित हो सकती है।
वहीं दिनकर पांडे ने कहा है कि जब तक स्पष्ट मानक और जवाबदेही नहीं होगी, तब तक हर बिल्डिंग अपने-अपने स्तर पर अधूरी व्यवस्था देती रहेगी। नेफोवा ने सरकार और नियामक संस्थाओं के सामने मांगें रखी हैं। उन्होंने बताया कि डिजिटल एनओसी को अनिवार्य बनाया जाए। जैसे फायर और पर्यावरण क्लियरेंस जरूरी है, वैसे ही हर बिल्डिंग को डिजिटल कनेक्टिविटी के लिए एनओसी लेना अनिवार्य हो। प्री-कंस्ट्रक्शन डिजिटल प्लानिंग बिल्डिंग बनने से पहले ही नेटवर्क की प्लानिंग हो ताकि बाद में महंगे और अधूरे समाधान न करने पड़ें।
उन्होंने कहा कि मल्टी-ऑपरेटर सिस्टम लागू होना चाहिए। कम से कम तीन सेवा प्रदाता हों, ताकि उपभोक्ताओं के पास विकल्प और बेहतर सेवा मिले। वैश्विक मानकों को अपनाया जाए। भारत में भी वही डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर मानक लागू हों, जो विकसित देशों में हैं। बिल्डिंग मैनेजमेंट सिस्टम के साथ नेटवर्क को जोड़ा जाए, ताकि रियल-टाइम मॉनिटरिंग और ऑटोमैटिक फेलओवर संभव हो। लिफ्ट में फंसे व्यक्ति के पास नेटवर्क ही न हो, या बेसमेंट में आग लगने पर संचार पूरी तरह ठप हो जाए। यह केवल तकनीकी कमी नहीं, बल्कि सिस्टम की विफलता है।
एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें
अमर उजाला प्रीमियम वीडियो सिर्फ सब्सक्राइबर्स के लिए उपलब्ध है
प्रीमियम वीडियो
सभी विशेष आलेख
फ्री इ-पेपर
सब्सक्राइब करें
Next Article
Disclaimer
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।