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अंबाला: जिसे बेसहारा समझकर दुनिया ने दी भीख, मौत के बाद निकला लाखों का मालिक
शहर की व्यस्त सड़कों पर पिछले दस साल से एक बुजुर्ग ट्राइसाइकिल पर हाथ फैलाए नजर आता था। फटेहाल कपड़े, कमजोर शरीर और हाथ में कटोरा देख हर राहगीर का दिल पसीज जाता और कोई सिक्का तो कोई नोट उसकी मदद में डाल देता। लेकिन इस लाचार शख्स की मौत के बाद जब हकीकत से पर्दा उठा, तो पुलिस से लेकर आम जनता तक दंग रह गई। जिस लेखराज को दुनिया गरीब समझती रही, वह असल में लाखों की संपत्ति का मालिक निकला।
सिटी में लेखराज नाम का यह व्यक्ति रेलवे रोड स्थित हनुमान मंदिर के पास ट्राइसाइकिल पर बैठकर भीख मांगता था। 9 फरवरी को अचानक उसकी तबीयत बिगड़ी, जिसके बाद सामाजिक संस्था वंदे मातरम दल ने उसे अस्पताल में भर्ती कराया। तीन दिन चले इलाज के बाद लेखराज ने दम तोड़ दिया। असली सनसनी तब फैली जब पुलिस ने उसकी ट्राइसाइकिल के पीछे बंधे लोहे के छोटे से ट्रंक की तलाशी ली। इस बक्से में से न केवल उसकी जरूरत का सामान मिला, बल्कि भारी मात्रा में नकदी भी मिली। पुलिस को ट्रंक से 66,120 रुपये नकद मिले।
बैंक खातों में जमा हैं करीब 3.5 लाख रुपये
तलाशी के दौरान नकदी के साथ-साथ दो अलग-अलग बैंकों की पासबुक की प्रतियां भी मिलीं। जब इन खातों की जांच की गई तो आंकड़े चौंकाने वाले थे। पहले खाते में 3,32,000 रुपये जमा थे तो दूसरे में 434 रुपये शेष थे। नकद और बैंक बैलेंस मिलाकर करीब 4 लाख रुपये लेखराज के पास थे। हैरानी की बात यह है कि 50 हजार की जो गड्डी बरामद हुई, उस पर अक्टूबर महीने की बैंक ऑफ इंडिया की मुहर लगी थी। इससे यह साफ होता है कि लेखराज समय-समय पर बैंक से लेनदेन भी करता था। पुलिस अब इस गुत्थी को सुलझाने में जुटी है कि आखिर इतनी बड़ी रकम होने के बावजूद वह सड़कों पर भीख क्यों मांग रहा था।
अपनों ने छोड़ा साथ, संस्था ने किया अंतिम संस्कार
लेखराज की इस अमीरी के पीछे एक अकेलापन भी छिपा था। मौत के बाद उसका कोई भी परिजन सामने नहीं आया। महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर वंदे मातरम दल के सदस्यों ने ही उसका अंतिम संस्कार किया।
हमें सूचना मिली थी कि एक बुजुर्ग भिखारी की अस्पताल में मौत हो गई है। जब उसके सामान की जांच की गई तो 66,120 रुपये कैश और पासबुक मिली, जिसमें लाखों रुपये जमा हैं। फिलहाल मामले की जांच की जा रही है। — कुलदीप, चौकी इंचार्ज, अंबाला शहर
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