हरियाणा में निकाय चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। सभी प्रमुख राजनीतिक दल चुनावी मैदान में पूरी ताकत के साथ उतरने की तैयारी में जुट गए हैं। इसी कड़ी में कांग्रेस ने अपना घोषणापत्र जारी कर दिया है, जबकि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने भी संकल्प पत्र पेश कर अपनी प्राथमिकताओं को स्पष्ट किया है। कांग्रेस ने अपने घोषणापत्र में शहरी विकास, सफाई व्यवस्था, पेयजल, सीवरेज और पारदर्शी प्रशासन जैसे मुद्दों को प्रमुखता दी है। पार्टी ने वादा किया है कि नगर निकायों में जनता की भागीदारी बढ़ाई जाएगी और मूलभूत सुविधाओं को मजबूत किया जाएगा। वहीं भाजपा ने अपने संकल्प पत्र में स्मार्ट सिटी, डिजिटल सेवाओं के विस्तार, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और स्वच्छता को प्राथमिकता देने की बात कही है। चुनाव को देखते हुए दोनों ही दलों ने अपने-अपने उम्मीदवारों की घोषणा भी शुरू कर दी है। कई वार्डों में टिकट वितरण के बाद असंतोष भी सामने आया है। खासतौर पर भाजपा में बागी पार्षदों के मैदान में उतरने से मुकाबला रोचक होता जा रहा है। ये बागी उम्मीदवार पार्टी के अधिकृत प्रत्याशियों के सामने चुनौती पेश कर सकते हैं, जिससे चुनावी गणित प्रभावित होने की संभावना है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि निकाय चुनाव में स्थानीय मुद्दे और उम्मीदवारों की छवि अहम भूमिका निभाती है। ऐसे में दल-बदल और बगावत का असर सीधे तौर पर नतीजों पर पड़ सकता है। कांग्रेस जहां भाजपा के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश में है, वहीं भाजपा अपनी संगठनात्मक मजबूती के दम पर जीत का दावा कर रही है। कुल मिलाकर हरियाणा के निकाय चुनाव इस बार दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गए हैं। घोषणापत्र, उम्मीदवार चयन और बागी नेताओं की सक्रियता ने चुनावी मुकाबले को और भी कांटे का बना दिया है। आने वाले दिनों में सियासी गतिविधियां और तेज होने की संभावना है, जिसका सीधा असर चुनाव परिणामों पर देखने को मिलेगा।