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In Satrod, Hisar, the AMRUT scheme has become a source of misery for residents over the past eight years; work on the project had commenced in 2018.
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हिसार में 8 साल से सातरोड़ में अमृत योजना लोगों के लिए बनी जहर, 2018 में शुरु किया गया था अमृत योजना का काम
नगर निगम के वार्ड 10-11 गांव सातरोड़ में शुरु की गई अमृत योजना लोगों के लिए जहर बन गई है। गांव में सीवरेज व पेयजल की लाइन बिछाने के लिए 8 साल पहले इस परियोजना को शुरु किया गया था। सीवरेज- पेयजल की लाइन डालने के बाद गलियों का निर्माण किया जाना था। आज तक यह निर्माण कार्य पूरा नहीं हो सका। सीवरेज- पेयजल की लाइन जगह -जगह से लीक हैं। गांव की गलियां कहीं कच्ची तो कहीं रोडे़ डाल कर छोड़ी गई हैं।बारिश के दिनों में गलियों से निकलना मुश्किल हो जाता है। गलियों में कई जगह मेनहोल के गड्ढे अधूरे पड़े हैं। जिससे एक ओर हादसों की आशंका बनी हुई है।
अमृत योजना के तहत हिसार के गांव सातरोड़ को चुना गया था। करीब 35 किलोमीटर लंबी पेयजल पाइप लाइन बिछाई जानी थी। इसके लिए अक्तूबर 2018 में एक एजेंसी को वर्क ऑर्डर जारी किया गया था । मार्च 2020 तक कार्य पूरा करने की समय-सीमा तय की गई थी, लेकिन एजेंसी तय अवधि में काम पूरा नहीं कर सकी। इसके बाद निगम प्रशासन ने क्लॉज-3 लगाते हुए टेंडर रद्द कर नया टेंडर जारी किया। नए टेंडर के तहत करीब 12 किलोमीटर लंबी लाइन बिछाई जानी थी, जिस पर 19.32 करोड़ रुपये खर्च होने थे।
एजेंसी को एक वर्ष में कार्य पूरा करना था। 2022 में गांव में तात्कालिक सीएम मनोहरलाल पहुंचे थे। उन्होंने छह महीने में काम पूरा करने के लिए आदेश दिए थे। अब करीब 9 साल बाद सीवरेज- पेयजल की लाइन डालने का काम पूरा हो चुका है। कुछ स्थानों पर सीवरेज की लाइन के मेनहोन अधूरे पड़े हैं।ग्रामीणों ने बताया कि जब से सातरोड़ नगर निगम में शामिल हुआ है, तब से यहां सड़कों का निर्माण नहीं हुआ।
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